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Tuesday, 2 August 2022

Rakshabandhan 2022 : राखी के त्योहार को लेकर कंफ्यूजन है, 11 या 12 अगस्त को मनाये, पढिए पूरी खबर

 

Rakshabandhan 2022 : राखी के त्योहार को लेकर कंफ्यूजन है, 11 या 12 अगस्त को मनाये, पढिए पूरी खबर

Rakshabandhan 2022 : राखी के त्योहार को लेकर कंफ्यूजन है, 11 या 12 अगस्त को मनाये, पढिए पूरी खबर

  • Rakshabandhan 2022 : राखी के त्योहार को लेकर लोगों के मन में एक कंफ्यूजन है, जिसे दूर कर लेना अच्छा होगा. दरअसल इस बार पूर्णिमा तिथि दो दिन पड़ रही है 11 और 12 को. जिसके कारण लोग समझ नहीं पा रहे हैं रक्षाबंधन किस दिन मनाएं.

  • 11 और 12 दोनों दिन है पूर्णिमा तिथि.

  • 11 को ही बांधी जाएगी राखी.

  • भद्रा नक्षत्र के बाद ही मनाई जाएगा रक्षाबंधन


Rakshabandhan-2022 : हर साल शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है. भाई बहन के प्रेम का पावन पर्व रक्षाबंधन पर बहन भाई की कलाई में रक्षा सूत्र बांधकर उनकी लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं. यह त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है. लेकिन इस बार इसको लेकर लोगों के मन एक कंफ्यूजन है, जिसे दूर कर लेना अच्छा होगा. दरअसल इस बार पूर्णिमा तिथि (Raksha Bandhan 2022 Date) दो दिन पड़ रही है 11 और 12 को. जिसके कारण लोग समझ नहीं पा रहे हैं राखी आखिर किस दिन बांधी जाएगी.   


पंचाग क्या कहता है रक्षा बंधन को लेकर

पंचांग के मुताबिक सावन माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 11 अगस्त को सुबह 10 बजकर 38 मिनट पर शुरू होकर अगले दिन 12 अगस्त को 7 बजकर 5 मिनट पर समाप्त हो रही है. इस लिहाज से 12 अगस्त को उदया तिथि होने के बाद भी रक्षा बंधन 11 को ही मनाया जाएगा. क्योंकि पूर्णिमा तिथि 11 को पूरा दिन है. 


इस दिन बाँधे राखी को


पूर्णिमा तिथि आरंभ- 11 अगस्त, सुबह 10 बजकर 38 मिनट से 

पूर्णिमा तिथि की समाप्ति- 12 अगस्त. सुबह 7 बजकर 5 मिनट पर

शुभ मुहूर्त- 11 अगस्त को सुबह 9 बजकर 28 मिनट से रात 9 बजकर 14 मिनट 

अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 6 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक

अमृत काल- शाम 6 बजकर 55 मिनट से रात 8 बजकर 20 मिनट तक

ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 29 मिनट से 5 बजकर 17 मिनट तक 

रक्षा बंधन 2022 भद्रा काल | Raksha Bandhan 2022 Bhadra Kaal
रक्षा बंधन के दिन भद्रा काल की समाप्ति- रात 08 बजकर 51 मिनट पर 

रक्षा बंधन के दिन भद्रा पूंछ- 11 अगस्त को शाम 05 बजकर 17 मिनट से 06 बजकर 18 मिनट तक

रक्षा बंधन भद्रा मुख - शाम 06 बजकर 18 मिनट से लेकर रात 8 बजे तक

क्यो मनाते हैं रक्षा बंधन का त्यौहार

रक्षाबन्धन भारतीय धर्म संस्कृति के अनुसार रक्षाबन्धन का त्योहार श्रावण माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह त्योहार भाई-बहन को स्नेह की डोर में बांधता है। इस दिन बहन अपने भाई के मस्तक पर टीका लगाकर रक्षा का बन्धन बांधती है, जिसे राखी कहते हैं। यह एक हिन्दू व जैन त्योहार है जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। श्रावण (सावन) में मनाये जाने के कारण इसे श्रावणी (सावनी) या सलूनो भी कहते हैं। रक्षाबन्धन में राखी या रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्त्व है। राखी कच्चे सूत जैसे सस्ती वस्तु से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे, तथा सोने या चाँदी जैसी मँहगी वस्तु तक की हो सकती है। रक्षाबंधन भाई बहन के रिश्ते का प्रसिद्ध त्योहार है, रक्षा का मतलब सुरक्षा और बंधन का मतलब बाध्य है। रक्षाबंधन के दिन बहने भगवान से अपने भाईयों की तरक्की के लिए भगवान से प्रार्थना करती है। राखी सामान्यतः बहनें भाई को ही बाँधती हैं परन्तु ब्राह्मणों, गुरुओं और परिवार में छोटी लड़कियों द्वारा सम्मानित सम्बंधियों (जैसे पुत्री द्वारा पिता को) भी बाँधी जाती है। कभी-कभी सार्वजनिक रूप से किसी नेता या प्रतिष्ठित व्यक्ति को भी राखी बाँधी जाती है। रक्षाबंधन के दिन बाजार मे कई सारे उपहार बिकते है, उपहार और नए कपड़े खरीदने के लिए बाज़ार मे लोगों की सुबह से शाम तक भीड होती है। घर मे मेहमानों का आना जाना रहता है। रक्षाबंधन के दिन भाई अपने बहन को राखी के बदले कुछ उपहार देते है। रक्षाबंधन एक ऐसा त्योहार है जो भाई बहन के प्यार को और मजबूत बनाता है, इस त्योहार के दिन सभी परिवार एक हो जाते है और राखी, उपहार और मिठाई देकर अपना प्यार साझा करते है।

अब तो प्रकृति संरक्षण हेतु वृक्षों को राखी बाँधने की परम्परा भी प्रारम्भ हो गयी है। हिन्दुस्तान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पुरुष सदस्य परस्पर भाईचारे के लिये एक दूसरे को भगवा रंग की राखी बाँधते हैं।हिन्दू धर्म के सभी धार्मिक अनुष्ठानों में रक्षासूत्र बाँधते समय कर्मकाण्डी पण्डित या आचार्य संस्कृत में एक श्लोक का उच्चारण करते हैं, जिसमें रक्षाबन्धन का सम्बन्ध राजा बलि से स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होता है। भविष्यपुराण के अनुसार इन्द्राणी द्वारा निर्मित रक्षासूत्र को देवगुरु बृहस्पति ने इन्द्र के हाथों बांधते हुए निम्नलिखित स्वस्तिवाचन किया (यह श्लोक रक्षाबन्धन का अभीष्ट मन्त्र है)-

येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥

इस श्लोक का हिन्दी भावार्थ है- "जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बाँधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुझे बाँधता हूँ। हे रक्षे (राखी)! तुम अडिग रहना (तू अपने संकल्प से कभी भी विचलित न हो।)"



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