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Sunday, 17 July 2022

विभिन्न ग्रामवासियों के साथ मिलकर बामेश्वर महादेव की धरती पर बद्रीनाथ विधायक राजेन्द्र सिंह भंडारी एवं जिला पंचायत अध्यक्ष रजनी भंडारी द्वारा किया जा रहा है शिव महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन

 विभिन्न ग्रामवासियों के साथ मिलकर  बामेश्वर महादेव की धरती पर बद्रीनाथ विधायक राजेन्द्र सिंह भंडारी एवं जिला पंचायत अध्यक्ष रजनी भंडारी द्वारा किया जा रहा है शिव महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन


केदारखण्ड एक्सप्रेस न्यूज़

सोनिया मिश्रा/चमोली

 सावन का महीना शिव की भक्ति के लिए अत्यंत शुभ है। ऐसे अत्यंत पवित्र सावन मास में बामेश्वर महादेव मंदिर की शिवमयी भूमि पर सप्तदिवसीय श्री शिव महापुराण का अनुष्ठान कृष्णप्रिया जी की दिवमयी वाणी में ग्राम भदूडा, गंजेड, संगूड, त्रिशुला, कफल पानी, भरतपूर, ढामक, आलीशाल, बगड, सेम, सांकरी, नैल, पाडुली, बासकण्डी, काण्डई एवं समस्त बामेश्वर क्षेत्र के ग्रामवासियों के साथ बद्रीनाथ विधायक राजेन्द्र सिंह भंडारी एवं जिला पंचायत अध्यक्ष रजनी भंडारी द्वारा शिव महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। 

कथा के द्वितीय दिवस पर क्षेत्र वासियों में भारी उत्साह नजर आया। कथा में शिव महिमा का वर्णन करते हुए दीदीजी ने बताया - भोलेनाथ आशुतोष भगवान हैं। जहाँ और देवताओं की प्रसन्नता हेतु अनेकों अनुष्ठान का विधान हैं वहीं भोले भंडारी केवल जल चढ़ाने से प्रसन्न हो जाते हैं। जो कोई शिवभक्त सच्चे मन से उनकी साधना करता है, उसे जीवन में कभी किसी चीज का भय नहीं रहता है क्योंकि भोलेनाथ अभयंकर हैं। उनकी कथा जीवन में समस्त मनोकामनाओ को पूरा करने वाली है।

  भगवान शिव को जल क्यों चढ़ाया जाता है? देवी जी ने बताया कि - श्रावण मास में समुद्र मंथन किया गया था। समुद्र मथने के बाद जो विष निकला उसे भगवान शंकर ने कंठ में समाहित कर सृष्टि की रक्षा की लेकिन विषपान से महादेव का कंठ नीलवर्ण हो गया। इसी से उनका नाम नीलकंठ महादेव पड़ा। विष के प्रभाव को कम करने के लिए सभी देवी- देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया। इसलिए शिवलिंग पर जल चढ़ाने का खास महत्व है।

कथा में आगे कहा कि - भगवान शिव और भगवान विष्णु में कोई अंतर नहीं है। कुछ लोग भगवान शिव को नहीं मानते वे ये नहीं जानते कि शिवभक्ति किये बिना भगवान विष्णु या राम जी की कृपा प्राप्त करना असम्भव हैं। शिव आदि देवता हैं। सृष्टि के आरंभ और अंत शिव ही हैं। हम सभी में भगवान शिव का ही वास है। शिव शक्ति के बिना हम शव हैं।

शिवभक्तों की अनेकों दिव्य कथाओं का वर्णन करते हुए परमपूज्या दीदीजी ने बताया कि "भगवान शिव को "भोला भाला" कहा जाता है क्योंकि भक्तों के लिए वे अत्यंत भोले हैं। सहज ही दूर्लभ वस्तुयों को प्राप्त कराने वाले हैं। और दुष्टों के लिए वे "भाले" की तरह हैं उनका संहार करने में तनिक भी देर नहीं लगाते। 

शिवजी के अत्यंत रसमयी भजनों से मंदिर परिसर गूंज उठा। सभी श्रद्धालु शिव भक्ति में सराबोर होकर जमकर झूमें और शिवकथा कृपाम्रत प्राप्त किया।।

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