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Monday, 27 June 2022

अपनी कॉमेडी से लोगों को गुदगुदाने वाला, मेरी बामणी के गायक नवीन सेमवाल अब नहीं रहे, समूचे प्रदेश में शोक की लहर



अपनी कॉमेडी से लोगों को गुदगुदाने वाला, मेरी बामणी के गायक नवीन सेमवाल अब नहीं रहे, समूचे प्रदेश में शोक की लहर

🖋कुलदीप राणा आजाद/-

रूद्रप्रयाग। साल 2018 में  बामणी जैसे सुपरहिट गढ़वाली गीत से प्रसिद्ध हुए रूद्रप्रयाग के नवीन सेमवाल की आकास्मिक मृत्यु का समाचार पाकर साहसा विश्वास नहीं हो रहा है। लेकिन नियति के आगे दुनिया के इस सत्य को झुठला भी नहीं सकते हैं। आज तडके सुबह साढे छ: बजे देहरादून के जौलीग्रांट अस्पताल में नवीन सेमवाल ने अंतिम सांस ली, और इस तरह एक ऐसे शख्सियत का अवसान हो गया है जो उत्तराखंड की पर्वतीय अंचलों की लोक संस्कृति सभ्यता को अपने अभिनय और लेखनी के जरिए आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे थे। नवीन अपने पीछे तीन मासूम बच्चों, पत्नी और वृद्ध माता को छोड़ गये हैं। 

44 वर्ष की उम्र में नवीन सेमवाल का इस तरह जाना लोक संस्कृति के ध्वजवाहक के रूप में एक बहुत बड़ी क्षति हुई है जिसकी भरपाई निकट भविष्य में कर पाना बहुत मुश्किल है। साल 1995- 96 में अलकनंदा मंदाकिनी कला सांस्कृतिक मंच से अपने कैरियर की शुरुआत करते हुए उन्होंने विभिन्न गढ़वाली गीतों में अभिनय करते हुए लगातार संघर्ष कर रहे थे। लेकिन साल 2018 में उन्होंने एक ऐसा गीत लिखा और गाया जिसने पूरे उत्तराखंड में धमाल मचा दिया था। मेरी बामणी के नाम से सुप्रसिद्ध हुए इस गीत को पूरे उत्तराखंड में लोगों ने बेपनाह प्यार दिया। और यह वही गीत था जिसने नवीन सेमवाल के संघर्षों को एक नई पहचान दी थी। हालांकि इससे पूर्व भी नवीन सेमवाल की चार एल्बम आ चुकी थी। 

मूल रूप से रूद्रप्रयाग जनपद के उखीमठ विकासखंड के मूल धार गाँव निवासी नवीन सेमवाल ने मेरी बामणी के बाद बामणी-2, संजू का बाबा जैसे गीत भी गाये। उसके बाद 2 दर्जन से अधिक कॉमेडी हास्य लघु फिल्में में नवीन सेमवल के अभिनय को सोशल मीडिया पर खूब पसंद लोगों द्वारा किया जा रहा था। नवीन सेमवाल गायक होने के साथ ही मजे हुए प्रसिद्ध रंगकर्मी रहें हैं। उन्होंने थिएटर के माध्यम से उत्तराखंड के साथ ही मुंबई, दिल्ली समेत कई स्थानों पर अपने कार्यक्रम दिए। 

पिछले 12 दिनों से नवीन सेमवाल जौली  ग्रांट देहरादून के अस्पताल में भर्ती थे बताया जा रहा है उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और आज सुबह करीब 6:30 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया। उनके निधन की खबर जैसे ही आग की तरफ फैली तो न केवल रुद्रप्रयाग जनपद बल्कि समूचे उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई। लोक गायक विक्रम कप्रवाण, कुलदीप कप्रवाण, अजय नौटियाल,  कलश  साहित्यिक संस्था के संस्थापक ओम प्रकाश सेमवाल, कवि जगदंबा चमोला, मुरली दीवान, वरिष्ठ पत्रकार रमेश पहाड़ी श्यामलाल सुन्दरियाल, अनुसूया प्रसाद मलासी, कैलाश खंडूरी, कुलदीप राणा आजाद, बृजेश भट्ट, विनय बहुगुणा आदि ने गहरा दुःख व्यक्त किया है। 

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