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Thursday, 28 April 2022

खुलासा: अधिकारियों ने खुद प्रोजेक्ट बनाया और प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट बताया, कॉर्बेट के तीन अफसरों पर गिरी गाज, होगी जांच

 खुलासा: अधिकारियों ने खुद प्रोजेक्ट बनाया और प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट बताया, कॉर्बेट के तीन अफसरों पर गिरी गाज, होगी जांच


केदारखण्ड एक्सप्रेस न्यूज़

पीएम मोदी का नाम इस्तेमाल करके टाइगर सफारी के नाम पर पेड़ काटने से लेकर अवैध निर्माण और तमाम अनियमितताएं की गईं, तो इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि इस मामले में दूसरे अधिकारी भी नप सकते हैं।

विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के तहत पाखरों रेंज में जिस टाइगर सफारी के निर्माण को वन विभाग के कुछ आला अफसरों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट बताया जा रहा था, दरअसल उसकी जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय को थी ही नहीं।पीएमओ ने इस संबंध में उत्तराखंड शासन या वन विभाग को कभी कोई दिशा-निर्देश भी जारी नहीं किए थे। बताया जा रहा है कि तीन आईएफएस अधिकारियों पर गाज के गिरने के बाद अब इसकी भी जांच हो सकती है कि किसने इस प्रोजेक्ट के साथ प्रधानमंत्री का नाम जोड़ा। बताया तो यहां तक जा रहा है उल्टे पीएमओ ने इस मामले में एतराज भी जताया था।अमर उजाला की पड़ताल में पाया गया कि शासन स्तर से लेकर वन मुख्यालय स्तर तक कहीं कोई ऐसा आदेश या गाइडलाइन प्राप्त नहीं हुई, जिसमें पीएमओ के स्तर से कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पाखरों रेंज में टाइगर सफारी के निर्माण का कोई आदेश हो।

जब टाइगर सफाई का काम शुरू हुआ था, तात्कालीन पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ ने इस संबंध में कॉर्बेट निदेशक से पीएमओ के ड्रीम प्रोजेक्ट संबंधी किसी पत्र के बारे जानकारी मांगी थी, लेकिन कॉर्बेट निदेशक ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं करा पाए थे। पीएमओ पहले ही मामले का संज्ञान ले चुका

अब जब यह बात साफ हो गई है कि पीएम मोदी का नाम इस्तेमाल करके टाइगर सफारी के नाम पर पेड़ काटने से लेकर अवैध निर्माण और तमाम अनियमितताएं की गईं तो इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि इस मामले में दूसरे अधिकारी भी नप सकते हैं। बताया जा रहा है कि पीएमओ पहले ही इस मामले का संज्ञान ले चुका है कि किसके स्तर से पीएम मोदी का नाम इस प्रोजेक्ट में डाला गया।

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