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Saturday, 19 March 2022

घिंदुडी के बिना पहाड़ का लोकजीवन नीरस, आज भी अलसुबह गौरैया की चहचहाट करती है आनंदित...

 घिंदुडी के बिना पहाड़ का लोकजीवन नीरस, आज भी अलसुबह गौरैया की चहचहाट करती है आनंदित...

केदारखण्ड एक्सप्रेस न्यूज़

(गौरया दिवस 20 मार्च विशेष)

ग्राउंड जीरो से संजय चौहान 

आज विश्व गौरैया बचाओ दिवस है। पूरे विश्व में गौरैया इस समय गहरे संकट में है। हमारे उत्तराखंड में भी गौरैया संकट में है। आधुनिकता की चकाचौन्द में इनके परंपरागत आशियानों पर भी संकट आन पड़ा है। पुश्तेनी घरो की जगह सीमेंट के जंगल खड़े हो गए है जिस कारण से इन्हें अपने आशियाने के लिए भटकना पड़ रहा है।

 अब गांवो में गौरैया यदा कदा ही दिखाई देती है। पता नहीं कहा चली गई है ये घिनुड़ी ...! भोर होते है ये अपनी मधुर आवाज से मन को मोह लेती थी। कुछ सालों पहले तक घरों में फुदकने और चहचहाने घिनुडी सुबह की पहली किरण के साथ घर की छतों, चौक में गौरैया के झुंड अपनी चहक से सुबह को खुशगंवार बना देते थे। नन्ही गौरैया के सानिध्य भर से बच्चों के चेहरे पर मुस्कान खिल उठती थी, लेकिन अब गौरैया के झुंड तो दूर की बात है, एक गौरैया भी मुश्किल से दिखाई पड़ती है। समय के साथ साथ ये भी कही गुम सी हो गई है।

आपको बताते चलें की गौरेया पासेराडेई परिवार की सदस्य है, लेकिन कुछ लोग इसे वीवर फिंच परिवार की सदस्य मानते हैं। इनकी लम्बाई 14 से 16 सेंटीमीटर होती है तथा इनका वजन 25 से 32 ग्राम तक होता है। एक समय में इसके कम से कम तीन बच्चे होते है। गौरेया अधिकतर झुंड में ही रहती है। भोजन तलाशने के लिए गौरेया का एक झुंड अधिकतर दो मील की दूरी तय करते हैं। यह पक्षी कूड़े में भी अपना भोजन ढूंढ़ लेते है।


गौरतलब है कि गौरेया आज संकटग्रस्त पक्षी है जो पूरे विश्व में तेज़ी से दुर्लभ हो रही है। दस-बीस साल पहले तक गौरेया के झुंड सार्वजनिक स्थलों पर भी देखे जा सकते थे। लेकिन खुद को परिस्थितियों के अनुकूल बना लेने वाली यह चिड़िया अब भारत ही नहीं, यूरोप के कई बड़े हिस्सों में भी काफी कम रह गई है। ब्रिटेन, इटली, फ्रांस, जर्मनी और चेक गणराज्य जैसे देशों में इनकी संख्या जहाँ तेज़ी से गिर रही है, तो नीदरलैंड में तो इन्हें "दुर्लभ प्रजाति" के वर्ग में रखा गया है।


कवि अजीज अंसारी की गौरैया दिवस पर लिखी एक खूबसूरत कविता:


लाज शरम सब छोड़ के आई गौरैया,अपना साथी साथ में लाई गौरैया।

रूठ गई थी शायद हमसे ऐ लोगों, खुशी मनाओ लौट के आई गौरैया।किसकी छत पे खाना तूने खाया है, और कहां पे प्यास बुझाई गौरैया।

तू आई तो तेरे साथी भी आए, मेहफिल तूने खूब जमाई गौरैया।घर में तुझको देख के अच्छा लगता है, मन की तूने प्यास बुझाई गौरैया।

नाना तेरे साथ में गाना गाते हैं, नानी के भी मन को भाई गौरैया।बच्चों ने तो पिंजरा ला के रक्खा था, लेकिन उनके हाथ ना आई गौरैया।

तू आई तो घर आंगन में फूल खिले, हंसी खुशी को साथ में लाई गौरैया।घर में तेरे होने से है खुशहाली, यू भी सब के काम तू आई गौरैया।

प्रेम की दौलत अपने पास है बचपन से, यह दौलत ही तुझपे लुटाई गौरैया।आज तो हम सब मिल के जश्न मनाएंगे, आज हमारे घर में आई गौरैया।

ये ना कहना कोई तेरे साथ नहीं,तू तो सबके दिल में समाई गौरैया।

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