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Tuesday, 11 January 2022

केदारघाटी में कुलदीप रावत को मिल रहे भारी जन समर्थन से भाजपा कांग्रेस भयभीत


केदारघाटी में कुलदीप रावत को मिल रहे भारी जन समर्थन  से भाजपा कांग्रेस भयभीत


डैस्क : केदारखण्ड एक्सप्रेस न्यूज़

रूद्रप्रयाग। केदारघाटी में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में पिछले एक दशक से उतरे कुलदीप रावत को मिल रहे भारी जन समर्थन से भाजपा कांग्रेस भयभीत नजर आ रही है। यही कारण है कि भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टी  कुलदीप रावत के खिलाफ हरक सिंह रावत जैसे कद्दावर नेता को केदारनाथ से चुनाव मैदान में उतारने पर मंथन कर रही है। जबकि कांग्रेसी कुलदीप रावत पर शराब और पैसा बांटने जैसे दुष्प्रचार में जुटी हुई है। 

दूसरी तरफ केदारनाथ विधानसभा में कुलदीप रावत के प्रति लोगों की न केवल सहानुभूति दिखाई दे रही है बल्कि उनके द्वारा किए गए कार्यों की भी लोग खूब प्रशंसा कर रहे है। कांग्रेस पार्टी से ही पूर्व जिला पंचायत सदस्य संगीता नेगी ने निर्दलीय प्रत्याशी कुलदीप रावत की खूब प्रशंसा की है। जबकि उन्होंने केदारनाथ में कांग्रेस की सत्ता होने के बाद भी लोगों की समस्याओं का हल ना होने की बात कही है। इससे स्पष्ट होता है कि जब कांग्रेस के ही लोग कांग्रेस का विरोध कर रहे हैं तो फिर अन्य दलों के लोग तो करेंगे ही। लेकिन केदारघाटी में भाजपा भी कांग्रेस का विरोध नहीं कर रही है बल्कि भाजपा कांग्रेस मिलकर कुलदीप रावत का विरोध कर रहे हैं तो इससे उनकी भय की छटपटाहट स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। 

दरअसल 2017 के चुनाव में कुलदीप रावत निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मात्र करीब आठ सौ वोटों से कांग्रेस प्रत्याशी  से पराजित हुए थे, लेकिन हारने के बावजूद भी कुलदीप रावत लगातार केदारघाटी में लोगों के बीच रहे और उनके सुख दु:ख के साथी बने। दो हजार से अधिक गरीब कन्याओं की शादी करवाने की बात हो या फिर वैश्विक महामारी कोविड-19 के उस दौर में लोगों के घरों तक राशन पहुंचाना हो, कुलदीप रावत बखूबी जनसेवा में लगे रहे। यही कारण है आज केदारघाटी में उनकी जबरदस्त लहर चल रही है। सोशल मीडिया के माध्यम से हुए तमाम सर्वे में अब तक कुलदीप रावत का नाम सबसे ऊपर आ रहा है जबकि लोगों से बातचीत करने पर भी कुलदीप रावत को ही लोग अपना नेता मानते हैं। पहले सुनिए क्या कहते हैं केदारघाटी की जनता-



दरअसल केदारघाटी में बारी बारी से भाजपा और कांग्रेस ने दस दस साल राज किया है, किंतु घाटी में आज भी बुनियादी सवाल जस के तस है। सड़कों की स्थिति बेहद खस्ताहाल स्थित है, 21वीं शताब्दी में आज भी कहीं गांव में  बिजली नहीं पहुंची है, जबकि कहीं गांव में सड़क नहीं पहुंच पाई है। अस्पताल रेफरल सेंटर बने हुए हैं। जबकि कहीं गांव में संचार की भी बड़ी समस्या अब तक बनी हुई है। 21 वर्ष उत्तराखंड राज्य बने हुए हो गये है और 7 दशक से भी ज्यादा हमारे देश को आजाद हुए हो गए हैं लेकिन आज भी केदार घाटी की स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं दिखाई दे रहा है जबकि  प्राकृतिक आपदाएं जब तक गहरे घाव करती रही हैं  बावजूद केदारनाथ यात्रा की वजह से लोग थोड़ा बहुत उठ खड़े होने की हिम्मत करते हैं अन्यथा सरकारों और जनप्रतिनिधियों की नाकामी इस पूरे घाटी में दिखाई देती है।

कुलदीप रावत पर लोग इसलिए भी भरोसा कर रहे हैं क्योंकि वहां एक संपन्न व्यक्ति है, भरपूर पैसे होने के बावजूद भी उस समाज सेवा के क्षेत्र में उतर रहे हैं और निस्वार्थ भाव से लोगों की मदद कर रहे हैं।

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