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Monday, 17 January 2022

लापरवाह और बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था ने फिर मौत के घाट उतारा जच्चा बच्चा को

 


लापरवाह और बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था ने फिर मौत के घाट उतारा जच्चा बच्चा को


सोनिया मिश्रा/केदारखण्ड एक्सप्रेस

पोखरी। पहाड़ों की स्वास्थ्य व्यवस्था ठीक होने का नाम नहीं ले रही है लापरवाह और बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था ने न जाने कितनी ही जाने पहाड़ों में गर्भवती महिलाओं की ले ली है और न जाने  कितने ही नवजात शिशुओं को इस दुनिया में आने से पहले की रुखसत कर दिया है। लेकिन हमारा सिस्टम हमारी सरकारें पहाड़ की इस बदहाली को सुधारने का नाम नहीं ले रही है और यह सिलसिला मयस्सर जारी है। जनपद चमोली के विकासखंड पोखरी सीएससी में बीते रविवार को फिर उत्तराखंड की इसी बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और लापरवाह डॉक्टरों ने एक गर्भवती और उसके बच्चे को मौत के घाट उतार दिया है। 


रविवार को तड़के करीब 4:00 बजे श्री गढ़ गांव की जयंती देवी पत्नी दर्शन सिंह को प्रसव के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोखरी में भर्ती कराया गया करीब 2 घंटे बाद महिला ने एक मृत शिशु को जन्म दिया और 3 घंटे बाद महिला की मौत हो गई मृतका के भाई अमन और जाति ममता ने आरोप लगाया कि तड़के करीब 4:00 बजे जयंती प्रसव पीड़ा से करा रही थी डॉक्टर को बुलाने गए तो वहीं करीब 1 घंटे देरी से पहुंचे जिसके बाद उसने मृत बच्चे को जन्म दिया और करीब 3 घंटे बाद उसने भी दम तोड़ दिया परिजनों ने मामले की जांच करने की मांग उठाई इधर अस्पताल के चिकित्सक  परिजनों के आरोपों को नकार रहे हैं। 

यह पहला मामला नहीं है जब गर्भवती और उसके नवजात शिशु ने दम तोड़ा हो बल्कि पहाड़ के हर अस्पतालों से अक्सर इसी तरह की खबरें अखबारों की सुर्खियां बटोरती हैं  लेकिन जिन लोगों को हम वोट देकर इन व्यवस्थाओं को सुधारने का जिम्मा सौंपते हैं वह पार्टी पार्टी में बिजी रहते हैं। दल बदलने में बिजी रहते हैं। सरकार को गिराने बनाने में बिजी रहते हैं। खाने कमाने में बिजी रहते हैं। अपना घर परिवार बनाने में बिजी रहते हैं। जनता मेरे तो मेरे, गर्भवती दम तोड़े  तो तोड़े, शिशु इस दुनिया में आने से पहले दम तोड़े तो तोड़े,  बीमार पहाड़ी पगडंडियों पर  जान गवा रहे हैं लेकिन इन नेताओं को क्या। पहाड़ के लोगों को भोले भाले समझ कर यह पिछले 20 वर्षों से लूटते  आए हैं। जनता के दुख दर्द से इन्हें कोई सरोकार नहीं है। अगर पहाड़ की दर्द को नेताओं ने करीब से महसूस किया होता तो आज इस तरह से असमय ही गर्भवती अपनी जाने नहीं गंवाती। 

एक बार फिर विधानसभा चुनाव सामने हैं अब समय आ गया है 20 वर्षों से   पहाड़ के साथ छलावा कर रहे नेताओं को सबक सीखाने का। समय  आ गया है पहाड़ की लड़खड़ा थी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने की दिशा में कार्य करने की समय आ गया है झूठे आश्वासनों से पहाड़ को चलने वाले नेताओं को सत्ता से उखाड़ फेंकने का समय आ गया है। 

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