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Saturday, 18 December 2021

क्या विधायक भरत सिंह चौधरी का टिकट कटेगा? और कौन है भाजपा में प्रबल दावेदार


 विधायक भरत सिंह चौधरी का टिकट कटेगा? और कौन है भाजपा में प्रबल दावेदार

-कुलदीप सिंह राणा आजाद/रूद्रप्रयाग 

रूद्रप्रयाग।  2022 विधान सभा चुनावों को लेकर बेहद कम समय अब रह चुका है ऐसे में चुनावों की सरगरर्मियां अपने चरम पर हैं हालांकि अभी जो उत्साह प्रत्याशियों में देखा जा रहा है वह वोटरों में कहीं भी नजर नहीं आ रहा है। आज बात रूद्रप्रयाग विधान सभा की करेंगे जहाँ भाजपा के भीतर टिकट को लेकर भारी द्वंद चल रहा है। वर्ष 2017 में रिकार्ड तोड़ मतों से विजयश्री हुए विधायक भरत सिंह चौधरी को भी टिकट के लिए संर्घष करना पड़ रहा है और रूद्रप्रयाग विधान सभा से दावेदारों की लम्बी फेहरिस्त विधायक चौधरी की और भी चिंता बढ़ा रही हैं। वर्तमान में 2022 को लेकर भाजपा में सात प्रत्याशी टिकट की दौड़ में नजर आ रहे हैं। 

भारतीय जनता पार्टी में विधायक भरत सिंह चौधरी के अलावा पूर्व राज्य मंत्री बीरेन्द्र बिष्ट, पूर्व जिला जिला अध्यक्ष एवं बाल संरक्षण आयोग के सदस्य वाचस्पति सेमवाल, भाजपा के वरिष्ट नेता बीर सिंह रावत, पूर्व राज्य मंत्री शिव प्रसाद ममगाई, प्रदेश सह मीडिया प्रभारी कमलेश उनियाल, जिला महामंत्री विक्रम कण्डारी और कुलदीप आजाद नेगी भी 2022 में टिकट  को लेकर अपनी दावेदारी प्रमुखता से कर रहे हैं। दावेदारों की इतनी लम्बी लिस्ट से ये तो स्पष्ट हो जाता है कि रिकॉर्ड मतों से 2017 में चुनाव जितने के बाद भी विधायक भरत सिंह चौधरी भाजपा संगठन में ही खुद अपनी जगह नहीं बना पायें हैं। 

टिकट की दावेदारी कर रहे भाजपा के आधा दर्जन से अधिक दावेदारों द्वारा जनता के बीच ऐसा कोई भी अवसर नहीं छोड़ा जा रहा जो उन्हें जन सम्पर्क का मौका दे रहा है। पाण्डव नृत्य, रामलीला, चक्रब्यू मंचन, क्रिकेट मैच उद्घाटन से लेकर गाँवों में होने वाले हर छोटे बड़े धार्मिक और सामाजिक अनुष्ठानों में शामिल हो रहे हैं। जबकि पूरी विधान सभा में पोस्टर लगाने की ऐसी होड़ मची है जैसे पोस्टर प्रतियोगिता चल रही हो। भाजपा के दावेदारों की इस तरह की तैयारी इस बात का संकेत दे रही है कि भाजपा संगठन द्वारा टिकट किसी को भी दिया जा सकता है। मतलब साफ है कि विधायक भरत सिंह चौधरी की रिपोर्ट संगठन में अच्छी नहीं जा रखी है। सूत्रों की मानें तो भाजपा संगठन द्वारा दो अंतरिक सर्वें किए जा चुके हैं और दोनों ही सर्वें में विधायक चौधरी की रिपोर्ट अच्छी नहीं गई हैं। जबकि भाजपा कार्यकर्ताओं की भी विधायक से भारी नाराजगी बताई जा रही है। सूत्रों की मानें तो कुछ कार्यकताओं को छोड़कर ज्यादातर कार्यकताओं की विधायक द्वारा उपेक्षा की गई है। जबकि जनता के बीच उनके व्यवहार को लेकर भी अच्छी रिपोर्ट नहीं गई है। यहीं कारण है कि 2022 के चुनावों में विधायक भरत सिंह चौधरी का टिकट पक्का नहीं हैं और दावेदारों की लिस्ट लम्बी होती जा रही है। इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि कभी विधान सभा में सक्रिय न रहने वाले कुलदीप आजाद नेगी भी टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। 

कुलदीप आजाद नेगी को भाजपा संघ में मजबूत पकड़ रखने वाले अखिल भारतीय सम्पर्क प्रमुख व भाजपा संगठन महासचिव रामलाल का करीबी माना जा रहा है, हालांकि जनता के बीच इनकी कोई खास पकड़ नहीं है किन्तु रामलाल के करीबी होने कारण इन्हें भी टिकट का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। 

दूसरी तरफ रूद्रप्रयाग भाजपा संगठन में वर्षों से संगठन को मजबूती देने वाले कार्यकर्ता के रूप में बीरेन्द्र बिष्ट, वाचस्पति सेमवाल, बीर सिंह रावत जैसे चेहरे भी प्रमुख दावेदार हैं जबकि इनकी जनता के बीच भी अच्छी खासी पकड़ है। वहीं वर्तमान में भाजपा के सह मीडिया प्रभारी कमलेश उनियाल और पूर्व राज्य मंत्री शिव प्रसाद ममगाई भी महत्वपूर्ण नाम हैं जिनकी संगठन में अच्छी खासी पकड़ है। जबकि वे भी पिछले कई समय से लगातार जनता के बीच जा रहे हैं और जन सम्पर्क कर रहे हैं। 

हालांकि यह तो भविष्य के गर्भ में है कि भाजपा फिर से भरत सिंह चौधरी पर भरोसा करती है या फिर किसी नये चेहरे पर दांव अजमाती है किन्तु जिस तरह से रूद्रप्रयाग में दावेदारों की होड़ मची है उससे संकेत साफ दिख रहे हैं। जबकि इन चेहरों के अलावा भी यहां नया चेहरा आने की सम्भावनाएं राजनीतिक विशेषज्ञ व्यक्त कर चुके हैं। देखना होगा 2022 में भाजपा के दंगल में किसका मंगल होता है। 



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