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Tuesday, 21 September 2021

बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था ने फिर प्रसूता की जान, दो माह में चार गर्भवती गंवा चुकी जान

 


बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था ने फिर प्रसूता की जान, दो माह में चार गर्भवती गंवा चुकी जान


डैस्क : केदारखण्ड एक्सप्रेस न्यूज़

उत्तरकाशी। पहाडों की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था यहाँ के वासिंदो के लिए सचमुच अभिशाप बन गई है। बीस वर्ष बाद भी अस्पतालों मैं गर्भवतियों का असमय जाना हमारी सरकारों के घोर नाकारेपन को दर्शा रही है। जिला अस्पताल में रविवार देर रात प्रसव के बाद किए गए ऑपरेशन के दौरान एक 22 वर्षीय महिला की मौत हो गई। जिसके बाद रोती हुईं महिलाओं और ग्रामीणों ने अस्पताल में घेरा डाल दिया। मौके पर तनाव की स्थिति बनी हुई है।

जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ थे

जानकारी के मुताबिक आशा पत्नी प्रवीण नौटियाल निवासी चमारौली गांव, ब्रहखाल रविवार सुबह पांच बजे प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती हुई। सुबह 10 बजे ऑपरेशन किया गया। जिसके बाद जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ थे। लेकिन शाम छह बजे फिर आशा के पेट में तेज दर्द होने लगा। इस पर डॉक्टरों ने कहा कि बच्चे दानी निकालने के लिए एक और ऑपरेशन करना पड़ेगा। देर रात प्रवीण दवाओं के लिए भटकता रहा। वहीं ऑपरेशन के बाद आशा की मौत हो गई।

मौके पर स्थिति तनावपूर्ण

आशा की मौत से गुस्साई और दुखी महिलाओं व ग्रामीणों ने सोमवार की सुबह अस्पताल को घेर लिया। महिलाओं की आंखें नम दिखीं। उन्होंने कहा कि आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने तक आशा का शव नहीं उठने दिया जाएगा। मौके पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। पूरा गांव अस्पताल में एकत्र हो गया है।

बदहाल सड़क पर मरीज लेने गई एंबुलेंस का पहिया हुआ जाम

बागेश्वर में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी जौलकांडे सड़क के गड्ढों ने प्रसव पीड़िता को लेने गई एंबुलेंस के नट-बोल्ट ढीले कर दिए। जिसके कारण चलते वाहन का हब टूट गया और एंबुलेंस का आगे का पहिया जाम हो गया। करीब डेढ़ घंटे इंतजार के बाद प्रसव पीड़िता को निजी वाहन से जिला अस्पताल लाया गया। वहीं, सड़क की बदहाली को लेकर ग्रामीणों ने विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई और जल्द डामरीकरण की मांग की है।

 रविवार की सुबह जौलकांडे निवासी पूनम देवी को प्रसव पीड़ा हुई। परिजनों ने उसे अस्पताल ले जाने के लिए 108 सेवा को फोन किया। एंबुलेंस जौलकांडे गांव तक तो पहुंची लेकिन प्रसव पीड़िता के घर से पहले ही एंबुलेंस जाम हो गई। एंबुलेंस के नट-बोल्ट ढीले होकर गिर गए। जिसके कारण शॉकर पर दबाव पढ़ा और वाहन का पहिया, बॉडी से चिपक गया। हालांकि संयोग से बड़ा हादसा होने से बच गया। इधर, एंबुलेंस का इंतजार कर रही प्रसव पीड़िता की परेशानी बढ़ती जा रही थी। जिसके बाद परिजनों ने निजी वाहन से उसे जिला अस्पताल पहुंचाया। 

 ग्राम प्रधान प्रिया उप्रेती, उप प्रधान नैना लोहुमी, सामाजिक कार्यकर्ता नरेश उप्रेती आदि ने कहा कि गांव की सड़क बदहाल होने के कारण एंबुलेंस का पहिया जाम हुआ। लंबे समय से ग्रामीण सड़क में डामरीकरण और गड्ढे भरने की मांग कर रहे हैं, लेकिन विभाग सुध नहीं ले रहा है। जिसके कारण रोजाना लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। इधर, 108 सेवा के जिला समन्वयक भाष्कर शर्मा ने कहा कि जौलकांडे गांव की प्रसव पीड़िता को लाने मोटर मार्ग में गड्ढे होने के चलते एंबुलेंस में दिक्कत आई है।

जौलकांडे मोटर मार्ग में डामरीकरण के लिए आगणन बनाकर शासन को भेजा जा रहा है। शासन से बजट मिलने के बाद डामरीकरण कराया जाएगा। -राजेंद्र प्रसाद कुडियाल, ईई पीएमजीएसवाई बागेश्वर