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Thursday, 19 August 2021

एक्सक्लूसिव खुलासा: अजबगजब हाल: क्या अंजान सख्स ने ले लिया नगर पलिका रूद्रप्रयाग को गोद?


एक्सक्लूसिव खुलासा: अजबगजब हाल: क्या अंजान सख्स ने ले लिया नगर पलिका रूद्रप्रयाग को गोद?                                                       

-कुलदीप राणा ‘आजाद’/केदारखंड एक्सप्रेस 

रूद्रप्रयाग। ऐसा लगता है रूद्रप्रयाग नगर पालिका परिषद को किसी अंजान सख्स ने गोद ले लिया हो। क्योंकि पालिका के भीतर चहुँमुखी विकास के लिए किसी अज्ञात सख्स ने बीड़ा उठाया हुआ है। अब देखिए ना पिछले दिनों नगर पालिका परिषद के वार्ड न0 6 के अन्तर्गत मुख्यालय में अंजान व्यक्ति द्वारा चार दुकानों का निर्माण चर्चा का विषय बना हुआ है जिसका मालिका जिला प्रशासन के नोटिस चस्पा करने के बाद भी सामने नहीं आया। जबकि इसी तरह एक और नया मामला प्रकाश में आया है जहाँ वार्ड नम्बर 1 अमसारी से जीजीआईसी तक लाखों रूपये का रास्ता किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा निःशुल्क बनाकर छोड़ दिया गया है। स्थानीय व्यक्तियों कि माने तो यह रास्ता ढेड साल पहले निर्मित किया गया था। केदारखण्ड एक्सप्रेस ने इस रास्ते की तहकीकात की तो क्या कुछ तथ्य सामने आए आप भी जानिए। 

रूद्रप्रयाग नगर पालिका परिषद रूद्रप्रयाग के वार्ड नम्बर 1 अमसारी में वर्ष 2019 में अमसारी से जीजीआईसी तक करीब 50 मीटर लम्बा व ढेड़ मीटर चौड़ा रास्ते का निर्माण करीब 7 लाख की लागत से किया गया। हैरानी की बात यह है कि नगर पालिका परिषद रूद्रप्रयाग इस बात से दो साल बाद भी बेखबर है। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अन्तर्गत मांगी गई सूचना में नगर पालिका परिषद रूद्रप्रयाग ने स्पष्ट किया है कि यह रास्ता नगर पालिका के द्वारा नहीं बनाया गया है। आपको याद होगा कुछ दिन पूर्व केदारखण्ड एक्सप्रेस ने खुलासा किया था कि नगर पालिका के वार्ड नम्बर 6 में भी चार दुकानों का निर्माण किया गया था जिसका मालिक का पता अब तक नहीं चल पाया है। हालांकि इस मामले में जिला प्रशासन द्वारा जांच की जा रही है। लेकिन हमने संबंधित वार्ड  सभासद अमरा देवी से इस संबंध में बात कि तो उन्होंने जो कुछ कहा उससे नगर पालिका परिषद रूद्रप्रयाग एक बार फिर सवालों के घेरे में आती है। 

अमरा देवी ने कहा कि वर्ष 2019 में तत्कालीन जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल द्वारा वार्ड निरीक्षण के दौरान लोगों की मांग पर अमसारी से जीजीआईसी तक इस रास्ते के नव निर्माण के निर्देश दिए थे। जिसमें पालिका द्वारा इस रास्ते का प्रस्ताव बनाकर बिना टेंडर किए ही निर्माण कार्य किया गया। अब इसके टेंडर क्यों नहीं हुए यह समझ से परे है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान अधिशासी अधिकारी को इस संबंध में जानकारी नहीं है क्योंकि यह कार्य उनकी तैनाती से पूर्व ही हो चुका था जबकि नगर पालिका अध्यक्ष इस बात से भलि भाँति विज्ञ हैं। 


सभासद और सूचना अधिकार में मिली जानकारियां की भले ही आपस में समान्ता न हो लेकिन पालिका के भीतर लाखों रूपयों के निर्माण कार्य बिना टेंडर के होना इस बात की गवाही दे रहा है कि यहां कितना बड़ा भ्रष्टाचार चल रहा है। जबकि उस पर संबंधित वार्डों के सभासदों की चुप्पी भी सवालों की घेरे में है और इस ओर संकेत करती हैं कि कहीं ना कहीं इसमें संबंधित सभासदों की भी संलिप्तता है। 


गौर करने वाली बात यह  भी है कि दोनों मामलों में पालिका द्वारा सूचना अधिकार में स्पष्ट किया गया कि यह दोनों निर्माण कार्य उनके द्वारा नहीं किए गए हैं जबकि पालिका की ओर से प्रशासन से कहीं भी जांच की मांग नहीं की गई है। इससे साफ होता है कि इन निर्माण कार्यों में पालिका की बड़ी भूमिका है। बहरहाल नगर पालिका परिषद में किए जा रहे निःशुल्क निर्माण कार्यों से लोगों को जहां इसका व्यापक लाभ मिल रहा है वहीं सरकारी राजकोष की भी बचत हो रही हैं।