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Monday, 23 August 2021

एक अदद अस्पताल के लिए केदारघाटी में आक्रोश की ज्वाला, 39 दिन से चल रहा है आंदोलन


एक अदद अस्पताल के लिए केदारघाटी में आक्रोश की ज्वाला, 39 दिन से चल रहा है आंदोलन


चन्द्रकांत जमलोकी/केदारखंड एक्सप्रेस

फाटा। केदारघाटी के सुदूरवर्ती त्रियुगीनारायण में एक आदत अस्पताल के लिए ग्रामीणों का पिछले 39 दिनों से आंदोलन चल रहा है। पिछले 37 दिनों से जब सरकार द्वारा इनकी किसी भी स्तर की वार्ता पर सुनवाई नहीं की गई तो बीते 21अगस्त से इन्होंने आमरण अनशन  शुरू कर दिया। आमरण अनशन पर अनिता देवी शर्मा, अंकित गैरोला, रामचन्द्र सेमवाल, महेंद्र सेमवाल, विसर्वा कूर्मांचली, मंगलदीप गैरोला आदि बैठे हैं। 

गौरतलब है कि त्रिजुगीनारायण तोषी समेत आसपास के गांव की करीब ढाई हजार से अधिक आबादी आज भी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए 30 से 40 किलोमीटर दूर फाटा की दौड़ लगाते हैं। लेकिन वहां भी उन्हें स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता है जिस कारण वह या तो जिला अस्पताल रूद्रप्रयाग या फिर श्रीनगर देहरादून के लिए जाना पड़ता है। जबकि न केवल ग्रामीण लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं के यहां आवश्यकता है बल्कि गिरगी नारायण मंदिर के दर्शनों के लिए वर्षभर तीर्थ यात्रियों और पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहता है लेकिन जब कभी इनकी भी तबीयत खराब होती है तो उन्हें भी यहां स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पाता है जिस कारण उन्हें भी भारी परेशानियों से दो-चार होना पड़ता है। 

आपको बताते चलें यहां एक यात्रा कालीन अस्पताल पहले से मौजूद है जिस का संचालन सरकारों और जिला प्रशासन द्वारा केवल यात्रा काल में किया जाता है जबकि ग्रामीण बताते हैं कि यूपी सरकार में यहां एक स्थाई अस्पताल हुआ करता था जो वर्ष भर यहां रोगियों का उपचार करता था लेकिन जैसे ही अपना राज्य उत्तराखंड बना तो यह अस्पताल स्थाई से अस्थाई कर दिया गया और केवल यात्रा काल के थे माही यहां स्वास्थ्य सुविधाएं दी जाने लगी लेकिन पिछले चार-पांच वर्षों से इसको पूरी तरह से बंद कर दिया गया है जिस कारण क्षेत्रीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।  

लंबे समय से त्रियुगीनारायण और आसपास के ग्रामीण यहां अस्पताल की मांग कर रहे थे  लेकिन जब उनकी नहीं सुनी गई तो उन्होंने आंदोलन का रास्ता है प्यार किया और पिछले 39 दिनों से हर दिन इनका आंदोलन उग्र हो रहा है। क्षेत्रीय लोगों विपक्षी राजनीतिक पार्टियों और सामाजिक संगठनों का इस आंदोलन को भरपूर साथ मिल रहा है अगर सरकार इस पर जल्द फैसला नहीं लेती है तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र रूप में सामने आ सकता है जिसके परिणाम 2022 के चुनाव में भी देखने को मिल सकते हैं।