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Thursday, 26 August 2021

गौचर में 15 से ज्यादा गायों की मौत, कृष्णा गौ समिति सवालों के घेरे में, जिम्मेदार कर रहे हैं राजनीति

गौचर में 15 गाय की मौत

गौचर में 15 से ज्यादा गायों की मौत, कृष्णा गौ समिति सवालों के घेरे में, जिम्मेदार कर रहे हैं राजनीति 

@सोनिया मिश्रा/केदारखण्ड एक्सप्रेस 

गौचर। हमारे हिन्दु धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। हम गाय की पूजा करते हैं लेकिन जरा सोचिय अगर इन गायों का जीवन संकट में हो और जिम्मेदार उन्हें बचाने की बजाय मौत के मुँह में धकेल कर राजनीति कर रहे हो तो क्या कहा जाय? वह भी तब जबकि इन गायों के संरक्षण के नाम पर सरकारों से हर वर्ष लाखों रूपये खर्च किए जा रहे हैं। जी हाँ इन दिनों गौचर में भी कुछ ऐसी स्थिति नजर आ रही है। अब जरा पूरा मामला समझिए। 

दरअसल गौचर शहर में आवारा गायों के लिए एक कांजी हाउस बना हुआ है जहाँ शहर भर के आवारा गायों को रखा जाता है। इस कांजी हाउस में आवारा पशुओं के देख रेख की जिम्मेदारी पिछले एक दशक से भी अधिक समय से कृष्णा गौ समिति को दी गई है। जिसे पशु कल्याण बोर्ड से हर साल लाखों रूपये इन पशुओं के भरण पोषण और इनके संरक्षण के लिए दिए जाते हैं, लेकिन यकीन मानिए पिछले दो सप्ताह में यहां 15 गायों की मौत हो गई है, जबकि दर्जनों गाय यहाँ मौत के मुँह में खड़ी हैं। गौ समिति के जिम्मेदार लोग बिना स्वास्थ्य परीक्षण किए ही बता रहे हैं कि गायों को खुरपक्का बीमारी हो गई हैं। जबकि स्थानीय लोगों की माने तो गौ समिति द्वारा अब तक इन गायों का स्वास्थ्य परीक्षण व ईलाज ही नहीं किया है। गौ समिति तब सवालों के घेरे में आ गई जब एक के बाद एक गाय मरने लगी और पिछले दो सप्ताह में 15 गायों की मौत हो गई। यही नहीं गौ समिति द्वारा अत्यधिक बीमार गायों को गौचर क्रिड़ा मैदान में मरने के लिए छोड़ दिया जा रहा है? पिछले दिनों मृत गायों को जब चार-चार दिन बाद भी यहां से नहीं उठाया गया तो वो सड़ने लगी व पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैल गई व महामारी का खतरा पैदा होने लगा था। 


उधर कृष्णा गौ समिति क्रिड़ा मैदान में मृत गायों को नगर पालिका परिषद होने के कारण नगर पालिका की जिम्मेदारी बताकर अपना पल्ला झाड़ रहे थे तो नगर पालिका द्वारा यह कहा जा रहा था कि यह जिम्मेदारी गौ समिति की है। हालांकि आखिर में व्यापार संघ द्वारा इन मृत गायों का दाह संस्कार किया गया। आलम यह है कि कृष्णा गौ समिति के अधीन कांजी हाउस में अभी भी सैकड़ों गाय गम्भीर बीमार हो रखी हैं जिनमें से कई गाय मरने के कगार पर हैं। लेकिन इनके ईलाज के लिए अब तक गौ समिति द्वारा कोई पैरवी नहीं की गई। समिति के अध्यक्ष अनिल नेगी का कहना है कि उनके द्वारा उपजिलाधिकारी को अपने पद से इस्तीफा देने के लिए पत्र दिया गया है लेकिन इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जा रहा है। परंतु सवाल यह है कि आखिर जब कृष्णा गौ समिति सवालों के घेरे में आने लगी तो उसी के बाद इस्तीफा देने की याद क्यों आई? दूसरी तरफ नगर पालिका अध्यक्ष अंजू बिष्ट का कहना है कि कांजी हाउस में रखी गायों की जिम्मेदारी कृष्णा गौ समिति की है। गायों के भरण पोषण और गायों के दाह संस्कार के लिए हर वर्ष सरकार द्वारा लाखों रूपये का बजट दिया जात है, जबकि स्थानीय लोगों द्वारा चंदा भी दिया जाता है। ऐसे में नगर पालिका की इन गायों के प्रति कोई भी जिम्मेदारी नहीं है। इनको लेकर  कृष्णा गौ समिति स्वयं जिम्मेदार है। 

पूरे प्रकरण पर उपजिलाधिकारी वैभव गुप्ता ने कहा कि कृष्णा गौ समिति के अध्यक्ष द्वारा उन्हें इस्तीफे को लेकर पत्र दिया गया था किन्तु कांजी हाउस में गायों की मौत और बीमार होने का मामला उनके संज्ञान में नहीं लाया गया। उन्होंनें कहा कि अगर ऐसी कोई बात है तो यह गम्भीर मामला है और तत्काल ही एक पशु डॉक्टरों की टीम को स्वास्थ्य परीक्षण व ईलाज के लिए भेजा जायेगा। मृत गायों को चार चार दिन तक न उठाये जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि नियमानुसार कांजी हाउस में रखी गई गायों की सम्पूर्ण जिम्मेदारी कृष्णा गौ समिति की है तब चाहे वह बाहर मृत पाई जाती हैं या उनके खुद के परिसर में। अगर कृष्णा गौ समिति द्वारा अपने कार्यों को ठीक से नहीं किया जा रहा है तो उसके विरूद्ध आवश्यक कार्यवाही की जायेगी। हां अगर यह नगर पालिका से संबंधित मामला है तो फिर नगर पालिका के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी। 

मामले की छानबीन में जब केदारखण्ड एक्सप्रेस की टीम जुटी थी तो कृष्णा गौ समिति के अध्यक्ष अनिल नेगी द्वारा लगातार हमें गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा था। जबकि कई तथ्य और समिति से जुड़ी जानकारी भी उनके द्वारा छुपाई जा रही है। ऐसे में जब मीडिया को पिछले 5 दिन से गुमराह किया जा रहा है तो साफ जाहिर होता है कि कृष्णा गौ समिति  गायों के नाम पर बड़ा गड़बडझाला कर रही है जिसकी जाँच होनी बेहद आवश्यक है। क्योंकि जिस तरह से यहां पशुओं में गंभीर बीमारी हो रखी है और लगातार गायों का मरने का सिलसिला जारी है मगर गौ समिति के जिम्मेदार अध्यक्ष इनका स्वास्थ्य परीक्षण और इलाज करवाने की बजाय इसमें राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं जो कहीं ना कहीं न केवल इनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है बल्कि पूरी गो समिति को सवालों के कटघरे में खड़े करता है।