Breaking News

Friday, 2 July 2021

उत्तराखंड में फिर राजनीतिक अस्थिरता का दौर शुरु



 उत्तराखंड में फिर राजनीतिक अस्थिरता का दौर शुरु, 


डेस्क : केदारखण्ड एक्सप्रेस न्यूज़ 

देहरादून। उत्तराखंड में एक बार फिर से राजनीतिक अस्थिरता का दौर शुरू हो चुका है मुख्यमंत्री के विधानसभा उपचुनाव को लेकर कयास बाजी शुरू हो चुकी है। मुख्यमंत्री का अचानक दिल्ली दौरा इस बार सत्ता के गलियारों में चर्चा का विषय बना है। उत्तराखंड मैं इन दिनों मुख्यमंत्री के विधानसभा उपचुनाव को लेकर चर्चा गर्म है।

18 मार्च 2017 को त्रिवेंद्र रावत ने राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण की थी 57 विधायकों की प्रचंड बहुमत की सरकार में किसी ने भी यह नहीं सोचा था कि मार्च 2021 में त्रिवेंद्र रावत को अपनी सरकार के 4 साल के कार्यकाल पूरा करने से पहले ही इस्तीफा देना पड़ेगा 10 मार्च 2021 में पौड़ी से भाजपा के सांसद तीरथ सिंह रावत को राज्य का नया मुख्यमंत्री बनाया गया जिसके बाद यह लगा कि उत्तराखंड में अब राजनीतिक स्थिरता नजर आएगी। विधानसभा का सदस्य नहीं होने के चलते मुख्यमंत्री को 10 सितंबर 2021 से पहले विधानसभा का सदस्य बनना है लेकिन इस बार नियमों के चलते मुख्यमंत्री का विधान सभा उप चुनाव लड़ना थोड़ा मुश्किल लग रहा है। हालांकि फैसला चुनाव आयोग को करना है लेकिन मुख्यमंत्री के विधानसभा का उपचुनाव चर्चा का विषय बन चुका है राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत का कहना है कि भाजपा में किसी भी चुनाव के लिए प्रक्रिया निर्धारित है चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही मुख्यमंत्री भी घोषणा करेंगे कि वह कहां से चुनाव लड़ने जा रहे हैं कहीं भी किसी तरह की कोई स्थिरता नहीं है

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत जिन राज्यों में विधानसभा के आम चुनाव में 1 साल से कम का वक्त हो वहां अमूमन चुनाव आयोग चुनाव नहीं कराता है जिसके चलते कांग्रेस राज्य सरकार पर हमलावर है और यह कह रही है कि मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत उप चुनाव नहीं लड़ पाएंगे प्रदेश में अभी गंगोत्री और हल्द्वानी 2 विधानसभा सीट खाली है लेकिन कांग्रेस का कहना है कि नियमों के तहत मुख्यमंत्री चुनाव नहीं लड़ पाएंगे और ऐसे में भाजपा एक तीसरा मुख्यमंत्री राज्य पर थोपने जा रही है

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत भले ही विधानसभा उपचुनाव को लेकर सीधे बात नहीं कर रहे हैं जबकि प्रदेश में आम आदमी पार्टी ने गंगोत्री विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए कर्नल अजय कोठियाल को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है जिसके लिए बकायदा अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट करके उनको बधाई भी दी है ऐसे में यह साफ है कि विपक्षी कांग्रेस हो या आम आदमी पार्टी सभी जानते हैं कि मुख्यमंत्री से लेकर भाजपा पर विधानसभा उपचुनाव का ज्यादा दबाव है इसलिए वह अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं

मुख्यमंत्री के अचानक दिल्ली दौरे के बाद उत्तराखंड की राजनीति में चर्चाओं का बाजार गर्म है किसी के भी यह समझ में नहीं आ रहा है कि जब 3 दिन की चिंतन बैठक रामनगर में आयोजित हुई थी और केंद्र के भी संगठन से जुड़े बड़े नेता पहुंचे थे तो उसके बावजूद क्यों सीएम को अचानक दिल्ली जाना पड़ा ऐसे में मुख्यमंत्री के विधानसभा उपचुनाव को लेकर भी आशंका बनी हुई है मुख्यमंत्री अगर चुनाव नहीं लड़ पाए तो उन्हें इस्तीफा देना होगा और फिर संभव है कि भाजपा राज्य को नया मुख्यमंत्री दे।