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Monday, 17 May 2021

कोविड से निपटने के लिए क्यों नहीं है विधायक निधि ? सांसद कब खोलेंगे जनता के धन से भरे थैले का मुँह?



कोविड से निपटने के लिए क्यों नहीं है विधायक निधि ? सांसद कब खोलेंगे जनता के धन से भरे थैले का मुँह?


रमेश पहाड़ी/-

इस बार कोविड का नया रूप पिछले रूप से अधिक भयानक है और पहाड़ी जिले भी इसकी बड़ी मार झेल रहे हैं। रुद्रप्रयाग जिला इस बार कोविड के इस नए रूप से अधिक प्रभावित हुआ है। इसका मुकाबला करने के लिए संसाधनों की कमी भी एक बड़ी समस्या है। इस बार साँस लेने की समस्या ने एक नई आपदा खड़ी की है और ऑक्सीजन की कमी एक बड़ी समस्या के रूप में डॉक्टरों व प्रशासनिक तंत्र के सामने खड़ी हुई है। रोग की व्यापकता ने गाँवों को भी इतनी बुरी तरह से अपनी जकड़ में ले लिया है कि रोगियों के साथ ही व्यवस्था का भी दम  फूलने लगा है।

इस विकराल रूप लेती महामारी से निपटने के लिए संसाधनों की भी उतनी ही अधिक जरूरत है, जितनी डॉक्टरों, चिकित्साकर्मियों और सरकारी तंत्र की व्यापकता की। सरकार ने जिलाधिकारियों को जो धनराशि उपलब्ध कराई है, वह इतनी बड़ी आपदा के लिये काफी नहीं है। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि अन्य जिलों की भाँति इस जिले में विधायक व सांसद निधि का उपयोग बीमारों की मदद में नहीं हो पा रहा है। कारण है सक्षम अधिकारियों की कमी। इसकी ओर न शासन का ध्यान है, न प्रशासन का। 

जिले में एक महीने से अधिक समय से मुख्य विकास अधिकारी नहीं है। पिछले मुख्य विकास अधिकारी की शिकायत हुई तो काफी नानुकुर के बाद उन्हें यहाँ से हटा दिया गया और नया भेज दिया गया है लेकिन वे अस्वस्थता के कारण अवकाश पर हैं। उनकी प्रशासनिक जिम्मेदारी जिला विकास अधिकारी को सौंपी गई है लेकिन वित्तीय अधिकार किसी को नहीं दिए गए हैं। इस कारण विधायक निधि से अभी तक एक भी रुपया कोविड महामारी से बचाने के लिए खर्च नहीं किया जा सका है।

विश्वस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि विधायक केदारनाथ ने कोविड से निपटने के लिए 11 लाख रुपये के प्रस्ताव दिए हैं जो कि मुख्य विकास अधिकारी के अभाव में विकास भवन की अलमारियों में धूल फाँक रहे हैं। यदि यह पद खाली न होता तो विधायक रुद्रप्रयाग भी अस्वस्थता के बावजूद कुछ धनराशि इस महामारी से निपटने के लिये अवश्य देते। ताज्जुब की बात यह है की 2 दिन पहले ही मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत कोविड की व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त करवाने के लिए जिले में आये थे लेकिन उनके संज्ञान में यह बात लाई ही नहीं गई। जिलाधिकारी को भी यह अधिकार है कि वे वित्तीय अधिकार किसी भी सक्षम अधिकारी को दें। इस पर यह सवाल उठना भी लाजिमी है कि कार्यकारी अधिकार जिला विकास अधिकारी को सौंपने के साथ-साथ जिलाधिकारी ने वित्तीय अधिकार भी वर्तमान मुख्य विकास अधिकारी को क्यों नहीं सौंपे? यदि ऐसा किया जाता तो संसाधनों का समय पर उपयोग होता और जिले के लोगों को अधिक अच्छी सुविधायें मिलीं होतीं।

एक बात और ध्यान देने की है कि गढ़वाल सांसद ने जिले को इस त्रासदी से निपटने के लिए इस वर्ष अभी तक एक रुपये की भी धनराशि नहीं दी है, जबकि गत वर्ष सांसद तीरथ सिंह रावत जी ने 5 लाख रुपये अपनी सांसद निधि से दिए थे। उत्तराखण्ड से राज्यसभा में 3 सांसद हैं। वे पूरे उत्तराखण्ड के जिलों को अपनी सांसद निधि की धनराशि दे सकते हैं लेकिन न रुद्रप्रयाग के नेताओं-पत्रकारों-अफसरों ने कभी इस पर उनका ध्यान खींचा और न उन्होंने अपनी तरफ से ही कोई पहल की। विधायकों में से गत वर्ष मनोज रावत जी ने 9 लाख और भरत सिंह चौधरी जी ने 6 लाख रुपये कोविड से निपटने के लिए दिए थे। 

यह प्रश्न भी पूछा जाना जरूरी है कि सांसद इस आपदा से निपटने के लिए अब अपनी थैली का मुँह नहीं खोलेंगे तो कब खोलेंगे और यह भी कि जिले को अधिकार-सम्पन्न मुख्य विकास अधिकारी इस भीषण आपदा के समय नहीं मिलेगा तो कब मिलेगा और दो प्रबुद्ध विधायक इस पर मौन साधे क्यों बैठे हैं? फिर मुख्यमंत्री पर तो हमारा दोहरा हक है- सांसद का भी और मुख्यमंत्री का भी।