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Sunday, 2 May 2021

रुद्रप्रयाग में कोरोना से नही जल संस्थान की लापरवाही से मारेंगे लोग, पानी नही जहर पिला रहे हैं


रुद्रप्रयाग में कोरोना से नही जल संस्थान की लापरवाही से मारेंगे लोग,  पानी नही जहर पिला रहे हैं 


कुलदीप राणा आजाद/केदारखण्ड एक्सप्रेस 

रूद्रप्रयाग। वैश्विक महामारी कोरोना जैसी घातक बीमारी के इस दौर में जहाँ लोग त्राहिमान हो रखे हैं, हर कोई शुध हवा पानी की चाह रख रहा हो तो वही रुद्रप्रयाग शहर में जल संस्थान की लापरवाही के कारण लोगों का स्वास्थ दांव पर लगा हुआ है। लोगों का कहना है कोरोना से तो नहीं लेकिन जल संस्थान के इस जहरीले पानी से जरूर लोग मर जाएंगे।

यकीन मानिए अभी न मानसून सत्र शुरू हुआ है और ना ही इतनी ज्यादा बारिश हो रही है लेकिन रुद्रप्रयाग शहर में इतने गंदे पानी की आपूर्ति हो रही है कि लोग उसे पीना तो दूर मुंह हाथ और कपड़े भी नहीं धो सकते हैं। पानी के नल पर बाल्टी लगाओ तो आधा पानी और आधा मिट्टी से बाल्टी भर रही है तो इससे समझा जा सकता है कि  स्थिति कितनी विकट है। गंदे पानी की आपूर्ति होने से शहर भर के लोग पेयजल के लिए मोहताज हो रखे हैं जबकि पानी न मिलने से अधिकतर लोग इसी दूषित पानी को पीने के लिए मजबूर हैं। ऐसे में कहा नहीं जा सकता है कि यह दूषित पानी गंभीर बीमारियों को न्योता दे रहा है। 

व्यापार संघ अध्यक्ष अंकुर  खन्ना का कहना है कि रुद्रप्रयाग में दूषित जल की आपूर्ति लोगों के स्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़ है इसके अलावा गंदे पानी से टाइफाइड होने का खतरा है जिससे शरीर का ह्यूमनएटी सिस्टम बिगड़ जाता है जिस से कोरोना का अधिक खतरा बना रहता है। स्थानीय निवासी अनुराग जगवान, सुनील डिमरी, राकेश पंवार, धाम सिंह आदि लोगों का कहना है कि अभी बरसात आरंभ भी नहीं हुई है और पानी इतना गंदा सप्लाई किया जा रहा है बरसात में क्या हाल होंगे यह सहज ही समझा जा सकता है। लोगों का कहना है जल संस्थान द्वारा जब लाखों रुपयों के फिल्टर लगाने के बाद भी आखिर जनता को क्यों इतना गंदा पानी पिलाया जा रहा है जबकि फिल्टर मेंटेनेंस के नाम पर हर साल लाखों का बजट जल संस्थान ठिकाने लगाता है बावजूद लोगों को दूषित पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

उधर जल संस्थान के अधिशासी अभियंता संजय सिंह का कहना है कि रुद्रप्रयाग को जलापूर्ति करने वाले स्रोत के ठीक ऊपर पिछले दिनों मोटर मार्ग का निर्माण हुआ था जिसका मलवा स्रोत के ऊपरी क्षेत्र में डाला गया है ऐसे में जरा सी बारिश आने पर पूरे स्त्रोत के पानी में मलवा आ जाता है जिस कारण गंदे जल की आपूर्ति हो रही है। उन्होंने कहा स्रोत पर हालांकि फिल्टर लगाए गए हैं लेकिन फिल्टर ओं की छमता केवल दस लाख लीटर की है जबकि जरूरत 40 लाख लीटर की है।

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