Breaking News

Saturday, 29 May 2021

वाह रे रुद्रप्रयाग पुलिस! खुद करे तो मानवता और पब्लिक करे तो जुर्म


वाह रे रुद्रप्रयाग पुलिस! खुद करे तो मानवता और पब्लिक करे तो जुर्म


भूपेंद्र भंडारी/ केदारखंड एक्सप्रेस

रुद्रप्रयाग। महिला उप निरीक्षक द्वारा पीछे एक बुजुर्ग महिला को बिठाकर ले जाने वाली इस फोटो को तो आप भली भाती पहचानते होंगे, भला जानेंगे भी क्यों नहीं, रुद्रप्रयाग पुलिस ने खुद की तारिफ में अपना जो महिमा मंडल किया था उससे एसा लग रहा था मानों रुद्रप्रयाग पुलिस ने इस बुजुर्ग महिला को जीवन भर के लिये गोद ले लिया हो, लेकिन कोविड में स्कूटी पर दो सवारी बिठाकर खुद पुलिस ने कानून का उलन्घन किया है। अगर एसे ना होता तो अगस्त्यमुनि पुलिस दांत दर्द से कराह रहे बुजुर्ग को बाइक पर अस्पताल ले जाते युवा दीपक बेंजवाल का चालन नही काटते। वाह मित्र पुलिस। खुद करे तो मानवता और जनता करे तो जुर्म। 

इस तस्वीर में महिला उप निरीक्षक स्कूटी में जिस बुजुर्ग को ले जा रही उसको लेकर पुलिस ने खुद का महिमा मंडल कैसे किया वो भी आपको बतायेंगे लेकिन पहले आप दीपक बेंजवाल की फेसबूक पोस्ट पढ़िए-

क्या बुजुर्गो की मदद करना गुनाह है अगस्त्यमुनि की "मित्र पुलिस" ?

गाँव से अगस्त्यमुनि जाते समय आज मित्र पुलिस की मित्रता देखकर तन मन गद गद हो उठा। कंधे पर सजे स्टारो की चमक से आँखे तब चौधियाँ गयी जब चालान बुक पर धड़ाधड़ ऐन्ट्री होने लगी। हम दोनो ने मास्क भी पहने थे और गाड़ी के कागज भी पूरे थे। मैंने जब हकबक होकर कारण पूछा तो जवाब मिला आप बाईक पर सवारी लेकर आ रहे है जो आजकल निषेध है। खैर नियम है तो है भई काट दीजिऐ क्या कर सकते है हम भी और आप भी। लेकिन माननीय स्टारधारको थोड़ा फरियाद सुन लीजिऐ जिस परिस्थिति में मैंने सवारी को बिठाया वो दाँत दर्द से करा रहा मेरे गाँव का एक लाचार बुजुर्ग था। असहाय जानकर उन्हे अपने साथ बिठाकर क्लीनीक तक ले जा रहा था। आप से गुजारिश भी की ये गाँव के बुजुर्ग है और एक किलीमीटर पीछे सिल्ली के है। लेकिन चालान बुक भरने की महान डूयूटी में आपको दर्द से करहाता न बुजुर्ग दिखा है और न मेरा सच बोलना। 

मजेदार बात ये कि अभी कुछ दिन पहले है आपकी ही एक महिला कास्टेबल एक बुजुर्ग महिला को लिफ्ट देकर हीरो बन गयी थी। खैर भले और बुरे दोनो हर क्षेत्र में होते है इसलिऐ सम्मान और अपमान का तमगा चड़ता और उतरता रहता है। 

गाँव के दर्द से करहाते बुजुर्ग की सहायता कर चालान का जब मैं भागी बना तो उन बुजुर्ग की आँखो में लाचारी के आँसू आ गये। बोले बेटा मेरी वजह से तेरा चालान हो गया। चालान मामूली था पर उनकी मायूसी देखकर मुझे असल दर्द महसूस हुआ कि बिचारे आज बड़ा बोझ लेकर घर लौटेगे। सो अगस्त्यमुनि थाने के महान स्टार धारको जन जन की मित्रता के महान खेवनहारो इन्सानियत को दरकिनार कर नियमो को निभाने की आपकी तत्परता के लिऐ सलाम। (दीपक बेंजवाल, अगस्त्यमुनि)


अब पुलिस द्वारा दो सवारी बिठाने पर खुद का महिमा मंडल कैसे किया गया था यह केवल शीर्षक पढ़कर ही अन्दाजा लगया जा सकता है। जरा  पढ़िए-

मिशन हौसला :  मां जी कख जाण तुमुन, चला मिं छोड़ि देंदु। अर्थात अम्मा आपको कहां जाना है? चलो मैं छोड़ देती हूं!


दरअसल ये दोनों स्थिति एक जैसी हैं। लेकिन रुद्रप्रयाग की महान पुलिस ने दो सवारि बिठाई तो खुद की तारिफ में खुद ही वाह वाही कर दी, और पब्लिक ने किया  तो उसे गुनाह बताकर चालान काट दिया।  वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से हुए लाकडाउन के कारण लोगों की अर्थ व्यवस्था पूरी तरह से पटरी से उतर गई है लोग चारों तरफ़ परेशान हैं और जिंदा रहने का संकट पैदा हो रखा है। एसे दौर में भी रूद्रप्रयाग की तेजस्वी, ओजस्वी मित्र पुलिस हेल्मेट, कागज, दो सवारी आदि आदि बहाने  ढूंढ कर  चालन काट रही है। यूँ कहे कि आम जनता को बेवजह परेशान कर रही है तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। है ना मित्र पुलिस की मानवता। इन दिनों पुलिस मास्क ना पहने वालो, समाजिक दूर का पालन ना करने वालो, लाकडाउन का पालन ना करने वालों, गाड़ियों। में ज्यादा सवारी बिठाने के साथ अधिक किराया वसुलने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करती तो नि:संदेह आम जनता तारिफ करती। लेकिन मित्र पुलिस का मकसद यहाँ बेवजह लोगों को  परेशान करना है, और कुछ नही।

कांग्रेस के जिला अध्यक्ष ईश्वर सिंह बिष्ट ने कहा कि इन दिनों पुलिस बड़े पैमाने पर चालान काट रही है अगर चालान कोविड के नियमों का पालन करवाने के लिए काटे जाते तो इसका समर्थन हम भी करते लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है की लोग दैनिक वस्तुओ की खरीद के लिये अप्ने लोकल बाजारों में जाते हैं पुलिस  हेल्मेट, कागज, दो सावरी आदि पर चालान काट देती है।  उन्होंने कहा कोविड-19 के कारण  लोगों की आर्थिक स्थिति पहले ही खराब हो चुकी है, ऊपर से Police का इस तरह का व्यवहार खेद जनक है।