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Wednesday, 26 May 2021

वीर नृत्य को विश्व धरोहर में सम्मलित करने की मांग


वीर नृत्य को विश्व धरोहर में सम्मलित करने की मांग

नवीन चंदोला/केदारखण्ड एक्सप्रेस 

थराली। वीर नृत्य - वीर नृत्य माँ भगवती के वीरो का नृत्य है। यह नृत्य आज से काफी वर्षो पुराना है| भगवान शंकर के रुद्रा अवतारों ओर माता भगवती के सहयोगी वीरों की पूजा अर्चना होती है, साथ ही होता है क्षेत्रीय लोगो के द्वारा विशाल भन्डारा जिसमे कच्चा - पक्का अनाज व फल होता है। साथ ही देव पश्व , डोरियो ओर ढोलीयो की गाथा से पता चलता है कि गढ़वाल के बधाण गढ़ के राजा ने क्षेत्रीय जनता की आशा और विश्वास एव धार्मिक भावना बनी रहे| इस हेतु बधाण गढी ( राजगढ ) मे भगवती नव दुर्गा की स्थापना कि जो छेत्र के दक्षिण दिशा मे होने की वजह से दक्षिणेश्वरी नाम से जाना जाने लगा ।

यहा मा भगवती के गोरजा भवानी, गिरिजा ,सैलपुत्री, गोदडी माई की पूजा-अर्चना की जाती थी जो आज भी यथावत बनी है । एक बार माँ गोदडी माई अपनी पीठ पर एक छोटी सोल्टी (कन्डी )मे कुछ खाने पहनने के सामग्री व हाथ मे गाय के गोवर का कन्डा ( गोसा ) रख बधाण गढी से चली ओर रात्री विश्राम को सिमलसैण गाव के पास मे गोसा से आग जलाई ओर भोजन बनाया और सुबह यहाँ से आगे बडी । गाँव व आस पास के लोगो को कई दिनो तक इस स्थान पर आग दिखाई दी और शुभ प्रमाण दिखाई देने लगे | भक्तजनों व बुद्धिजीवी समाज ने यहाँ पर भगवती के नरसिंही रूप की स्थापना की, फिर समय अनुसार गाँव के लोगो, पंडितों, डोरियो और ढोलीयो के सहयोग से यहा पूजा, नृत्यन अनुष्ठान करवाया गया जिसमे देव पस्वाओ के अवतरण हुवे | जिनकी पूजा के साथ साथ उन्हें शान्त,करने का सफल कार्य चन्दोला वंशीयो के विद्वानों द्वारा किया गया । जिसमे इन देव पस्वाओ को सन्तुष्ट करने के लिए कुन्तलो अनाज, फल,प्रसाद व हजारो लीटर पानी रखा गया जिसे कुछ ही देव पस्वा कुछ मिनटों मे खा जाते है और शाम के भोजन में पुनः भर पेट भोजन करते है, आयोजन में आज भी क्षेत्रीय जनता हजारो की संख्या में आकर अपने श्रद्दा सुमन अर्पित करते है ओर मनोती मांग कर सुफल फल प्राप्त करते है । आज भी लगभग ५०० वर्षो से इस अनुष्ठान का आयोजन बढी दिब्यता, भव्यता ओर आस्था -विश्वास के साथ किया जाता है । यह नृत्य सिमलसैंण गाँव के नरसिंघ मंदिर में आयोजित होता है। 

बधाणी संस्था द्वारा यह नृत्य कई अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय जगहों पर आयोजित हो चुका है। इसमें कई देवताओं के रूप मनुष्यों (वीरो) पर अवतरित होते हैं। जैसे मुखयतः - माँ भगवती , हनुमान लीला। इसमें यूनेस्को में जोड़ने की मांग के लिए मुख्य भूमिका - सिमलसैंण निवासी दीपक चंदोला जी की है। इसके अलावा हरीश चंदोला,अनिल चंदोला, लक्ष्मीप्रसाद चंदोला, केदार दत चंदोला, मालदत चंदोला, राकेश चंदोला, मनोज चंदोला, राजेन्द्र प्रसाद चंदोला, हेमंत चंदोला, विनोद चंदोला, बधाणी संस्था, प्रेम चंद्र देवराड़ी और समस्त चंदोला परिवार की तरफ से इसके बारे में कई जानकारियाँ प्राप्त की गयी है।