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Monday, 17 May 2021

कोरोना काल में सरकारी कार्यालयों में पचास प्रतिशत ड्यूटी करने वाला फरमान महज कागजी, कर्मचारी संगठनों में रोष

 


कोरोना काल में सरकारी कार्यालयों में पचास प्रतिशत ड्यूटी करने वाला फरमान महज कागजी, कर्मचारी संगठनों में रोष

@भूपेन्द्र भण्डारी/केदारखण्ड एक्सप्रेस 

रूद्रप्रयाग।  कोरोना महामारी के बढ़ते संक्रमण व कफ्र्यू के बावजूद भी कार्यालयों के बंद न  होने से कर्मचारियों को संक्रमण का भय सता रहा है। स्थिति यह है कि कार्यालयों में आ जा रहे कर्मिकों को उनको आवासीय कालोनियों में लोग उनसे भय खाये हुए हैं। तमाम कर्मचारी संगठनों ने कफ्र्यू में पूर्णकालिक कार्यालय बंदी की मांग की है। 

एजूकेशनल निनिस्ट्रयल ऐसोसिएशन के प्रांतीय उपाध्यक्ष महादेव मैठाणी एवं जिलाध्यक्ष रणजीत सिंह गुसाई ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि जिस तरह से कोविड संक्रमण तेजी से बढ़ता जा रहा है और कोविड कफ्यू लगाया गया है उस स्थिति में कार्यालयों को बंद करने में ही सुरक्षित उपाय है दोनों पदाधिकारियों ने बताया कि सरकारी कार्यालयों के निरंतर खुलने से आवाजाही बनी रहती है जिससे कोरोना फैलने का भय बना हुआ है। और स्थिति यह है कि कफ्र्यू के दौरान कार्यालयों में हो रहे कार्मिकों से उनके अपने ही आवासीय कालोनियों गलियों में आम जन कर्मचारियों से भय खाये हुए हैं। यही नहीं बल्कि अपने परिजन भी संक्रमण को लेकर चिंतित हैं। कर्मचारी पदाधिकारियों ने कहा कि सभी कमर्चचारी पूरे मनोयोग से सरकार का साथ दे रहे है उन्हें सुरक्षा के संसाधन भी उपलब्ध कराये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्क फरोम होम की प्रणाली से कार्य लिया जाना चाहिए जो कर्मचारी एवं जन हित में भी है। 

इधर जनरल ओबीसी इम्पलाइज ऐसोसिएसन के जिलाध्यक्ष विक्रम झिक्वाण ने कहा कि कर्मचारी वं शिक्षकों की ड्यूटी कोविड में लगायी गई है सरकार को विभागवार कर्मचारी शिक्षकों एवं उनके परिजनों के लिए टीकाकरण कैम्प लगाने चाहिए। उन्होंने बैंको में बढ़ती भीड़ व संक्रमण के दृष्टिगत ए.टी.एम. के माध्यम से धन आहरण पर जोर दिया। श्री झिक्वाण ने बताया कि ग्रीष्मकाल अवकाश अवधि में शिक्षकों को सिरोबगड़ बार्डर एवं गांव स्तर पर कोविड़ ड्यूटी पर लगया गया है। उन्हें नियमानुसार उपार्जित अवकाश दिया जाना चाहिए। जिलाध्यक्ष ने कोविड़ कफ्र्यू के दौरान कार्यालय को खुला रखने को अनुचित बताते हुए कहा कि पचास प्रतिशत उपस्थिति के सरकारी मानक महज एक कागजी फरमान है कार्यालय खुले रहने से बढ़ रही आवाजाही संक्रमण की चैन को बढ़ावा देगील। 

ऐसी स्थिति में कर्मचारी डरे व सहमें हुए हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि कफ्यू के दौरान कार्यालय बंद रखे जाय। साथ ड्यूटी के दौरान किसी अनहोनी का शिकार होने वाले कर्मचारी शिक्षक के परिजनों को पूरे हक दिए जायें। कर्मचारी नेता ने स्पष्ठ किया कि यदिइ जनरल कर्मचारियों एवं शिक्षकों को दबाव देकर डराया धमकाया जाता तो यह स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने कर्मचारी शिक्षकों से भी पूरे मनायोग से सरकार का सहयोग देने की अपील की है। तथा सरकार से मांग की कि वर्क होम की प्रणाली से कार्य लिया जाय। सभी कर्मी स्वास्थ रहकर कार्य कर सकें।