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Wednesday, 19 May 2021

मां बाप कोरोना से अस्पताल में भर्ती, बेसहारा छूट गए 2 विकलांग बच्चे


जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे मां-बाप, दर्द से कराह रहे विकलांग बच्चे


देखिए वीडियो रिपोर्ट-


जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे मां-बाप, दर्द से कराह रहे विकलांग बच्चे, कोविड सेंटर में भर्ती हैं विकलांग बच्चों के माता-पिता, ट्रक चलाकर अपने परिवार का गुजारा कर रहे थे संतोष भट्ट , आनुवांशिक बीमारी हीमोफीलिया से ग्रसित हैं बच्चे, दवाइयों-इंजेक्शन पर हर माह खर्च होता 15 से 20 हजार रुपये

डेस्क : केदारखण्ड एक्सप्रेस न्यूज़ 


रुद्रप्रयाग। आज हम आपको एक ऐसी दर्दभरी दास्तां बताने जा रहे हैं, जिसे देखकर आपके आंसू नहीं रुक पायेंगे। ये दास्तां दो विकलांग बच्चों की है। जिनके मां मां-बाप कोरोना से जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।बेसहारा हो चुके इन बच्चों की देखरेख करने वाला भी कोई नहीं है। 


दरअसल, मूल रूप से चमोली जनपद के पोखरी निवासी संतोष भट्ट ट्रक चालक हैं। अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए उन्होंने रुद्रप्रयाग में किराए पर कमरा लिया है। कुछ दिनों पूर्व ही संतोष भट्ट की रिपोर्ट कोविड पॉजिटिव आई थी। सांस लेने में तकलीफ होने पर उन्हें रुद्रप्रयाग के कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके कुछ दिन बाद उनकी पत्नी रोशनी देवी की भी कोविड पॉजिटव रिपोर्ट आने के बाद उन्हें भी शंकरा अस्पताल में भर्ती कराया गया। दोनों पति-पत्नी जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। माता-पिता के अस्पताल में भर्ती होने से विकलांग बच्चे बेसहारा हो गए हैं। स्थिति यह है कि कोरोना के कारण उनके पास कोई भी जाने के लिए तैयार नहीं हैं। 

इन दोनों बच्चों को हीमोफीलिया यानी पैतृक रक्तस्राव की बीमारी है। ये एक आनुवांशिक बीमारी है जिसमें ख़ून का थक्का बनना बंद हो जाता है। जब शरीर का कोई हिस्सा कट जाता है तो ख़ून में थक्के बनाने के लिए ज़रूरी घटक खून में मौजूद प्लेटलेट्स से मिलकर उसे गाढ़ा कर देते हैं। इससे ख़ून बहना अपने आप रुक जाता है।

अंशुल दसवीं और अंकुर छठवीं कक्षा में पढ़ रहा है। इन दोनों बच्चों को इनके मां-बाप गोद में बिठाकर ही इधर-उधर ले जाते हैं। कई बार बच्चों को रात में असहनीय दर्द होता है। जब तक मां-बाप साथ थे तो वह उनको दवाई देते थे, लेकिन अब कोई भी साथ नहीं है। इनकी दवाई और इंजेक्शन पर हर माह करीब 15 से 20 हजार रुपये का खर्चा आ रहा है। आज स्थिति यह है कि ट्रक चालक पिता के पास कमरे का किराया देने के लिए भी पैसा नहीं है। आज तक सरकार की ओर से इनकी किसी तरह की मदद नहीं कि गई।

वहीं जन अधिकार मंच के अध्यक्ष मोहित डिमरी के संज्ञान में मामला आने के बाद वह इन बच्चों से मिलने पहुँचे। उन्होंने कहा कि सभी को मिलकर इन बच्चों की मदद करनी चाहिए। इस समय इन बच्चों को हमारी सबसे ज्यादा जरूरत है। इंसानियत के नाते स्वयं सेवी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को इनकी मदद के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा खर्चा बच्चों की दवाई पर आ रहा है। उन्होंने कहा कि जन अधिकार मंच बच्चों की मदद के लिए मुहिम चलाएगा।

कोई भी व्यक्ति, संगठन इस असहाय परिवार की मदद करना चाहता है तो इनका खाता नंबर यहां साझा किया जा रहा है-

खाता धारक नाम : संतोष चंद्र भट्ट

खाता संख्या : 3124 6138 144

बैंक : भारतीय स्टेट बैंक 

शाखा : पोखरी चमोली

IFSC CODE : SBIN0004532



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