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Tuesday, 30 March 2021

उत्तराखण्ड चार धाम यात्रा (Uttrakhand char dham yatra) :, पंच बद्री, पंच केदारों का मातम्य, कब, कैसे होती है यहां की यात्रा


उत्तराखण्ड चार धाम यात्रा (Uttrakhand char dham yatra) :, पंच बद्री, पंच केदारों  का मातम्य, कब, कैसे होती है यहां की यात्रा

डेस्क केदारखण्ड एक्सप्रेस न्यूज़ 

उत्तराखंड चार धाम यात्रा चार धाम यात्रा को हिंदू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है इस महा यात्रा में पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जहां गंगोत्री एवं यमुनोत्री को धरती पर ईश्वर या साक्ष्य के रूप में तो केदारनाथ जी को भगवान शिव और बद्रीनाथ जी को भगवान विष्णु का निवास स्थान माना गया है इसलिए इसे यात्रा नहीं अपितु जीवन दर्शन कहना अधिक तर्कसंगत होगा श्री बद्रीनाथ जी को वैकुंठ धाम मां गंगोत्री को फल दायिनी मां यमुनोत्री को सूर्यपुत्री एवं श्री केदारनाथ जी को शिव का धाम के नाम से जाना जाता है धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चार धाम यात्रा हरिद्वार और ऋषिकेश से प्रारंभ होती है इन चारों धामों की यात्रा मान्यता के अनुसार पश्चिम से पूर्व की ओर यमुनोत्री से गंगोत्री श्री केदारनाथ एवं श्री बद्रीनाथ जी की जाती है।

आइए जानते हैं इन धामों की यात्रा और इनके  मातम्य में को-

 

यमुनोत्री धाम 


यमुनोत्री पवित्र यमुना नदी का उद्गम स्थल है तथा यहां पर यमुना देवी का प्रसिद्ध मंदिर है यमुना को यमराज की जुड़वा बहन तथा सूर्य की बेटी भी माना गया है यमुनोत्री जाने के लिए जानकी चट्टी तक मोटर मार्ग तथा यहां से 5 किलोमीटर पैदल रास्ता तय करना पड़ता है समुद्र तल से यह स्तर लगभग 3233 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है मंदिर के समीप गर्म पानी का तप्त कुंड है जिसे सूर्य कुंड के नाम से जाना जाता है कुंड में यात्री कपड़े में चावल एवं आलू पकाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।

सामान्य सूचनाएं :-

यात्रा काल : अप्रैल-मई से अक्टूबर-नवंबर तक होती है।

वस्त्र : ग्रीष्म ऋतु में हल्के ऊनी वस्त्र शीतकाल में भारी ऊनी वस्त्र।

रेल मार्ग : निकटतम रेलवे स्टेशन जिसके से लगभग 257 किमी।

सड़क मार्ग : जानकी चट्टी तक वाहन हेतु सड़क मार्ग तदोपरांत 5 किमी पैदल मार्ग।

निकटतम हवाई अड्डा : जॉली ग्रांट  ऋषिकेश  से 18 किमी,  यमुनोत्री मार्ग पर धर्मशालाएं तथा होटल उपलब्ध है जानकीचट्टी में गढ़वाल मंडल विकास निगम का पर्यटक आवास गृह एवं धर्मशालाएं तथा निजी होटल उपलब्ध है।


गंगोत्री धाम 


मां गंगा मंदिर लगभग 3048 मीटर की ऊंचाई पर अवस्थित है जिसका निर्माण 18वीं सदी में हुआ सफेद रंग की संगमरमर से बने इस मंदिर की ऊंचाई 25 फीट है गंगा का उद्गम स्थल गोमुख ग्लेशियर है जो गंगोत्री से 18 किलोमीटर पैदल मार्ग की दूरी पर स्थित है गंगोत्री राजा भगीरथ की तपस्थली भी है उद्गम से इसे भागीरथी नदी कहा जाता है जो संगम स्थल देवप्रयाग में आकर अलकनंदा नदी से मिलकर गंगा कहलाती है गंगोत्री तक सड़क मार्ग उपलब्ध है मंदिर के निकट अन्य पूजा स्थल सूर्य कुंड विष्णु, कुंड ब्रह्मा, कुंड स्थित है। गोमुख पैदल मार्ग पर भोजबासा में गढ़वाल मंडल विकास निगम का पर्यटन आवास गृह है।

सामान्य सूचनाएं :-

यात्रा काल :  अप्रैल-मई से अक्टूबर-नवंबर 

वस्त्र : ग्रीष्म ऋतु में हल्के ऊनी वस्त्र, शीतकाल में भारी ऊनी वस्त्र 

रेल मार्ग : निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश से लगभग 257 किमी।

सड़क मार्ग : गंगोत्री तक वाहनों से सड़क मार्ग द्वारा पहुंचा जा सकता है, निकटतम हवाई अड्डा जौलीग्रांट 275 किमी आवास हेतु गंगोत्री में धर्मशालाएं, आश्रम, होटल तथा गढ़वाल मंडल विकास निगम का पर्यटन आवास गृह उपलब्ध है।


श्री केदारनाथ जी 



मंदाकिनी नदी के किनारे समुद्र तल से लगभग 3584 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर शिव के धाम नाम से विख्यात है भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक इस महान धाम में गंगोत्री से लाए जल से महादेव का जलाभिषेक किया जाता है आठवीं शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य ने इस  पावन भूमि पर भगवान शिव को संस्था पित्त किया पौराणिक कथा अनुसार भगवान शिव ने इसी स्थान पर पांडवों को कौरवों की हत्या गत पाप से मुक्त किया केदारनाथ में अनेक कुंड विद्यमान है जिनका अपना आध्यात्मिक महत्व है केदारनाथ धाम हेतु सोनप्रयाग तक बड़े वाहनों तदोपरांत सोनप्रयाग से 5 किमी गौरीकुंड तक छोटे वाहनों यथा चीप टैक्सी आदि से पहुंचा जा सकता है इसके आगे की यात्रा लगभग 16 किलोमीटर की दूरी पैदल तय की जाती है। इस दूरी को घोड़े खच्चर डंडी-कंडी आदि से भी तय किया जा सकता है।  गुप्तकाशी, फाटा, बडासू, शेरसी आदि विभिन्न स्थानों से केदारनाथ हेतु हेलीकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध है।

 सामान्य सूचनाएं :-

यात्रा काल : अप्रैल-मई से अक्टूबर-नवंबर 

वस्त्र : ग्रीष्म ऋतु में हल्के ऊनी वस्त्र शीतकाल में भारी उन्हीं वस्त्र 

रेल मार्ग : निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश से 234 किमी 

सड़क मार्ग : सोनप्रयाग तक बड़े वाहनों से, गौरीकुंड तक छोटे वाहनों से पहुंचा जा सकता है। 

निकटतम हवाई अड्डा : जौलीग्रांट 251 किमी। आवास हेतु श्री केदारनाथ में टेंट कॉलोनी उपलब्ध है।


श्री बद्रीनाथ जी 


अलकनंदा नदी के दाहिने टच पर 3133 मीटर की ऊंचाई पर नर और नारायण पर्वत गोद में बद्री वन में स्थित श्री बदरीनाथ धाम काले पत्थर की ध्यान मग्न पद्मासन भगवान विष्णु की मूर्ति हिंदुओं से सबसे पुराने तीर्थ स्थलों पर एक है आठवीं शताब्दी मैं आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा इस मंदिर की स्थापना की गई भगवान के पुजारी दक्षिण भारत के नंबूदिरिपादब्राहमण रावल होते हैं। 

श्री बद्रीनाथ मंदिर के अतिरिक्त यहां पर तप्त कुंड नारद कुंड से स्नेत्र नीलकंठ शेखर उर्वशी मंदिर ब्रह्मा कपाल माता मूर्ति मंदिर देश का अंतिम गांव माणा भीम पुल वसुधारा जलप्रपात आदि दर्शनीय स्थल है। 

सामान्य जन सूचनाएं:- 

यात्रा काल : अप्रैल-मई से अक्टूबर-नवंबर 

वस्त्र : ग्रीष्म ऋतु में हल्के ऊनी वस्त्र शीतकाल में भारी ऊनी वस्त्र 

रेल मार्ग : निकटतम रेलवे स्टेशन जिसके से 297 किलोमीटर सड़क मार्ग बद्रीनाथ धाम तक सड़क मार्ग से वाहनों द्वारा पहुंचा जा सकता है 

निकटतम हवाई अड्डा : जौलीग्रांट 315 किलोमीटर आवास हेतु श्री बदरीनाथ धाम में धर्मशालाएं आश्रम होटल तथा गढ़वाल मंडल विकास निगम का पर्यटक आवास गृह है।


पंच बद्री 

भविष्य बद्री : मंदिर इस मंदिर की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी द्वारा की गई है यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 2744 मीटर की ऊंचाई पर अवस्थित है और घने जंगलों से घिरा है यहां पर शेर के शीश वाला नरसिंह की मूर्ति स्थापित है भविष्य बद्री कथा अनुसार कलयुग में विष्णु भगवान से समीप पट किला में जाए और विजई पर्वत रह जाएंगे और बद्रीनाथ मंदिर अगम हो जाएगा जब भगवान बद्रीनाथ नारायण यहां विराजमान होंगे यहां आज से भी शेर के शीश वाली नरसिंह की मूर्ति स्थापित है



कैसे पहुंचे : 

देहरादून में स्थित जौलीग्रांट हवाई अड्डा ऋषिकेश से 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है उसे बद्री से ऋषिकेश 274 किमी जोशीमठ से 18 किमी है साल भर से मंदिर तक 6 किमी का रास्ता पैदल तय करना होता है जोशीमठ टो तपोवन में ठहरने की व्यवस्था है।


योग ध्यान बद्री : 



योग ध्यान बद्री पांडुकेश्वर के पाķस स्थित है 1920 मीटर की ऊंचाई पर बने इस मंदिर के गर्भ ग्रह में भगवान बद्रीनाथ की योग ध्यान मुद्रा में मूर्ति स्थापित है मंदिर के चारों ओर का क्षेत्र पांचाल प्रदेश के नाम से जाना जाता है तथा कथा अनुसार यहीं पर राजा पांडु के पांडवों ने 29 से विवाह किया था महाभारत के युद्ध के पश्चात यहां पर पांडवों ने स्वर्गारोहण से पहले अपना राजा परीक्षित को सौंपा था कैसे पहुंचे जौली ग्रांट देहरादून निकटतम हवाई अड्डा योगदान बद्री बद्रीनाथ से 24 किमी पहले rishikesh-badrinath सड़क पर स्थित है नियमित बस और टैक्सी की सेवा उपलब्ध है 4 किमी दूर गोविंदघाट से होटलों और गुरुद्वारा में तीर्थ यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था है।


वृद्ध बद्री मंदिर : 



वृद्ध बद्री बद्रीनाथ को धाम के रूप में स्थापित करने से पूर्व भगवान विश्वकर्मा द्वारा इसी स्थान पर भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की बात पूजा अर्चना शुरू की थी मान्यता अनुसार मनुष्य द्वारा कलयुग में प्रवेश के बाद भगवान विष्णु मंदिर से चले गए बद्रीनाथ की स्थापना के समय आदि गुरु शंकराचार्य को यह प्रतिमान नारद कुंड में मिली जिसकी पुनः प्राण प्रतिष्ठा करवाई गई यह प्रथम बद्री आनी मठ में 1380 मीटर की ऊंचाई पर बसा है विद बद्री का मंदिर वर्षभर पूजा के लिए खुला रहता है कैसे पहुंचे जौलीग्रांट नजदीकी हवाई अड्डा ऋषिकेश से 247 किलोमीटर की दूरी पर रेलवे स्टेशन है एनिमल जो सिमर से 7 किलोमीटर पहले हैं नियमित बस और टैक्सी की सेवा उपलब्ध है।


आदि बद्री : 



1 से 18 किलोमीटर की दूरी दूर रानीखेत मार्ग पर स्थित मंदिर समूह आदिबद्री के नाम से प्रसिद्ध है यह मंदिर भी भगवान नारायण को समर्पित है मंदिरों का निर्माण गुप्त काल में होना बताया गया है कैसे पहुंचे जौलीग्रांट नजदीकी हवाई अड्डा 210 किलोमीटर डिस्टेंस 182 किलोमीटर नजदीकी रेलवे स्टेशन आदिबद्री कृपया से 16 किलोमीटर की दूरी पर है और सड़क मार्ग से रानीखेत नैनीताल और रामनगर से जुड़ा हुआ है


 पंच केदार

रुद्रनाथ : समुद्र तल से लगभग 22 से 86 किमी की ऊंचाई पर भगवान शिव की मुख स्वरूप की पूजा की जाती है मान्यताओं के अनुसार आत्मा मृत्यु के पश्चात यहां वैतरणी नदी को पार करके आगे की यात्रा शुरु करती है यह स्थान विकट भौगोलिक भूभाग से गिरा है गोपेश्वर से 23 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जहां 18 किलोमीटर का रास्ता पैदल ही तय करना पड़ता है कैसे पहुंचे वायु मार्ग निकटतम हवाई अड्डा जोली ग्रांट देहरादून लगभग 258 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है रेल मार्ग निकटतम रेलवे स्टेशन जिसके 241 किलोमीटर की दूरी पर है सड़क मार्ग रुद्रनाथ गोपेश्वर से केदारनाथ जाने वाली सड़क पर स्थित है गांव सगन ऋषिकेश से 219 किलोमीटर की दूरी पर है सागर से दूध नाथ पहुंचने के लिए लगभग 18 किलोमीटर पैदल यात्रा करनी पड़ती है।


कल्पेश्वर : इस स्थान पर सिर के केसों की पूजा होती है प्राचीन मान्यता के अनुसार 2134 मीटर की ऊंचाई पर इस स्थान पर अप्सरा उर्वशी तथा ऋषि दुर्वासा ने कल्प वृक्ष के नीचे तक किया था मंदिर तक पहुंचने के लिए 1 किलोमीटर गुफा मार्ग से होकर जाना पड़ता है कैसे पहुंचे हवाई मार्ग निकटतम हवाई अड्डा जोली ग्रांट देहरादून रेल मार्ग निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश लगभग 243 किलोमीटर दूर है सड़क मार्ग बस और टैक्सी केवल हेलन तक के लिए उपलब्ध हैं जो कि ऋषिकेश बदरीनाथ मार्ग पर 243 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ऐलान के बाद कल्पेश्वर के लिए मुख्य सड़क से 12 किलोमीटर पदयात्रा कर पहुंचा जा सकता है।


तुंगनाथ : पौराणिक कथा अनुसार भगवान शिव की भुजा यहां से उभरी है 3680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर की अपार पवित्रता मानी गई है यह आकाश कामिनी नदी का उद्गम स्थल है यहां से 1 किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद चंद्रशिला के मनोरम दृश्य देखने ही बनते हैं यहां से चारों ओर से तीन सिंह कला तथा घने वनों का सुंदर मनोरम दृश्य दिखता है कैसे पहुंचे हवाई मार्ग ऋषिकेश से 18 किलोमीटर पर जौलीग्रांट हवाई अड्डा है रेल मार्ग ऋषिकेश से 215 किलोमीटर निकटतम रेलवे स्टेशन है सड़क मार्ग ऋषिकेश से 212 किलोमीटर मार्ग पर चोपता पहुंचा जा सकता है।


मद्महेश्वर : चौखंबा पर्वत 3290 मीटर ऊंचाई पर स्थित यह क्षेत्र भगवान शिव की नाभि क्षेत्र के रूप में जाना जाता है यहां महेश्वर नाभि रूप में प्रकट हुए तथा नाभी नुमा लिंग की पूजा होती है यहां का पानी इतना पवित्र माना जाता है कि उसकी कुछ बूंदे ही पाप से मुक्ति दिलाने वाली होती है भारत वर्ष की सर्वश्रेष्ठ मूर्तियों में से एक हरगौरी की प्रतिमा यहां स्थापित है इस स्थान की प्राकृतिक सुंदरता तथा छटा अद्वितीय है कैसे पहुंचे हवाई मार्ग नजदीकी हवाई अड्डा जौलीग्रांट 244 किलोमीटर रेल मार्ग नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश 228 किमी सड़क मार्ग काली मद्महेश्वर जाया जा सकता है मध्यमेश्वर से ऋषिकेश 277 किमी है काली मां से मन में ईश्वर तक 30 किलोमीटर पैदल पहुंचा जा सकता है दूसरा मार्ग होते हुए भी उपलब्ध है।


हेमकुंड साहिब : अलकनंदा एवं पुष्पावती के संगम में 4329 मीटर की ऊंचाई पर हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा अवस्थित है गुरु ग्रंथ साहिब के अनुसार इस स्थान पर सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह जी द्वारा तपस्या की गई थी श्री हेमकुंड साहिब के लिए गोविंदघाट तक सड़क मार्ग द्वारा वाहनों से एवं तत्पश्चात 19 किलोमीटर पैदल यात्रा कर पहुंचा जा सकता है सामान्य सूचनाएं यात्रा का हाल अप्रैल से अक्टूबर नवंबर वस्त्र ग्रीष्म ऋतु में हल्के ऊनी वस्त्र शीतकाल में भारी ऊनी वस्त्र रेल मार्ग निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश से 290 किमी सड़क मार्ग हरिद्वार से 302 किमी निकटतम हवाई अड्डा जौलीग्रांट 207 किमी आवास हेतु हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा उपलब्ध है गोविंदघाट में धर्मशालाएं होटल एवं पार्किंग सुविधाएं उपलब्ध हैं।


साभार :  यात्रा दिग्दर्शिका एवं सूचना निदर्शिनी वर्ष 2018

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