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Saturday, 13 February 2021

घोर लापरवाही : कर्णप्रयाग सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के वार्डों में मरीजों के बैड़ों पर रात भर सोते हैं शहर भर के आवारा कुत्ते

कर्णप्रयाग सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में वार्डों में मरीजों के बैड़ों पर सो रहा कुत्ता


घोर लापरवाही : कर्णप्रयाग सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के वार्डों में मरीजों के बैड़ों पर रात भर सोते हैं शहर भर के आवारा कुत्ते

सोनिया मिश्रा/केदारखण्ड एक्सप्रेस

कर्णप्रयाग। तस्वीर देख कर आप चौंक जरुर  गए होंगे लेकिन यकीन मानिए कर्णप्रयाग सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के व्यवस्थापकों के लिए यह सामान्य सी बात है। अस्पताल में मरीजों के लिए लगाए गए बैड़ में एक तरफ मरीज भर्ती रहते हैं तो दूसरी तरफ के बैड़ों पर शहर भर के आवारा कुत्तों का सोना यहां आम बात है। आलम यह है कि फिर इन्हीं बिस्तरों पर मरीजों को लेटाया जाता है जिससे मरीजों को खुजली जैसी नई बीमारी उत्पन्न हो जाती है। जबकि अन्य बीमारियों के भी होने की आशंका बनी रहती है। लेकिन अस्पताल प्रबन्धन के जिम्मेदार इसे साधारण बात मानते हैं। अब इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मरीजों के स्वास्थ्य के साथ यहां अस्पताल प्रबन्धन कितनी बड़ी लापरवाही बरत रहा है। 

चलिए अब आपको जरा विस्तार से समझाते हैं। दरअसल जनपद चमोली के कर्णप्रयाग सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में रात के वक्त अक्सर शहर भर के आवारा कुत्तों का जमावड़ा लगा रहता है। स्थिति इतनी विकट हो चली है कि आवारा कुत्ते अस्पताल के अंदर वार्डों में पहुँचकर मरीजों के लिए लगाए गए खाली बैड़ों पर सो जाते हैं। और यह सब होता है अस्पताल के डाॅक्टरों व कर्मचारियों के सामने। लेकिन मजाल क्या कि कोई इन कुत्तों को यहां से भाग दे। जबकि फिर इन्हीं बेड़ों व विस्तरो ंपर मरीजों को भर्ती किया जाता। जिससे मरीजों में नई बीमारियों शुरू हो जाती हैं। अस्पताल प्रबन्धन की इस गैरजिम्मेदार हरकत से मरीजों की जिंदगियों के साथ बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा है। लेकिन हैरानी तब होती है जब सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कर्णप्रयाग के प्रभारी डाॅ0 राजीव शर्मा इस बात को बड़ी साधारण मान रहे हैं। डाॅ0 शर्मा कहते हैं कि कु़त्ते रोज नहीं आते हैं बल्कि कभी-कभी ही वार्डों में सोते हैं। अब इन्हें कौन बतायेगा कि आखिर कभी कभार क्यों सोते हैं?

बहरहाल अस्पताल प्रबन्धन की इस लचर और गैरजिम्मेदार व्यवस्था से यहां आने वाले मरीजों एवं उनके परिजनों के स्वास्थ्य के साथ भारी खिलवाड़ है। ऐसे अस्पताल प्रबन्धकों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए। 

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