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Saturday, 13 February 2021

रूद्रप्रयाग आपदा प्रबन्धन विभाग में बैंठे हैं घूसखोर, आॅडियों वायरल


 

रूद्रप्रयाग आपदा प्रबन्धन विभाग में बैंठे हैं घूसखोर, आॅडियों वायरल

-भूपेन्द्र भण्डारी ‘प्रखर’/केदारखण्ड एक्सप्रेस

रूद्रप्रयाग। जनपद में आपदा प्रबन्धन विभाग में पीआरडी जवान की वेतन देने के एवज में आपदा प्रबन्धन ड्यूटी प्रभारी द्वारा पैंसों की मांग की जा रही है। पैंसे न देने पर उसे नौकरी से हटाने की बात भी सामने आ रही है। ऐसे में आपदा प्रबन्धन विभाग सवालों के घेरे आ गया है। पहले आप इस आॅडियों को सुने-



दरअसल इन दिनों सोशल मीडिया के व्हाट्सएप्प ग्रुपों में सुरेन्द्र नाम के एक शख्स ने एक आॅडियों वायरल किया गया है जिसमें पीआरडी के जवान से आपदा प्रबन्धन ड्यूटी प्रभारी के द्वारा वेतन दिलाने के एवंज में पैंसों की मांग की जा रही है जबकि पैंसे न देने पर उसे नौकरी से हटाने की बात कहीं गई है। वायरल आॅडियों के कैप्शन में लिखा गया है कि रूद्रप्रयाग जनपद के आपदा प्रबन्धन में ड्यूटी प्रभारी के पद पर तैनात मणिक चन्द्र द्वारा एक पी आर डी में ज्वाइनिंग का आदेश बनाने के लिये पांच हजार रूपये की मांग की जा रही है जबकि एक महिने की वेतन न आने पर मणिक चन्द्र द्वारा और रूपये की मांग की जा रही है। पैंसे न दिये जाने पर हटाने की बात की जा रही है। 

पूरे प्रकरण पर जब हमने सुरेन्द्र ने बताया कि वे आपदा प्रबन्धन विभाग में कार्यरत थे लेकिन साजिश के तरह उन्हें यहां से हटाया गया। उनके द्वारा बताया कि जनवरी-फरवरी 2020 में हिमालय एन0जी0ओ0 द्वारा आपदा प्रबन्धन के डीडीआरएफ के 10 लड़कों के माध्यम से जखोेली विकासखण्ड में ग्रामीणों को आपदा की ट्रेनिंग दी गई थी जिसमें संस्था द्वारा सुरेन्द्र के खाते में 44 हजार रूपये डाले गए। सुरेन्द्र द्वारा 44 हजार की राशि ड्यूटी प्रभारी मुंशी चम्वाल को दी गई जो की 10 लड़कों के साथ-साथ ड्यूटी प्रभारी द्वारा आपस में बांट दी गई जबकि 13हजार की खाने के लिए एनजीओ द्वारा अतिरिक्त राशि डीडीआरएफ के जवान अनिल को दी गई थी। गौरतलब हो कि इस अविधि में इन जवानों को 15 हजार वेतन भी मिलता रहा। लेकिन बाद में साजिश के तहत डीडीआरएफ में तैनात जगमोहन नाम शख्स ने सुरेन्द्र के खिलाफ शिकायत की कि एनजीओ के पैसे और कोविड़ के दौरान ग्रामीणों को दी जाने वाली राशन में इनके द्वारा घोटाला किया गया। तत्कालीन जिलाधिकारी वंदना सिंह ने पूरे प्रकरण पर जांच बिठाई जिसमें सुरेन्द्र द्वारा अपना स्पष्टीकरण भी दिया गया था। लेकिन आपदा प्रबन्धन अधिकारी द्वारा इसे हटाया गया। बताया जा रहा है कि आपदा प्रबन्धन विभाग में डीडीआरएफ में नौकरी लगाने के नाम पर जमकर लूट खसौट हो रही है। जबकि डीडीआरएफ में ऐसे व्यक्तियों को लगाया जा रहा है जिनके पास न तो डिग्री है और न ही उन्होंने कभी कोई ट्रेनिंग ली है। 

बहरहाल आॅडियों सुनकर इतना तो स्पष्ट हो रहा है कि रूद्रप्रयाग का आपदा प्रबन्धन विभाग भारी भ्रष्टाचार में लिप्त है और किस तरीके से घूसखोरी का बड़ा खेल यहां चल रहा है। उच्चाधिकारीयों को चाहिए कि इस पूरे प्रकरण की गभीरता से जांच की जाय ताकि ऐसे घूसखोर कर्मचारी अधिकारी के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जा सके। 


नोट: केदारखण्ड एक्सप्रेस न्यूज़ ऑडियो की  पुष्टि नहीं करता है।