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Sunday, 10 January 2021

साधन सहकारी समिति एवं मिनी बैंक मस्तूरा में लाखों का गड़बड़झाला



साधन सहकारी समिति एवं मिनी बैंक मस्तूरा में लाखों का गड़बड़झाला

पूर्व विधायक आशा नौटियाल पीड़ित परिवारों के साथ मिली जिलाधिकारी को, एसडीएम ऊखीमठ करेंगे मामले की निष्पक्ष जाँच: डीएम

ऊखीमठ। साधन सहकारी समिति एवं मिनी बैंक मस्तूरा में लाखों रुपये की हेराफेरी एवं बैंक अभिलेखों से की गई छेड़छाड़ कर गबन की जाँच की माँग को लेकर काश्तकारों के प्रतिनिधि मंडल ने पूर्व विधायक आशा नौटियाल के नेतृत्व में जिलाधिकारी से मुलाकात की।उन्होंने जिलाधिकारी से मामले पर निष्पक्ष जाँच करते हुए उचित कार्यवाही करने की माँग की है।

सहकारी समिति मस्तूरा से सम्बद्ध ग्राम सभा हुड्डू, उषाडा, काण्डा-बरंगाली, दैड़ा, सारी एवं करोखी के ग्रामीण कृषक बीते दिनों जिलाधिकारी कार्यालय पहुँचे। कास्तकारों का कहना है कि समिति के तत्कालीन सचिव धीरेंद्र बर्तवाल द्वारा बैंक अभिलेखों से छेड़छाड़ कर फर्जी हस्ताक्षरों से लाखों रुपए का गबन किया था। दुर्भाग्यवश उनकी अक्टूबर 2013 में मौत हो चुकी है। अब विभाग द्वारा 167 काश्तकारों पर 81,82912 का बकाया दिखाया गया है, जिसमें से 70 काश्तकारों को वसूली के नोटिस भी विभाग द्वारा थमा दिये गए हैं। 

इस संपूर्ण प्रकरण की जाँच की माँग को लेकर काश्तकारों द्वारा तहसील परिसर उखीमठ में मार्च 2018 से 52 दिनों तक क्रमिक अनशन भी किया गया लेकिन प्रशासन के आश्वासन के बाद भी आज तक निष्पक्ष जाँच नहीं हो पाई है। अब कृषकों को अनावश्यक रूप से विभाग द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है।प्रतिनिधिमंडल में पूर्व विधायक श्रीमती आशा नौटियाल, सरपंच भगत सिंह नेगी, पूर्व प्रधान घनश्याम लाल, जसवीर सिंह नेगी, नरेंद्र सिंह नेगी, प्रताप सिंह बज्वाल आदि मौजूद थे। जिलाधिकारी मनुज गोयल द्वारा उपजिलाधिकारी ऊखीमठ को तत्काल जाँच करने के निर्देश दिए गये हैं।


घोटाले की परत-दर-परत पर्दाफाश 

किस्सा-1. मिनी बैंक मस्तूरा में पूर्व ब्लाक प्रमुख फतेह सिंह रावत द्वारा वर्ष 2010 में दो वर्ष के लिए एफ.डी.(सावधि जमा) बनाई गई थी, जिसे 2012 में पूर्ण हो कर 1,24,276 रुपये की धनराशि मिलनी थी। लेकिन आठ साल गुजर जाने के बाद भी जमा धनराशि नहीं मिल पाई है। ऊपर से जमा धनराशि पर 40,000 का ऋण दिखाया गया है। पीड़ित का कहना है कि एफ.डी. की मूल प्रति उनके पास सुरक्षित है। फर्जी हस्ताक्षरों से ऋण दर्शाया गया है।

किस्सा-2. सारी गाँव निवासी भगत सिंह नेगी का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2003 में कृषि कार्य के लिए समिति से 20,000 का ऋण लिया था, जिसे 2006 में पूर्ण रूप से जमा करने के बाद दुबारा 25,000 का ऋण लिया। उसे भी वर्ष 2010 तक जमा कर दिया गया, जिसकी जमा रसीद उनके पास मौजूद है। लेकिन अब विभाग द्वारा उन्हें 88,317 रुपये का नोटिस थमा दिया गया है।

किस्सा-3. जसबीर सिंह नेगी का कहना है कि उन्होंने अपने पुत्र दीपक सिंह के नाम पर 20,000 की एफ.डी.बनाई थी, लेकिन बैंक दस्तावेजों में उसे 2,000 दर्शाया गया है।

किस्सा-4. मुरली सिंह की पुत्री अर्चना की 10,000 की एफ.डी.को बैंक अभिलेखों में 1,000 दिखाया गया है।

समिति के सचिव का कथन

साधन सहकारी समिति ऊखीमठ के ए.डी.ओ. पंकज सैनी ने कहा है कि वर्ष 2019-20 में दैड़ा समिति का विलय ऊखीमठ समिति में हो गया है। अब दोनों समितियाँ बहुद्देश्यीय ऊखीमठ समिति के नाम से जानी जाती हैं।वर्तमान में ऊखीमठ समिति में 130.55 लाख का बकाया है, जिसमें से 81.82 लाख मस्तूरा (दैड़ा) समिति का बकाया है।    


सभार: अनिकेत

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