Breaking News

Thursday, 14 January 2021

27 वर्षों तक अव्यवस्थाओं से जूझते हुए आखिरकार बंद हो गया आईटीआई चिरबटिया

 


27 वर्षों तक अव्यवस्थाओं से जूझते हुए आखिरकार बंद हो गया आईटीआई चिरबटिया

सुनील सेमवाल/केदारखण्ड एक्सप्रेस 

जखोली।  कुकुरमुत्तों की तरह सरकारों ने व्यवसायिक शिक्षा के केन्द्र तो खोले हैं लेकिन इन शिक्षण संस्थानों में आधारभूत ढांचा विकसित करना सरकारें भूल गई, नतीजन पहले लम्बे समय से ये केन्द्र बंदी की मार झेल रहे थे और अब सुविधायें न होने से बंद हो गए हैं। पाॅलटेक्निकल हो या आईटीआई शिक्षण संस्थान। सरकारों ने अपनी सस्ती लोकप्रियता बटोरने के लिए  जगह-जगह इन केन्द्रों की स्थापना तो कर दी लेकिन इन संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं का भारी टोटा बना हुआ है।

विकाखण्ड जखोली के दूरस्थ क्षेत्र चिरबटिया में स्थिति आईटीआई संस्थान अपने स्थापना काल से ही भारी अव्यवस्थाओं का दंश झेल रहा था। वर्ष 1989 में उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा जनपद टिहरी व रूद्रप्रयाग की सीमा पर चिरबटिया में आईटीआई शिक्षण संस्थान को स्वीकृति तो दी थी जिसका संचालन वर्ष 1992 में तीन ट्रेडों के साथ किराये के भवन पर आरम्भ किया गया। लेकिन सरकारों की बेरूखी का आलम तो देखिए 28 साल बीत जाने के बाद भी इसे अपना भवन नसीब नहीं हुआ। स्थिति यह रही कि पिछले सालों तक 4 रूपये प्रति स्कायर सेमी के हिसाब इस भवन का किराया जाता था जिस कारण मकान मालिक इसे रिपेयर नहीं कर रहा था जिससे भवन की स्थिति अत्यंत जीर्ण-शीर्ण बनी हुई थी। ऐसे में यहां अध्ययनरत छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था जबकि अब यह विद्यालय बंद ही हो चुका है।  

90 के दशक में संचालित आईटीआई चिरबटिया में अध्यापकों और कर्मचारियों के स्वीकृत 14 पदों के साथ शासनादेश जारी किया गया था आलम यह है कि 27 वर्षों बाद भी आईटीआई केवल प्रभारी अनुदेशक के भरोसे चलता रहा। जबकि इस संस्थान में तीन इलेक्ट्रिशियन, इलेक्ट्रिकल और वारमैंन जैसे ट्रेड संचालित तो किए जा रहे थे पर इनके आध्यापक भी नहीं थे। जैसे तैसे 27 सालों तक यह संस्थान धक्केमारकर चलता रहा लेकिन अंततः यह बंद हो गया।

आपको बताते चले कि लुठियाग के ग्रामीणों द्वारा आईटीआई भवन निर्माण के लिए 19 नाली निजी भूमि को विद्यालय के नाम हस्तांतरित कर दी गई थी और विद्यालय निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश निर्माण निगम को वर्ष 2017 में 1 करोड़ रूपये भी दिए जा चुके थे लेकिन भवन निर्माण क्यों नहीं हो पा रहा यह समझ से परे हैं। बहरहाल सरकार रोजगारपरख शिक्षा को बढ़ावा देने और पलायन रोकने की जितनी बातें और दावे करते हैं इन तस्वीरों से वे खोखले ही साबित होते हैं।