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Thursday, 1 October 2020

हे भगवान! भ्रष्टाचार की इस लाचार व्यवस्था पर कौन करेगा कार्यवाई?? हादसो के बाद ही बस छाती पिटने का ही स्वांग करते रहेंगे जिम्मेदार



हे भगवान! भ्रष्टाचार की इस लाचार व्यवस्था पर कौन करेगा कार्यवाई?? हादसो के बाद ही बस छाती पिटने का  ही स्वांग करते रहेंगे जिम्मेदार 

-नवीन चंदोला/केदारखण्ड एक्सप्रेस 


थराली।" हे भगवान भ्रष्टाचार की इस लाचार व्यवस्था पर आखिर कौन करेगा कार्यवाही??  हादसों के बाद छाती पीटने का स्वांग ही करते रहेंगे जिम्मेदार।" यह सवाल हर रोज उन तमाम लोंगो के जेहन में आता है जो कुराड़-पार्था मोटर मार्ग पर चलते हैं। सड़क की इतनी बदतर स्थिती हो रखी है की सड़क पर वाहनों का चलना तो जोखिम भरा है ही बल्कि पैदल चलना भी दूभर है। लोग जान जोखिम में  डालकर मजबूरन इस मार्ग पर सफर कर रहे है।



उत्तराखंड की सड़कों की बदहाली की कहानी किसी से भी छिपी नही है, हालांकि सरकार इस समय कई राष्ट्रीय राजमार्गों पर चौड़ीकरण और डामरीकरण का कार्य भी कर रही है ताकि यात्रा को सुगम और सहज बनाया जा सके लेकिन पहाड़ो में गांव गांव को जोड़ने वाली प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत बनी सड़को का हाल देखकर तो यही लगता है कि अधिकारी से लेकर ठेकेदार तक सब घटिया  गुणवत्ता सड़के तैयार कर रहे है जो लोक जीवन  के लिये बड़ा खतरा है। ये सड़के  महज एक दो बरसात भी नही झेल पा रही हैं यकीन न आये तो जरा थराली-कुराड़-पार्था  मोटरमार्ग पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत बनी इस सड़क का ही हाल देख लीजिए। सड़क देखकर मालूम ही नही पड़ता है कि सड़क में गड्ढे हैं या फिर गड्ढों में विभाग ने सड़क बना दी।  2014 में 178.33 लाख की लागत से इस 17 किलोमीटर लंबे मोटरमार्ग पर द्वितीय चरण का कार्य किया गया। 25 लाख रुपये विभाग ने 5 वर्षो तक सड़क के अनुरक्षण में भी खत्म कर दिए, लेकिन अब सड़क की हालत ये है कि वाहन चालकों को सवारी ढोते समय कई जगहों पर पहले या तो सवारियों को उतारना पड़ता है या फिर सड़क में बने गड्ढों में पत्थर भरकर आवाजाही सुचारू की जाती है।

ग्रामीणों की माने तो सड़क निर्माण के बाद से ही सड़क की स्थिति यूँ ही बदहाल बनी हुई है इस मोटरमार्ग से लगभग आधा दर्जन से अधिक गांवो की हजारो की आबादी जुड़ी है ,सड़क को बने हुए महज 5 साल भी पूरे नही हुए और अधिकांश जगह पर सड़क का डामर उखड़कर बड़े बड़े गड्ढों में सड़क तब्दील हो चुकी है आलम ये है कि अधिकतर बरसात में ये सड़क महीनों तक बन्द ही रहती है ,ऐसे में सड़क की वर्तमान में बनी बदहाल स्थिति को देखते हुए  ग्रामीणों को बरसात और जाड़ो मे ज़ब सड़क पर पाला जम जाता है  तो  सड़क की स्थिति औऱ बदहाल होने का डर सताने लगा रहता है।   


ग्रामीण धीरेंद्र बिष्ट, आनंद सिंह पिमोली, कमलेश देवराडी. दिनेश बिष्ट, हरेंद्र सिंह पिमोली, जय वीर पिमोली, हरेंद्र पिमोली पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य, एडवोकेट जय सिंह बिष्ट, गोपाल सिंह पिमोली आदि लोगों का कहना है कि प्रधान से लेकर के सांसद तक सभी को इस सड़क के बारे में अवगत करा दिया गया है लेकिन इन जनप्रतिनिधियों ने अब तक इस मोटरमार्ग की सुध तक नही ली है। हालांकि ग्रामीणों द्वारा बार बार क्षेत्र पंचायत सदस्य से लेकर जिला पंचायत सदस्य और क्षेत्रीय विधायक तक इस मोटरमार्ग की बदहाल स्थिति से अवगत कराया जा चुका है। ग्रामीण खुद भी उपजिलाधिकारी थराली के माध्यम से विभाग के आला अधिकारियों को तक सड़क की बदहाल स्थिति को सुधारने की गुहार कई बार लगा चुके हैं लेकिन विभाग के कानों में जूँ तक नही रेंग रही है।  प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अधिशासी अभियंता प्रमोद गंगाडी ने   टेलीफोन पर दी जानकारी में बताया कि सड़क पर मार्च माह में पैच वर्क का कार्य होना था लेकिन लॉकडाउन में लेबर न होने और कार्य की अनुमति न मिलने की वजह से सड़क की स्थिति को सुधारा नही जा सका है उसके बाद बरसात सुरु  हो गई अधिशासी अभियंता ने बरसात से पहले सड़क की स्थिति में सुधारने की बात कही थी लेकिन आज भी स्थिति जस की तस बनी हुई है अब देखना होगा क्या जाड़ों से पहले विभाग इस सड़क का सुधारी करण करता या जाड़ो में भी यहां की जनता को  मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता  है।