राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 152वीं जयंती : कितने योग्य बन पाये गाँधी के आदर्शों के?

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 152वीं जयंती : कितने योग्य बन पाये गाँधी के आदर्शों के?

-रमेश पहाड़ी/ वरिष्ठ पत्रकार

आज देश को सत्य, अहिंसा, स्वराज्य, सुराज का मंत्र देने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 152वीं जयंती है। गाँधी जी इस देश की संस्कृति, धार्मिक विश्वास, परंपरा के वास्तविक प्रतिनिधि रहे हैं। सत्य, अहिंसा के मंत्र को जीवन में उतार कर, आमजन को आंदोलित व सशक्त कर अंग्रेजी सत्ता को उखाड़ फेंक कर दिखाने वाले महात्मा गाँधी के जीवन को एक आदर्श के रूप में उतारने की बातें लगभग सौ-सवा सौ वर्षों से हो रहीं हैं। हम इसे वास्तव में अपने जीवन का हिस्सा कितना बना पाए हैं, मन-वचन-कर्म में उसे कितना उतार पाए हैं और यदि नहीं उतार पाए तो क्यों नहीं उतार पाए हैं, यह बड़ा सवाल है। इसकी सही पड़ताल यदि बिना कोई बहाना बनाये हम अपने अंतर्मन से कर पाएं तो शायद हम गाँधी जी के प्रति अधिक न्याय कर पाएंगे।

यह एक तथ्य है कि गाँधी जी को इस देश ने और मुख्य रूप से अधिसंख्य  गाँधीवादियों ने ही अपने जीवन से उतार फेंका है। कारण साफ है कि बढ़ते भौतिकवाद में उलझती दुनिया को यह रास नहीं आ सकता। दुनिया के राजनीतिकों, उद्योगपतियों को तो बिल्कुल भी नहीं। यदि ये सच बोलेंगे, अपरिग्रह को अपनाएंगे, हिंसा छोड़ेंगे तो आर्थिक व राजनीतिक सत्ता को कैसे प्राप्त करेंगे?

सच बात यह है कि वर्तमान सन्दर्भ में  गाँधी एक आदर्श हैं, जिन्हें आकर्षक  शब्दों की चासनी में डुबोकर परोसा तो जा सकता है लेकिन व्यवहार में नहीं उतारा जा सकता। कोई झक्क सफेद खादी के कपड़े पहन कर गाँधी व गाँधीवाद पर लच्छेदार भाषण दे सकता है, मनभावन लेख-कविता लिख सकता है, तमाम तरह के कार्यक्रम आयोजित कर सकता है, उनमें मनोयोगपूर्वक भागीदारी कर सकता है लेकिन गाँधी के एक भी विचार को अपने जीवन में उतारने की दिशा में कदम नहीं बढ़ा  सकता। जिन्होंने प्रयास किये, उनके कदम भी कुछ दूर चल कर ठिठक गए! ठीक वैसे ही, जैसे राम के आदर्शों को हम भज तो हजारों वर्षों से रहे हैं लेकिन जीवन-व्यवहार में उतार नहीं पाये हैं। हम देख सकते हैं कि राम के हजारों वर्षों बाद गाँधी ही हुए, जिन्होंने राम के आदर्शों को लोक कल्याण के लिए जीवन में उतारा। फिर हजारों-सैकड़ों वर्ष बाद कोई और पैदा हो सकता है, जो राम और गाँधी के आदर्शों को जीवन में उतारते हुए लोकजीवन को व्यवस्थित करने में सफल हो। यह आशा छोड़नी नहीं चाहिए।

महात्मा गाँधी और उनके सत्कर्म को जीवन का आधार बनाने वाले देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि।

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 152वीं जयंती : कितने योग्य बन पाये गाँधी के आदर्शों के? राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 152वीं जयंती : कितने योग्य बन पाये गाँधी के आदर्शों के? Reviewed by केदारखण्ड एक्सप्रेस on October 01, 2020 Rating: 5
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