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Tuesday, 1 September 2020

इतने चुपचाप कहा चले गये हो मित्र आशुतोष!



 इतने चुपचाप कहा चले गये हो मित्र आशुतोष!

कुलदीप राणा आजाद/ सम्पादक केदारखण्ड एक्सप्रेस 

मेरी तो कुछ समझ में नही आ रहा है, दोस्त! लिखू तो क्या लिखूँ। कैसे लिखूँ। यकीन ही नही हो रहा है कि  तुम हम सब को छोड़कर अनंत यात्रा पर परमलोक के लिये निकल गये हो। तुम्हारे साथ बिताए एक-एक लम्हा आंखों में रह-रह कर याद आ रहा है। कल ही की तो बात थी जब हम तुम साथ में  कई योजनाएं बनाया करते थे, समाज के उत्थान लिए। अपने मुल्क, अपने पहाड़ के लिए चिंतन किया करते थे। लेकिन तुम सारे काम अधर में छोड़ कर चले जायेंगे, एसे तो नहीं थे तुम। यकीन नही हो रहा है।



आज साय करीब 4 बजे प्रेमन्जाली पत्रिका के सम्पादक और मेरे आजीज मित्र आशुतोष मंमगाई के आकस्मिक देहावसान  की खबर जैसे ही फ़ेसबुक मिली तो सहसा विश्वास नही हुआ। देहरादून के कई मित्रों से सम्पर्क किया तो खबर की पुष्टि हुई। फिर भी यकिन नहीं हो रहा था कि  33 साल का एक जिन्ददिली इंसान हँसता मुस्कुरता  इस तरह से चुपचाप हम सब को छोड कर चला जायेगा। गाँव-रिस्तेदारो से  काफी पता किया लेकिन किसी को भी आशुतोष भाई की मौत के  स्पष्ट कारणों का पता नही था। आशुतोष भाई के इस तरह जाने से सब हैरान ओर परेशान हैं।  कुछ जानकारी मिली कि उन्हें 3-4 दिनो से बुखार था, लेकिन वाकई में  उनकी असमय मृत्यु समझ में नही आ रहा है।


2016 में आशुतोष भाई की शादी हुई थी, उसी साल मेरी भी उनसे दोस्ती हुई थी,वे  सरल स्वभाव,  मृदुभाषी खुशमिजाज और हंसमुख इन्सान थे। कोई अपरचित व्यकि उनके साथ 5-10 मिनट रहे तो वह हमेशा के लिये उनका मुरीद बन जाता और यही खूबी मुझे भी उनके करीब ले गई।  समाज और लोक सेवा का भाव हमेशा उनके दिलों दिमाग में रहता था। हालही में  कोरोनाकाल में उनहोंने कई मुसाफिरों को महिनों तक लंगर लगाकर खाना खिलाया। जबकि समाज के प्रति समर्पण लग्न और लोकहित में सब कुछ न्योछावर करने की ललक उन्हें विरला बनती थी। 2017 मे आशुतोष भाई के साथ तहलका इंडिया न्यूज़ में हमने एक साथ काम किया था और रुद्रप्रयाग जनपद के कई जनपक्षीय मुद्दो, समस्याओं को प्रमुखता से उठाया था जिनका समाधान भी हुआ। जब भी मैं देहरादून जाता तो वे हमेशा मुझे अपने घर पर ले जाते ओर फिर रातभर पहाड़ की समस्याओं और उन्के समाधान पर बाते ओर योजनायें बनती। लेकिन मित्र तुम इतने चुप चाप चले जायेंगे एसा तो हमने कभी सपने मे भी नही सोचा था।


आपके जाने से ना केवल पत्रकारिता जगत को एक बड़ी क्षति हुई है बल्कि पहाड़ से एक लोक सेवक का अवसान हुआ है जिसकी भरपाई भविष्य में दूर-दूर तक कर पाना मुश्किल है। तुम हमेशा याद आते रहोगे मित्र। ईश्वर आपको अपने श्री चरणों में स्थान दे। परिवार और सगे संबंधियों को इस असहनीय दर्द सहने की अनंत शक्ति प्रदान करें। भावभीनी श्रद्धांजलि!!

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