मौत के साये में जी रहे दोणी तोक के 5 परिवार, आवासीय घरों में पड़ी हैं मोटी-मोटी दरारें, शासन-प्रशासन नही ले रहा सुध



मौत के साये में जी रहे दोणी तोक के 5 परिवार, आवासीय घरों में पड़ी हैं मोटी-मोटी दरारें, शासन-प्रशासन नही ले रहा सुध 



ब्यूरो: केदारखण्ड एक्सप्रेस न्यूज़ 


रुद्रप्रयाग। आपदाओं की दृष्टि से अतिसंवेदनशील जनपद रूद्रप्रयाग में आज भी सैकड़ों परिवार खतरे की जद में होने से विस्थापन की बाट जोह रहे हैं, लेकिन आज हम जिस गाँव की बात कर रहे हैं वाकई में तस्वीरें देखकर आपकी रूह कांप जायेगी। तस्वीरें देखकर अंदाजा लगाइये कि पहाड़ में लोग मौत के बीच कैसे जीवन जीते हैं, लेकिन हमारा तंत्र कैसे हादसो का इन्तजार करता।


जखोली विकासखण्ड के पुजार गाँव का डोणी तोक के पांच परिवार मौत के साए में जीने को मजबूर हैं। वर्ष 2013 की आपदा में डोणी तोक के नीचे से  भू-धँसाव हुआ था जिस कारण यहां निवासरत जगदीश प्रसाद, शंभू प्रसाद, गुरू प्रसाद, मोला राम व भूपेन्द्र प्रसाद के घरों में मोटी-मोटी दरार आ गई थी। उस वक्त से लेकर आज तक ये पांच परिवार विस्थापन की मांग कर रहे हैं लेकिन विस्थापन नहीं हो सका हैं। जबकि हर साल इन परिवारों की मकानों में और अधिक दरारें आ रही हैं वहीं इनके आवासीय भवन भी अब आड़े-तीरछे हो गए हैं जो कभी भी जमिन्दोज होकर बड़े  हादसे का कारण बन सकते हैं। पीड़ित परिवारों ने पटवारी से लेकर तहसीलदार, उपजिलाधिकारी, जिलाधिकारी के साथ ही नेता मंत्रियों को पत्राचार कर अपनी समस्या बता चुके हैं लेकिन सुध लेवा कोई नहीं हैं। पिछले वर्ष तत्कालीन जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने भी डोणी तोक का जायजा लिया और यहां कि स्थिति देखकर उन्होंने इन परिवारों को तत्काल प्रभाव से विस्थापन करने के निर्देश दिए थे, लेकिन तब भी बात आई-गई हो गई।


पीड़ित  मोला राम, जगदीश भट्ट का कहना है की हम तोणी तोक के  पांच परिवार के पास अन्यंत्र शिप्ट होने का कोई साधन ना होने से हमें इन्हीं टूटे-फूटे घरों में रहने को मजबूर होना पड़ रहा हैं। ध्याड़ी-मजदूरी करके परिवार का लालन-पालन करने वाले परिवार भला कहा से नई जगह और आशियाना बनायेंगे। 


दोणी तोक ये परिवार बरसात के वक्त वे रातों को सो नहीं पाते हैं। हर वक्त डर सताता है कि कहीं मकाने जमीदोज न हो जाय। छोटे-छोटे बच्चों और बुजुर्गो को तो भारी परिशानियां झेलनी पड़ती हैं। डोणी तोक के इन पांच परिवार के सर पर हर वक्त मौत मंडरा रही है लेकिन हमारा जिला प्रशासन है कि सुध लेने को तैयार नहीं हैं।  


जिम्मेदारों से जब उनकी जिम्मेदारी को लेकर सवाल करें और जवाब ऐसे में मिले तो फिर सिस्टम को कोसे न तो और क्या करें। आपदाओं की दृष्टि से अतिसंवेदनशील रूद्रप्रयाग जनपद 23गांवों के 472 परिवार आज भी विस्थापन की बाट जोह रहे हैं। सबसे अधिक उखीमठ में 248 परिवार, जखोली में 192 परिवार और रूद्रप्रयाग में 32 परिवार सालों से विस्थापन की श्रेणी में तो हैं लेकिन विस्थापन नहीं हो सका है। पुजार गाँव का डोणी तोक के पाँच परिवार बीते सात वषों से शासन-प्रशासन की घोर उपेक्षा का शिकार हुए हैं। पीड़ितों का कहना है कि इस गांव में कभी कोई अनहोनी होती है तो इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह से जिला प्रशासन और सरकार की होगी।


जिलाधिकारी वंदना सिंह से जब इस संबंध में पूछा तो उन्होंने हमारे सवाल को ही जलेबी की तरह गोल-गोल घुमा दिया-जिला को जब पूछा गया की आखिर क्यों 7 वर्षों से दोणी के 5 परिवारों को विस्थापित नहीं किया गया। तो उनका जवाब था की जिन परिवारों को मुआवजा दिया गया है उनसे जीर्ण-शीर्ण भवनों से हटाया जायेगा।

मौत के साये में जी रहे दोणी तोक के 5 परिवार, आवासीय घरों में पड़ी हैं मोटी-मोटी दरारें, शासन-प्रशासन नही ले रहा सुध मौत के साये में जी रहे दोणी तोक के 5 परिवार, आवासीय घरों में पड़ी हैं मोटी-मोटी दरारें, शासन-प्रशासन नही ले रहा सुध Reviewed by केदारखण्ड एक्सप्रेस on September 04, 2020 Rating: 5
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