पॉलिटैक्निक संस्थान जखोली के अस्तित्व को बचाने के लिए आगे आएं जनप्रतिनिधि : मोहित डिमरी


पॉलिटैक्निक संस्थान जखोली के अस्तित्व को बचाने के लिए आगे आएं जनप्रतिनिधि : मोहित डिमरी

भवन बनकर हुआ तैयार, सरकार ने बंद किया संस्थान 
उत्तराखंड में 12 पॉलिटैक्निक संस्थान बंद, 250 शिक्षक बेरोजगार
इससे पूर्व दस आईटीआई भी हो चुके हैं बंद

रुद्रप्रयाग। हाल ही में उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में करीब बारह पॉलिटैक्निक संस्थानों को बंद करने का आदेश जारी कर दिया है। इनमें से एक संस्थान रुद्रप्रयाग जनपद का जखोली पॉलिटैक्निक संस्थान भी है। जबकि जखोली में करीब चार करोड़ 66 लाख रुपए की धनराशि से पॉलिटैक्निक संस्थान का निर्माण चल रहा है। 

इससे पहले सरकार दस आई.टी.आई भी बंद करने का आदेश जारी कर चुकी है। अब सरकार ने पॉलिटैक्निकों के भवनों को उच्च शिक्षा निदेशालय को हस्तांतरित करने के आदेश भी जारी कर दिये हैं।  बताया गया कि उत्तराखंड सरकार का इरादा बंद हो चुके पॉलिटैक्निक के भवनों में डिग्री कॉलेज चलाने का है। हालांकि इन भवनों में डिग्री कॉलेज चल पाएंगे या नहीं, इस पर भी संशय है। जखोली में पॉलिटैक्निक संस्थान का भवन बनकर तैयार होने को है। इस भवन पर चार करोड़ 66 लाख रुपये की धनराशि खर्च हो रही है। लेकिन इस भवन पर अब पॉलिटैक्निक संस्थान संचालित नहीं होगा। इस पर अब महाविद्यालय संचालित करने की तैयारी है। 

जन अधिकार मंच के अध्यक्ष मोहित डिमरी ने कहा कि जखोली में पॉलिटैक्निक संस्थान के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर ढांचा तो खड़ा कर दिया गया है। लेकिन अब सरकार ने इसे बंद कर रही है। सस्ती लोकप्रियता के लिए इस तरह के संस्थान खोले जा रहे हैं, जिसका फायदा छात्रों को नहीं मिल रहा है। अगर सरकार सभी ट्रेडों में स्थायी शिक्षकों की तैनाती करती तो संस्थान बंद करने की नौबत नहीं आती। 

सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले से पॉलिटैक्निकों में पढ़ाने वाले करीब 250 संविदा शिक्षक बेरोजगारी की कगार पर पहुँच गए हैं। वहीं इन संस्थानों में सैकड़ों पद रिक्त हैं। सरकारी पॉलिटैक्निकों में व्याख्याताओं के सृजित 953 पदों में से 722 पद रिक्त हैं। प्रधानाचार्यों के 77 स्वीकृत पदों में से 62 पद रिक्त हैं। इन पदों पर शिक्षकों की तैनाती होती तो आज पॉलिटैक्निक संस्थानों को बंद करने की नौबत नहीं आती।

मोहित डिमरी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार की मंशा बंद हो चुके पॉलिटैक्निक के भवनों में डिग्री कॉलेज चलाने की है। हालांकि इन भवनों में डिग्री कॉलेज चल पाएंगे या नहीं, इस पर भी संशय बना है। जखोली में पॉलिटैक्निक संस्थान का भवन बनकर तैयार होने को है। इस पर चार करोड़ 66 लाख रुपये की धनराशि खर्च हो रही है। लेकिन अब इस पर पॉलिटैक्निक संस्थान संचालित नहीं होगा। यानी सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर ढांचा तो खड़ा कर रही है, लेकिन आधारभूत सुविधाएं नहीं जुटा रही है। सिर्फ लोकप्रियता हासिल करने के लिए मंत्री-मुख्यमंत्री इस तरह के संस्थानों की घोषणा तो कर देते हैं, लेकिन व्यवस्थाएं न होने से छात्र इन संस्थानों से मुंह मोड़ देते हैं और आखिर में सरकार इन संस्थानों पर ताला लगा देती है। 

जन अधिकार मंच के अध्यक्ष मोहित डिमरी ने जखोली के पॉलिटैक्निक संस्थान के अस्तित्व को बचाने के लिए सभी जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को आगे आने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि सरकार तकनीकी शिक्षा को खत्म करना चाहती है। सरकार की मनमानी बर्दाश्त नहीं कि जाएगी।
पॉलिटैक्निक संस्थान जखोली के अस्तित्व को बचाने के लिए आगे आएं जनप्रतिनिधि : मोहित डिमरी पॉलिटैक्निक संस्थान जखोली के अस्तित्व को बचाने के लिए आगे आएं जनप्रतिनिधि : मोहित डिमरी Reviewed by केदारखण्ड एक्सप्रेस on July 03, 2020 Rating: 5
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