दो राजधानी के मामले में हिमाचल प्रदेश का मॉडल रहा है विफल: मोहित डिमरी


दो राजधानी के मामले में हिमाचल प्रदेश का मॉडल रहा है विफल: मोहित डिमरी


  • कर्जे में डूबे प्रदेश में दो राजधानी औचित्यहीन

  • गैरसैण के स्थायी राजधानी बनने तक लड़ाई रहेगी जारी

-भूपेन्द्र भण्डारी/केदारखण्ड एक्सप्रेस 

बीती आठ जून को राज्यपाल ने गैरसैण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाये जाने पर मोहर लगा दी है। सरकार के इस फैसले का आंदोलनकारी विरोध कर रहे हैं। स्थायी राजधानी गैरसैण संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि गैरसैण के स्थायी राजधानी बनने तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी। 





स्थायी राजधानी गैरसैण संघर्ष समिति के अध्यक्ष मोहित डिमरी ने कहा कि सरकार ने उत्तराखंड की जनता को एक और राजधानी दे दी है। बल्कि इसे कर्जे में डूबे प्रदेश पर एक और बोझ कहना सही रहेगा। अब उत्तराखंड दो राजधानी वाला राज्य बन गया है। एक ऐसा राज्य जिसकी अपनी स्थायी राजधानी नहीं है और सरकार ने ग्रीष्मकाल और शीतकाल के नाम पर जनता के सिर पर दो राजधानी का बोझ डाल दिया है।  स्थायी राजधानी देहरादून है या गैरसैंण, इस सम्बंध में सरकार चुप्पी साधे हुए है। छोटे से प्रदेश में जो कर्जे में डूबा हुआ है, उसके साथ इससे बड़ा मजाक और क्या हो सकता है। सवाल इस बात का है कि क्या उत्तराखंड के लोग 13 जनपदों वाले छोटे से प्रदेश में दो-दो राजधानी का बोझ झेल पाएंगे।





मोहित डिमरी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में भी डेढ़ दशक पूर्व ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन राजधानी का प्रयोग हो चुका है। वहां तत्कालीन भाजपा की सरकार ने धर्मशाला को शीतकालीन राजधानी बनाया और बाद में कांग्रेस की सरकार ने विधानभवन बनाकर सत्र की शुरुआत की। सर्दियों में कुछ दिन के लिए चलती-फिरती सरकार धर्मशाला चली जाती है और विधानसभा का एक सत्र वहां कर लिया जाता है। लेकिन आज तक राजधानी के तौर पर एक बड़ी पहचान धर्मशाला को हासिल नहीं हो पाई है। ऊपर से सरकार पर खर्च का बोझ बढ़ गया है। एक तरह से देखें तो दो राजधानी के मामले में हिमाचल प्रदेश विफल मॉडल रहा है। इसी मॉडल को उत्तराखंड सरकार ने भी अपनाया है। 





उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन के दौरान कभी यह मांग नहीं उठी थी कि उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैण बनाई जाए। आंदोलनकारियों ने मुखरता के साथ गैरसैण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग की थी। सरकार ने गैरसैण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाकर शहीदों का अपमान किया है और राज्य की संघर्षशील जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है। हमारे लिये गैरसैंण हमेशा से ही राज्य के विकास के विकेन्द्रीकरण का मॉडल और पर्वतीय राज्य की परिकल्पना रहा है।





आंदोलनकारियों की मांग रही है कि पहले स्थायी राजधानी घोषित करो फिर उसके विकास की बात करो। जब गैरसैंण को राजधानी बनाने का विचार आया था तो उस समय ही इसके 50 किलोमीटर के क्षेत्र को विकसित करने और उसे एक पहाड़ी शिल्प का शहर बनाने की बात भी प्रमुखता से रखी गई थी। गैरसैंण को राजधानी बनाने की कल्पना करने वाले लोगों ने हमेशा उसे राज्य के विकास की अवधारणा के रूप में परिभाषित किया है। गैरसैंण के आलोक में पहाड़ के तमाम सवालों को देखने की कोशिश की है। आंदोलनकारियों के लिये गैरसैंण कोई पिकनिक स्पॉट नहीं है, उसमें हमारीे आंदोलनकारियों की शहादत का मर्म है। इस छोटे से राज्य में दो राजधानियां जनविरोधी विचार है। हमारी आज भी यही मांग है कि सरकार गैरसैण को स्थायी राजधानी घोषित करे। जब तक सरकार गैरसैण को स्थायी राजधानी घोषित नहीं कर देती, तब तक आंदोलनकारी ताकतें पूरी शिद्दत के साथ राजधानी की लड़ाई लड़ती रहेगी। 




दो राजधानी के मामले में हिमाचल प्रदेश का मॉडल रहा है विफल: मोहित डिमरी दो राजधानी के मामले में हिमाचल प्रदेश का मॉडल रहा है विफल: मोहित डिमरी Reviewed by केदारखण्ड एक्सप्रेस on June 10, 2020 Rating: 5
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