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Saturday, 13 June 2020

स्वास्थ्य परीक्षण करने को लेकर आशा कार्यकत्रियों ने किये हाथ खड़े, चिकित्साधिकारी को ज्ञापन भेजकर गिनाई समस्याएं


स्वास्थ्य परीक्षण करने को लेकर आशा कार्यकत्रियों ने किये हाथ खड़े, चिकित्साधिकारी को ज्ञापन भेजकर गिनाई समस्याएं

ब्यूरो  : केदारखण्ड एक्सप्रेस न्यूज़  

रुद्रप्रयाग। आशा कार्यकत्रियों ने थर्मामीटर से स्वास्थ्य परीक्षण करने और गृह भ्रमण सर्वे करने में असमर्थता जताई है। उन्होंने इसके लिए वेतनधारी कर्मचारियों को नियुक्त करने की मांग को है। इस संबंध में आशा कार्यकत्रियों ने चिकित्साधिकारी को भी पत्र भेजा है। 

आशा संगठन जखोली की सचिव बबीता भट्ट, कुसुम बर्तवाल, सरिता नेगी दीपा देवी, लक्ष्मी देवी, विजया देवी, आशा भंडारी, गीता सेवी, लता देवी ने चिकित्साधिकारी को भेजे पत्र में कहा कि आशा कार्यकत्री राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत गांवों में प्रोत्साहन राशि पर तैनात हैं। आशा न तो सरकारी कर्मचारी है और ना ही उसे कोई वेतन मिलता है। कोरोना जैसी महामारी के दौर में उनकी बिना सहमति के पहले तो सर्वे कराया गया और अब ग्राम निगरानी समिति के सदस्य के रूम में क्वारन्टीन सेंटरों में निगरानी का काम कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आशाओ के स्वास्थ्य की चिंता किसी को नहीं है। बाहरी राज्यों से घर आये युवाओं के स्वास्थ्य परीक्षण की जिम्मेवारी उनके कंधों पर है और ऐसे में आशा कार्यकत्री और उसका परिवार संक्रमित होता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। आशा कार्यकत्रियों ने एक स्वर में कहा कि वह अब क्वारन्टीन सेंटरों में स्वास्थ्य परीक्षण करने में असमर्थ हैं। इस जिम्मेदारी से उन्हें मुक्त किया जाय।

वहीं जन अधिकार मंच के अध्यक्ष मोहित डिमरी ने कहा कि उनका संगठन आशा कार्यकत्रियों के साथ खड़ा है। कोरोना महामारी में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कार्य करने वाली आशा कार्यकत्रियों की सुरक्षा होनी जरूरी है। लॉकडाउन में आशाएं कोरोना वॉरियर्स बनकर काम कर रही हैं। वह स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ बनी हुई हैं। फील्ड में स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पहुंचा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की जारी एडवाइजरी तहत कोरोना वायरस के बारे में जनजागरूकता अभियान चला रही हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने न तो इस कार्य के लिए आशाओं को कोई आकस्मिक फंड उपलब्ध कराया है और न ही कोई मानदेय या प्रोत्साहन राशि ही दी जा रही है। मोहित डिमरी ने कहा कि आशाएं इस संक्रमण की चपेट में आ जाएं तो उसका जिम्मेदार कौन होगा।