स्वास्थ्य: क्यूंँ आप ने भी सुना और देखा है बेडू या जंगली अंजीर (wild fig) ? जानिए इसके औषधीय गुण


 स्वास्थ्य: क्यूंँ आप ने भी सुना और देखा है बेडू या जंगली अंजीर (wild fig) ? जानिए इसके औषधीय गुण 

 -डा0 विजय कान्त पुरोहित,
हैप्रेक, हे0न0ब0ग0वि0वि0

बेडू मात्र जंगली,खाद्य फल (wild edible  fruit) ही नहीं अपितु पौष्टिक एवं  औषधि भी है।

बेडू के फल की खूबसूरती एवं बृक्ष के महत्व का प्रमाण यह गाना " बेडू पाका बारामासा........"भला किसने ना सुना हो और कौन ऐसा पहाडी़ या अन्य कोई हो जो इस गाने की धुन पे ना थिरका/नाचा हो।

तो फिर निरोगी काया की  माया बेडू क्यूँ आप से दूर।

आओ जाने क्यूँ  महत्वपूर्ण है बेडू?

उत्तराखंड देवों की भूमि के साथ ही प्राकृतिक संसाधनों खासकर जंगली खाद्य फलों (wild edibles) एवं औषधीय वनस्पतियों का खजाना माना गया है। इन खाद्य फलों एवं वनस्पतियों के ऊपर जहां एक ओर मानव स्वास्थ/जीवन की निर्भरता रही है वहीं दूसरी ओर ये वन्य जीवों के लिये भी हमेशा से भोजन का स्रोत रहे हैं। परन्तु वर्तमान में वैश्वीकरण के कारण लोगों के शहरों की ओर पलायन करने तथा नयी पीडी़ में इस प्रकार की सम्पदा के बारे में जानकारी के अभाव में इनका पौष्टिक, औषध एवं आर्थिक लाभ नहीं लिया जा पा रहा है। उत्तराखन्ड की इन्हीं महत्वपूर्ण प्राकृतिक सम्पदाओं के अन्तर्गत गढ़वाल तथा कुमांऊँ दोनों मन्डलों में एक बहुत ही प्रचलित जंगली खाद्य फल है बेडू । 





बेडू उत्तराखन्ड के मध्य हिमालयी क्षेत्रों में बंजरों, कृषि भूमि तथा घरों के आस पास प्राकृतिक रूप से 1800 मीटर तक की ऊँचाई पर पाया जाता है। बेडू का फल खूबसूरत होने के साथ ही लोगों को बहुत पसंद आने वाला फल है।  यह खाने में मीठा, कूछ कसैला तथा रसदार होता है। इसके समग्र फल की गुणवत्ता उत्कृष्ट मानी गयी है। उत्तराखन्ड के गढ़वाल तथा कुमाऊँ रीजन में बेडू के नाम से जाने जाने वाले इस फल को आंन्ध्रा में मनमजेडी, गुजराती में पीपरी, हिमाचल प्रदेश में पहेगरा, फागुरा, डगलो अंजिर, हिन्दी में बेडू, खेमारी। जौनसार में पेरू पंजाब में अन्जीर के नाम से जाना जाता है।बेडू में फूल मार्च-अप्रैल तथा फल जून-जुलाई में लग कर पकता है। बेडू बीज सहित संपूर्ण खाने योग्य फल होता है। माना जाता है कि बेडू के पत्ते जानवरों, खासकर दुधारू पशुओं के लिए काफी अच्छा चारा होता है। ऐसा माना जाता है कि बेडू के पत्ते दुधारू पशुओं को खिलाने से दूध में बढोतरी होती है|





बेडू फाईकस जीनस के अर्न्तगत आने वाला एक बहुमूल्य जंगली एवं स्वादिष्ट फल है। मोरेसी परिवार के इस पादप को  अंग्रजी में वाइल्ड फिग तथा वनस्पतिजगत में  फाइकस पालमेटा के नाम से  जाना जाता है। उत्तराखण्ड तथा अन्य कई अन्य राज्यों में बेडु को फल, सब्जी तथा औषधि के रुप में भी प्रयोग किया जाता है। उत्तराखन्ड में वर्तमान समय तक भी बेडू का किसी भी प्रकार का व्यावसायिक उत्पादन नहीं किया जाता है, अपितु बच्चों एवं गाय भेसों को चराने वाले  (चारावाहों) ग्रामीणों द्वारा इसके फलों को बड़े ही चाव से खाया जाता है। बेडू उत्तराखण्ड के अलावा पंजाब, कश्मीर, हिमाचल, नेपाल, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान, सोमानिया, इथीयोपिया तथा सुडान में भी पाया जाता है। विश्व में बेडु की लगभग 100 से अधिक प्रजातियां बतलायी गयी हैं।





जानकारों के अनुसार बेडु का सम्पूर्ण पौधा (छाल, जड़, पत्तियां, फल तथा चोप) ही औषधिय गुणों से भरपूर होता है, जिसके कारण यह कई बीमारियों के निवारण में यह सहायक माना गया है। बेडू को मूत्राशय रोग विकार में कारगर बतलाया गया है। बेडु के फलों में सर्वाधिक मात्रा में आर्गनिक मैटर होने के साथ-साथ एंटी औक्सीडेंन्ट गुण भी पाये जाते हैं। जिस कारण बेडू को तंत्रिका तंत्र विकार के साथ ही हिपेटिक बीमारियों के निवारण में भी उपयोगी माना गया है। वैज्ञानिक विश्लेषणों के आधार पर बेडू पौष्टिक एवं औषधीय दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण पौधा है। इसके सेवन से निरोगी शरीर रखा जा सकता है।





उत्तराखन्ड विज्ञान एवं प्रोद्मोगिकी कोंन्सिल के महानिदेशक, डा0 राजेन्द्र डोभाल द्वारा बेडू के ऊपर लिखे गये लेख में बतलाया गया है कि बेडू पारम्परिक रूप से उदर रोग, हाइपोग्लेसीमिया, टयूमर, अल्सर, मधुमेह तथा फंगस सक्रंमण के निवारण के लिये प्रयोग किया जाता रहा है। आयुर्वेद में बेडु के फल का गुदा (Pulp) कब्ज, फेफड़ों के विकार तथा मूत्राशय रोग विकार के निवारण में हेतु उपयोग किया जाता है।

शोधों के आधार पर बतलाया गया  है कि बेडु के फल में एल्कालायड, स्टीरायड्स, फ्लेभनायड्स, टेनिन्स, बीटा-सिट्सटीरोल के मौजूद होने के कारण एंटी औक्सीडेंन्ट, एंटी कोगुलेंन्ट तथा फेफडों एवं मूत्राशय रोग विकार के निवारण मे प्रयुक्त होता है। बेडु की छाल तथा पत्तियों में वीभिन्न रासायनिक तत्व पाये जाने के कारण यह नेफरो प्रोटेक्टिभ, एंटी डाइबिटिक,  एंटी माइक्रोबियल, तथा कार्डियो प्रोटेक्टिभ गुणों से परिपूर्ण होता है। शोध परिणामों के अनुसार बेडु में आडू़ तथा तिमला से अधिक फिनोलिक तथा फ्लेभोनोइड तत्व पाये जाते है जिसकी वजह से बेडु का ओक्सीडेटिभ स्ट्रेस को कम करने के लिये हर्बल फार्मास्यूटीकल में औद्योगिक रुप से प्रयोग किया जाता है।





बेडु के फल में डाइइथाइल फथलेट सक्रिय घटक होने की वजह से फार्मास्यूटीकल उद्योगों में अधिक मांग रहती है जो कि एंटी माइक्रोबियल एजेंन्ट के लिये प्रयुक्त होता है। फार्मास्यूटीकल उद्योगों के अलावा बेडु के पके फल का उपयोग जैम-जैली तथा स्क्वैस बनाने में भी किया जाता है। वैज्ञानिक  विश्लेषण के अनुसार बेडू के फल में प्रोटीन, फाईबर, वसा, कार्बोहाईड्रेट, सोडियम  कैल्शियम, पोटेशियम, फास्फोरस तथा सर्वाधिक ओर्गनिक मैटर पाये जाते है। बेडु के पके हुये फल में जूस,  नमी, घुलनशील तत्व तथा लगभग शुगर भी विभिन्न मात्राओं में पाया जाता है।





उत्तराखन्ड राज्य के परिप्रेक्ष में यदि बेडू का व्यवसायिक उत्पादन किया जाता है तो इसका विभिन्न खाद्य एवं फार्मास्यूटिकल उद्योग में उपयोग को देखते हुये स्वरोजगार के साथ-साथ बेहतर आर्थिकी का साधन बन सकता है। जानकार बताते हैं कि बेडू के पौधे की पत्तियों को तोड़ने पर निकलने वाले चोप (सफेद दूध जैसा पदार्थ, लेटैक्स) को हाथ पावं में चोट लगने पर लगाने से चोट में आराम मिलता है। साथ ही यह लैटेक्स स्किन टूय्मर तथा मार्ट के उपचार में भी उपयोगी बतलाया गया है। बेडू के स्वादिष्ट फल में मुख्य रूप से शर्करा और श्लेष्मा गुण होते हैं इसलिये बेडू का सेवन कब्ज की समस्या में भी काफी फायदेमंद मना गया है | बेडू का सेवन हाइ कलस्ट्रोल स्तर को कम करने में भी मददगार माना गया है।





बेडु के फलों में पाये जाने वाले कार्बनिक पदार्थ के साथ ही होने एंटीऑक्सीडेंट गुण पाये जाने के कारण यह तंत्रिका तंत्र विकार तथा जिगर की  बिमारियों के निवारण में भी प्रयुक्त किया जाता है। दमे की बिमारी में भी बेडू के सूखे फलों का सेवन लाभकारी माना गया है। इसके कच्चे रसीले अंकुरित फलों (नये नये फल) का उपयोग सब्जी के रूप में भी किया जाता है।   इसके फलों को  उबाला और फिर निचोड़ कर पानी निकाल देने के बाद जखिया का तड़का लगाने पर एक अच्छी हरी सब्जी तैयार की जाती है। जो शरीर की ताकत के साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढा़ने में महत्वपूर्ण मानी गयी है। 





यदि आप सहमत हों तो श्वस्थ एवं निरोगी शरीर के लिये अवश्य करें पके और सूखे हुये बेडू के फलों का सेवन। साथ ही बेडू के पौधों का रोपड़ बढा़ के पर्यावरणीय एवं आर्थिक दोनों लाभ कमायें।






स्वास्थ्य: क्यूंँ आप ने भी सुना और देखा है बेडू या जंगली अंजीर (wild fig) ? जानिए इसके औषधीय गुण स्वास्थ्य: क्यूंँ आप ने भी सुना और देखा है बेडू या जंगली अंजीर (wild fig) ? जानिए इसके औषधीय गुण Reviewed by केदारखण्ड एक्सप्रेस on May 30, 2020 Rating: 5
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