साढे 8 लाख पाठकों का भरोसा बना केदारखंड एक्सप्रेस न्यूज : चाटुकारिता से परे जनपक्षीय पत्रकारिता को दी तवज्जों।


साढे 8 लाख पाठकों का भरोसा बना केदारखंड एक्सप्रेस न्यूज : चाटुकारिता से परे जनपक्षीय पत्रकारिता को दी तवज्जों। 

कुलदीप राणा आज़ाद/ सम्पादक केदारखंड एक्सप्रेस 

लगातार जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को बडी बेबाकी, निडरता के साथ साथ पूरी सच्चाई, ईमानदारी और  जिम्मेदारी  के साथ प्रकाशित करने का ही नतीजा है कि केदारखंड एक्सप्रेस न्यूज 10 महिनों के अल्प समय में साढे 8 लाख पाठकों का भरोसा जितने में कामयाब रहा है। रूद्रप्रयाग जैसे छोटे जिले से राष्ट्रीय अखबारों, न्यूज़ चैनलों और कुकुरमुत्तों की तरह  हजारों न्यूज पोर्टलो  के बीच  केदारखंड एक्सप्रेस न्यूज आरंभ होकर बडी और सनसनीखेज़ खबरों को तवज्जों न देकर, केवल अपने आस-पास की उन तमाम  छोटी-छोटी समस्याओं को प्रकाशित करता रहा जिनसे आमजन का वास्तविक  सरोकार जुडा है। जिन समस्याओं  को कभी  दैनिक अखबारों और न्यूज चैनलों में स्थान ही नहीं मिलता था, उसी उपेक्षित, शोषित, दबे-कुचले पीडित वर्ग की आवाज को प्रमुखता से उठाने का भरसक प्रयास किया, जिसकी दर्द की चीखे न सत्ता के गलियारों तक पहुंचती थी और न प्रशासन की चौखट तक। केदारखंड एक्सप्रेस की इसी कोशिश से न केवल हमारी खबरों पर अधिकारिक  ध्यान आकृष्ट हुआ बल्कि उन पर कार्रवाई भी हुई और उस उपेक्षित वर्ग को न्याय भी मिला।





हमने केदारखंड एक्सप्रेस न्यूज की नींव जिस दृढ़ संकल्प के साथ रखी थी आज पाठकों के इस विश्वास ने हमें और अधिक मजबूती प्रदान की है। चाटुकारिता से परे जनपक्षीय पत्रकारिता के मापदंडों और उसके नैतिक मूल्यों पर खरे उतरने का संकल्प लिए केदारखंड एक्सप्रेस ने  इन 10 महिनों में बहुत कुछ ऐसे अनुभव भी लिए हैं जब जनता की हक की इस लडाई में केदारखंड एक्सप्रेस को अनेक प्रकार से डराने-धमकाने और कानून  के प्रपंचों में फंसाने का प्रयास किया गया। लेकिन केदारखंड एक्सप्रेस न डरा है न डिगा है और न जनता की आवाज उठाने में कभी कमी की है। हमारा लक्ष्य, हमारा उद्देश्य केवल और केवल जनता की परेशानियों को शासन- प्रशासन तक पहुँचाना है, सरकारी व्यवस्था में व्याप्त खामियों को उजागर करना है। भ्रष्टाचार और निरंकुशता पर लगाम लगाना है।





दरअसल पहाड़ पहले से ही घोर उपेक्षा का शिकार होता आया है। एक लम्बे जन आन्दोलन और दर्जनों शहादतो के फलस्वरूप अविभाजित उत्तर प्रदेश से अलग होकर  उत्तराखंड राज्य जब अस्तित्व में आया था तो पहाड़वासियो ने सोचा था बस अब सबकुछ ठीक हो जायेगा। सडक, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोज़गार जैसे मुद्दों के लिए जिस अलग पर्वतीय राज्य की मांग की गई थी वह राज्य गठन के दो दशकों में भी पहाड़ी जिलों में हाशिये पर है। स्वास्थ्य शिक्षा और रोज़गार की स्थिति तो सबसे बदहाल है। इसकी वजह कमजोर राजनीतिक  नेतृत्व तो है ही बल्कि भ्रष्ट प्रशासनिक व्यवस्था भी रही है। पर्वतीय जिलों में अधिकारी  बस विकास कार्यों को धरातल पर उतारने की बजाय भ्रष्टाचार मे लिप्त रहते हैं। अखबारों न्यूज़ चैनलों के पत्रकार आज  इन सच्चाइयों को दिखाने की बजाय मोटे विज्ञापन की मलाई में अपने पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों का पतन कर रहे हैं। कोई जिम्मेदार पत्रकार अगर कभी भ्रष्टाचार के खिलाफ कलम के जोर पर इस स्थिति के खिलाफ आवाज भी उठाता है तो मीडिया घरानों में बैठे अजगर इसका दमन कर देते हैं। ऐसे में केदारखण्ड एक्सप्रेस जैसे निर्भिक न्यूज़ पोर्टल  जनता की आवाज़ बनकर नव चेतना का संचार करता है जिसके प्रति लोगों का लगातार भरोसा बढता जा रहा है।





आप सभी पाठकों, शुभचिंतकों का इतना प्यार और स्नेह देने के लिए केदारखण्ड एक्सप्रेस न्यूज़ परिवार आप सभी का आभार और धन्यवाद ज्ञापित करते हैं और  भरोसा दिलाते हैं कि केदारखण्ड एक्सप्रेस अन्याय, उत्पीड़न, विषमता भ्रष्टाचार  के खिलाफ हमेशा अपनी कलम की धार को हथियार की तरह स्तेमाल करेगा।




साढे 8 लाख पाठकों का भरोसा बना केदारखंड एक्सप्रेस न्यूज : चाटुकारिता से परे जनपक्षीय पत्रकारिता को दी तवज्जों। साढे 8 लाख पाठकों का भरोसा बना केदारखंड एक्सप्रेस न्यूज : चाटुकारिता से परे जनपक्षीय पत्रकारिता को दी तवज्जों। Reviewed by केदारखण्ड एक्सप्रेस on May 24, 2020 Rating: 5
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