अवैध रूप से बिक रही शराब के खिलाफ़ आवाज उठी तो जागा प्रशासन, "जब चिड़िया चुग गई खेत, तब कार्रवाई करता है जिला प्रशासन


अवैध रूप से बिक रही शराब के खिलाफ़ आवाज उठी तो जागा प्रशासन, "जब चिड़िया चुग गई खेत, तब कार्रवाई करता है जिला प्रशासन
-कुलदीप राणा आज़ाद/केदारखंड एक्सप्रेस 
रूद्रप्रयाग। जब कोरोना वायरस के चलते सम्पूर्ण देश में लाकडाउन चल रहा है तो रूद्रप्रयाग जनपद की विडम्बना देखिये कि इस अवधि में आबकारी विभाग की शह पर यहाँ धडल्ले से शराब बेची जा रही है। गजब की बात तो ये है कि जरा सा
लाकडाउन  को तोडने पर जो पुलिस और प्रशासन के नुमाइंदे भूचाल मचा देते हैं उन्हें भी शराब का यह कारोबार खुला नजर नहीं आया, और जब जनप्रतिनिधियों ने आवाज उठाई तो आबकारी विभाग अपनी गलतियों पर लिपापोती करता हुआ नजर आ रहा है। और यह कहकर अपने कर्तव्य की इतिश्री  कर रहा है  कि विधायक जी की शिकायत के बाद मौके पर पहुचे प्रशासन को कुछ नही मिला, सभी शराब की दुकानें सील की गई है। जबकि जिलाधिकारी तक अब जाकर शराब बिकने की खबर पहुंच रही है।
जब चिडियाँ चुग गई खेत फिर कैसी कार्रवाई यह तो समझ से परे है, लेकिन यह इस बात की ओर इशारा कर रहा कि शराब व्यवसायियों के इतने बुलंद हौसले बिना  आबकारी विभाग से मिलीभगत के नहीं हो सकते।
दरअसल जिलाधिकारी  मंगेश घिल्डियाल आज उपजिलाधिकारी को एक आदेश  जारी किया है जिसमें उन्होंने लिखा है कि जनप्रतिनिधियों द्वारा अवगत कराया गया है कि लॉक डाउन की अवधि में कतिपय शराब व्यवसायियों द्वारा अनाधिकृत रूप से दुकान खोलकर शराब की बिक्री की जा रही है। इसका संज्ञान लेते हुए जिला मजिस्ट्रेट मंगेश घिलड़ियाल ने समस्त उप जिला मजिस्ट्रेट व जिला आबकारी अधिकारी को 3 दिन के भीतर लॉक डाउन अवधि में जनपद में खोली गई शराब की दुकानों की जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए है। जिला मजिस्ट्रेट ने बताया  कि भविष्य में कोरोना संक्रमण की संभावना से इंकार नही किया जा सकता इसलिये सभी शराब की दुकान को बंद रखने के निर्देश दिए गए थे।
आपको बताते चले कि बीते दिनों  केदारनाथ विधायक मनोज रावत कुंड से वापस अगस्त्यमुनि आ रहे थे, जैसे ही उनका वाहन काकड़ागाड़ की शराब की दुकान के पास से गुजर रहा था तो उन्होंने  लॉकडाउन के बावजूद वहाँ  शराब की दुकान में भारी भीड़ लगी हुई देखी। विधायक ने इसकी सूचना प्रशासन के अधिकारियों, आबकारी विभाग के अधिकारियों व पुलिस को दी तब जाकर प्रशासन मौके पर पहुचा, जिसके बाद कई लोग भागते हुए नजर आए।
अब सवाल यह उठता है कि अगर विधायक मनोज रावत वहाँ से ना गुजरे होते क्या प्रशासन, पुलिस और आबकारी विभाग इसे ऐसे ही नजरअंदाज कर कोरोना वायरस का संक्रमण का खतरा बढाता रहता? और इस अवधि में जो सामाजिक दूरियों का उलंघन किया गया अगर इससे कोरोना का संक्रमण हो गया तो इसकी भरपाई कौन करेगा? सवाल यह भी अहम है कि क्या शराब की दुकानें लॉकडाउन के पहले ही दिन नियमानुसार सील नहीं की जानी चाहिए थी? लेकिन दुकानों को सील न किया जाना जिला के उच्चाधिकारियों  को सवालों के घेरे में खडा करता है। 
लोगों का आरोप यह भी है कि लाकडाउन में गांव-गांव से उन्हें लगातार शराब बिक्री की शिकायत आ रही हैं ऐसे में ये शराब आखिर कहां से गांव गांव पहुच रही है, यह भी विचारणीय प्रश्न है। यह बात कहना भी गलत नहीं होगी कि इन दिनों आम आदमी गलती करता है तो आईपीसी की धारा 188 लगा दी जाती है लेकिन बेपरवाह सरकारी कर्मचारी अधिकारियों पर यह कार्यवाही होती है या नहीं?
अवैध रूप से बिक रही शराब के खिलाफ़ आवाज उठी तो जागा प्रशासन, "जब चिड़िया चुग गई खेत, तब कार्रवाई करता है जिला प्रशासन अवैध रूप से बिक रही शराब के खिलाफ़ आवाज उठी तो जागा प्रशासन, "जब चिड़िया चुग गई खेत, तब कार्रवाई करता है जिला प्रशासन Reviewed by केदारखण्ड एक्सप्रेस on April 11, 2020 Rating: 5
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