रुद्रप्रयाग के इस युवा ने लिखा प्रधानमंत्री को खत, बाहरी राज्यों में फंसे लोगों को घर पहुँचाने की लगाई गुहार


रुद्रप्रयाग के इस युवा ने लिखा प्रधानमंत्री को खत, बाहरी राज्यों में फंसे लोगों को घर पहुँचाने की लगाई गुहार 
एक खत पीएम मोदी जी के नाम

भला उसकी जान कीमती, पर मेरी जान सस्ती क्यों ?

वो देश के भावी नागरिक, लेकिन परिवार का बोझ मेरे सिर पर भी

लाॅकडाउन में फंसे लोगों को वापस उनके गांव तक भिजवाए सरकार

आदरणीय मोदी जी,
कोरोना महामारी के संकट के इस काल में आज प्रदेशों की सरकारें दोहरी नीतियां अपना रही हैं। कोटा में फंसे छात्रों को लाने के लिए यूपी और उत्तराखंड को अनुमति मिल जाती है, यह सराहनीय काम है। इसका विरोध नहीं है, लेकिन उन युवाओं का क्या, जो लॉकडाउन में विभिन्न प्रदेशों में फंसे हैं और अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पिछले एक माह से रास्तों में फंसे इन युवाओं की सुध कौन ले रहा है सरकार ? ठीक है कि बच्चे इस देश का भविष्य हैं, उनकी जान बचाना भी जरूरी है लेकिन अपनों से दूर रह कर परिवार का बोझ संभालने वाले युवाओं की जान भी तो कम कीमती नहीं है ? आखिर लाॅकडाउन में फंसे लोगों को निकालने को लेकर नीति क्यों नहीं ? सरकारें गंभीर क्यों नहीं ?
मोदी जी, आपने 2017 में श्रीनगर गढ़वाल में कहा था, कि पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी यहीं के काम आएगी। लेकिन पिछले तीन साल में ऐसा कुछ भी नहीं किया। डबल इंजन की सरकार पहाड़ से पलायन रोकने में पूरी तरह से नाकाम रही है। सारा दोष आपकी सरकार को ही नहीं दे रहे हैं, लेकिन उत्तराखंड राज्य गठन की मूल अवधारणा तो यही थी कि पहाड़ के सीमांत गांव के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास की किरणें पहुंचे। काश! ऐसा हो पाता। आपकी त्रिवेंद्र सरकार ने इस दिशा में कोई पहल नहीं की।
खैर, मैं आपसे यह अनुरोध करना चाहता हूं कि भला उसकी जान मेरी जान से कीमती क्यों ? आज उत्तराखंड के हजारों युवा विभिन्न प्रदेशों में फंसे हुए हैं। रोजगार की तलाश में ये लोग अपना गांव और अपनों को छोड़कर मैदानों की ओर गये। इन युवाओं का जीवन संघर्ष बेहतर दुनिया की चाह में हमेशा ही रहा है क्योंकि अपनों से दूर रहने का दंश इन्हें हमेशा झेलना पड़ा है। मोदी जी, इनमें से अधिकांश लोग अपने परिवार के इकलौते कमाऊ पूत हैं। एक परिवार के कम से कम चार सदस्य इन पर्वत पुत्रों पर आश्रित हैं। परिवार का हर संकट ये पर्वत पुत्र दूर करते हैं लेकिन आज जब इन पर्वत पुत्रों पर संकट आया है तो न तो परिवार की ही मदद इन तक पहुंच रही है और न ही सरकारी। क्या लाॅकडाउन में फंसे लोगों को निकालने के लिए प्रयास नहीं होने चाहिए ? क्या उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग के तहत वापस नहीं पहुंचाया जा सकता। भले ही उन्हें गांव या कस्बे में आने पर क्वारंटीन कर दिया जाय, लेकिन वो अपने गांव, अपने प्रदेश तो पहुंचे ? हमने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत जी को भी बाहरी प्रदेशों में फंसे लोगों को सुरक्षित घर पहुँचाने के लिए चिट्ठी भेजी है। लेकिन अभी तक कारवाई नहीं हुई है। जिसका हमें खेद है। 
मोदी जी, आपसे अनुरोध है कि सरकारों को आदेश दें कि संकट की इस घड़ी में आदमी और आदमी के बीच अंतर न किया जाय। क्योंकि हर जान कीमती है और जान है तो जहान है।

आदर सहित

मोहित डिमरी
अध्यक्ष
जन अधिकार मंच रुद्रप्रयाग
(9897248163)
रुद्रप्रयाग के इस युवा ने लिखा प्रधानमंत्री को खत, बाहरी राज्यों में फंसे लोगों को घर पहुँचाने की लगाई गुहार रुद्रप्रयाग के इस युवा ने लिखा प्रधानमंत्री को खत, बाहरी राज्यों में फंसे लोगों को घर पहुँचाने की लगाई गुहार Reviewed by केदारखण्ड एक्सप्रेस on April 25, 2020 Rating: 5
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