छ: दशक बाद भी आधारभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा सीमांत चमोली जिला

छ: दशक बाद भी आधारभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा सीमांत चमोली जिला

-नीरज कण्ङारी/केदारखंड एक्सप्रेस
चमोली। 1960 को आज ही के दिन चमोली और उत्तरकाशी दो जिलों का जन्म हुआ था। लेकिन 60 वीं बर्षगांठ मना रहे ये सीमान्त जिले आज भी विकास के नाम पर पिछड़े हुए हैं। एक जिला उत्तरकाशी विकास की शून्यता इतनी कि लोग इस क्षेत्र को ही पिछड़ा घोषित करने की मांग को लेकर आन्दोलनरत हैं तो दूसरा चमोली जिला  भी  छ: दशक बाद भी आधारभूत सुुविधाओं के लिए  सघर्ष कर रहा हैं।

विकास के नाम पर चमोली जिला एक अत्यंत पिछड़ा हुआ जिला है। कई विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल और पर्यटन क्षेत्र होने के बावजूद भी विकास के नाम पर शून्यता वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है। विकास की अनदेखी होते देख लोग पलायन के लिए मजबूर हैं।
तत्कालीन यूपी सरकार और अब  उत्तराखंड सरकार में यहाँ के कई नेताओं ने इस क्षेत्र का नेतृत्व किया लेकिन विकास पहले से घटता चला गया। यहाँ के कई चुनिन्दा निदेशालय जो पहले थे यहाँ से विस्थापित कर दिये गए। रेशम निदेशालय, S.S.B. प्रसिक्षण सेंटर, A.N.M. प्रशिक्षण सेंटर, पशुपालन निदेशालय, भेड़ प्रजनन केन्द्र, कस्तूरी मृग प्रजनन केन्द्र मत्स्य निदेशालय सभी उपेक्षा के शिकार यहाँ से बदल दिए गये... विश्व प्रसिद्ध औली, जड़ी बूटी निदेशालय, राज्य का पहला विधि विवि० भी इसी तरह उपेक्षित हैं...
चमोली जिले के कुछ प्रमुख स्थल:

  1. - हिंदुओं का प्रमुख तीर्थ स्थल बद्रीनाथ सहित पञ्च बदरी  

- विश्व प्रसिद्ध हिमक्रीडा स्थल औली
- पंच केदारों में से रुद्रनाथ, कल्पनाथ
- हिमालयी महाकुम्भ नंदा देवी राज जात यात्रा का स्थल नौटी
- उत्तराखंड की भावी राजधानी गैरसैंण
- पञ्च प्रयागों में से विष्णुप्रयाग, नन्दप्रयाग, कर्णप्रयाग
आदि कई महत्वपूर्ण एवं धार्मिक स्थल होते हुए भी चमोली जिला विकास और पर्यटन के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ 
छ: दशक बाद भी आधारभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा सीमांत चमोली जिला छ: दशक बाद भी आधारभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा सीमांत चमोली जिला Reviewed by केदारखण्ड एक्सप्रेस on February 24, 2020 Rating: 5
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