जिस देश कीमहिला सड़कों पर उस देश का आलम क्या होगा, ये कैसी तानाशाही है महिला सड़क परआई है

जिस देश की महिला सड़कों पर उस देश का आलम क्या होगा, ये कैसी तानाशाही है महिला सड़क परआई है 


-कुलदीपराणा ‘आजाद’/केदारखंड एक्सप्रेस 


जिस देश की महिला सड़कों पर,
उस देश का आलम क्या होगा। 
ये कैसी तानाशाही है महिला सड़क पर आई है। 
नहीं डरेंगे हुड़की से, खींच लेंगे कुर्सी से
दम है कितने दमने में तेरे देखा है और देखेंगे।
जगह है कितने जेल में तेरी, देखा है और देखेंगे।
एक दो तीन चार,नहीं चलेगी ये सरकार। 
रावत तेरे शासन में, कीड़े पड़ गए राशन में।  


इन नारों केआगे पहाड़ों में हाड़ कपाती शीतलहर भी गर्म नजर आ रही है। महिलाओं काआक्रोश दिन प्रतिदिन उग्र होता जा रहा है। जिन महिला आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों केभरोसे भविष्य के कर्णधारों की नींव रखने का जिम्मा है, वे पिछले चालीस दिनोंसे अपने अधिकारों के आन्दोलन कर रहे हैं। लेकिन जिस सालीनता से वे अब आन्दोलनरतथे उस पर सरकार चुप्पी और उदासीनता इन महिलाओं के सब्र को ललकार रहे हैं। ऐसे में आन्दोलन की यह चिंगारी ज्वाला बनकर सड़कों पर उग्र प्रदर्शन के लिए तैयार है। 

रूद्रप्रयाग जनपद के तीनों विकासखण्डों में पिछले चालीस दिनों से आँगनबाड़ी व मिनी कार्यकत्रियांँ सम्मानजनक मासिक वेतन समेत छः सूत्रीय मांगों को लेकर कार्यबहिष्कार पर हैं। आँगनबाड़ी सेविकाओं का साफ तौर पर कहना है कि जितना कार्य उनसे करवाया जा रहा है उसके हिसाब से उनका मानदेय एक दैनिक मजदूरी करने वाले से भी तीन गुना कम है। जिस देशऔर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की बड़ी बड़ी बातें होती वहां महिलाओं के साथ ऐसा भेदभाव सरकार की कथनी और करनी को स्पष्ट दर्शाती है। आंगनबाड़ीकार्यकत्रियों के इस आन्दोलन को सत्तापक्ष को छोड़कर जनपद के सभी सामाजिक,राजनीतिक संगठनों द्वारा समर्थन दिया जा रहा है। हालांकि रूद्रप्रयाग के दोनोंविधायकों द्वारा इन सेविकाओं के आन्दोलन को अब तक नजरअंदाज किया गया है। जनप्रतिनिधियोंकी इस उदासीनता को लेकर भी आगनबाड़ी कार्यकत्रियां आक्रोशित हैं। सेविकाओं कासाफ तौर पर कहना है कि अगर इस बीच रूद्रप्रयाग के विधायक भरत सिंह चैधरी धरनास्थल पर नहीं पहुंचते हैं तो आने वाले 27 जनवरी को रूद्रप्रयाग में विधायक केकार्यालय तक महारैली निकालकर आक्रोश व्यक्त किया जायेगा।

   काम ज्यादा और दाम कम 

दरअसलआँगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मुख्य कार्य छ वर्ष के बच्चों को स्कूल से पूर्व व्यावहारिकज्ञान की तालिम देना है। 7 माह से 3 वर्ष के बच्चों को पूरक पोषाहार देना, उनकेमासिक वजन की रिपोर्ट बनाना, कुपोषित बच्चों की देखभाल करने के आलावा गर्भवतीमहिलाओं की देखभाल करना है। इसके लिए उन्हें मासिक मानदेय के रूप में छ हजाररूपया दिया जाता है। लेकिन जिला प्रशासन से लेकर सरकार की कई अन्य योजनाओं  और कार्यों का सम्पादन भी इन्हीं कार्यकत्रियोंके जिम्मा सौंपा गया है। टीकाकरण में भागीदारी, पल्स पोलियों का कार्य, मुख्यनिर्वाचन का कार्य, जनगणना, पशु गणना, पचायती चुनावों में ड्यूटी, कुपोषणको हटाने सहित कई अन्य कार्य इन्हीं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा किए जा रहे हैं।ऐसे में साफ है कि जितना ज्यादा काम इनके कंधों पर है उसका वाजिब दाम इन्हें नहीं दिया जा रहा है। 

  आँगनबाड़ीकार्यकत्रियों के हड़ताल पर जाने से व्यवस्थाएं उतरी पटरी से

 पिछले चालीसदिनों से अपनी छः सूत्रीय मागों को लेकर आँगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा किए जा रहेकार्यबहिष्कार के कारण इन से जुड़ी व्यवस्थाएं चरमर्रा गई है। गर्भवती धात्रीमहिलाओं के स्वास्थ्य के साथ ही शिशुओं के पोषाहार योजना ठप्प पड़ी हुई हैंवहीं छोटे बच्चों की व्यावहारिक ज्ञान की पाठशाला भी बंद है। हाल ही में चले पल्सपोलियों अभियान जहां पूरी तरह से फेल रहा वहीं अन्य व्यवस्थाएं इनके जिम्मे थी वेभी पूरी तरह से पटरी से उतर गई हैं। आँगनबाड़ी कार्यकत्रियां अपनी मांगों पर अड़ीहुई हैं और जब तक सरकार उनकी मांगे नहीं मानती तब तक वे आन्दोलनरत रहने कोसंकल्पित हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में हालात और खराब होंगे इससे इनकारनहीं किया जा सकता है। सरकार को चाहिए कि वे शीघ्र ही आँनबाड़ी कार्यकत्रियों कीमांगों पर सकारात्मक निर्णय लें।   अब अध्यक्षकरवायेंगे नगर पंचायत पोखरी ँकी जाँच, कहा भारी गड़बड़झाला है नगर पंचायत केअन्दर  पोखरी नगरपंचायत के भीतर अन्दरूनी कलह जब तब सड़क पर आ जाती है। पिछले दिनों जहाँ अध्यक्षलक्ष्मी प्रसाद पंत और अधिशासी अधिकारी नंद राम तिवारी के बीच का विवाद सार्वजनिकहो गया था वहीं इस बार पर्यावरण मित्रों ने अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोला।हालांकि पर्यावरण मित्रों के एक दिन के हड़ताल के बाद सुलह हो गई है। लेकिन इससब के बीच अब  नगर पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मी प्रसादपंत ने नगर पंचायत के कार्यों पर जाँच करवाने की बात कहीं है। मीडिया से बातकरते हुए नगर पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मी प्रसाद पंत ने नगर पंचायत के कार्यों पर ही गम्भीरसवाल खड़े कर दिए।  पहले समझनेकी कोशिस करते हैं कि आखिर पिछले दो सालों क्यों पोखरी नगर पंचायत केभीतर विवादों की स्थिति पैदा हो रही है।  
जिस देश कीमहिला सड़कों पर उस देश का आलम क्या होगा, ये कैसी तानाशाही है महिला सड़क परआई है जिस देश कीमहिला सड़कों पर उस देश का आलम क्या होगा, ये कैसी तानाशाही है महिला सड़क परआई है Reviewed by केदारखण्ड एक्सप्रेस on January 21, 2020 Rating: 5
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