97 गांव अब भी सड़क मार्ग से वंचित वन विभाग बन रहा सबसे बड़ा रोड़ा

97 गांव अब भी सड़क मार्ग से वंचित वन विभाग बन रहा सबसे बड़ा रोड़ा

डैक्स केदारखंड एक्सप्रेस
उत्तराखण्ड राज्य गठन के 19 वर्ष बाद भी रूद्रप्रयाग जनपद में 97 ऐसे गाँव हैं जो सड़क मार्ग से वंचित हैं। हालांकि इन 97 गाँवों में से 82 सड़कों को स्वीकृति मिली चुकी है।



उत्तराखंड में ऑलवेदर जैसी परियोजना की भेंट भले ही  हजारों पेड़ चढ़ जाए लेकिन यहां के गांव को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए चुनिंदा पेड़ों को काटने के लिए वन विभाग सालों तक रोड़ा बना रहता  है ऐसे में जहां क्षेत्र का विकास का पहिया ठप पड़ा हुआ है वही ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों को लाने में भारी तकलीफों का सामना करना पड़ता है जबकि देश दुनिया की मुख्यधारा से ना जुड़ने का सपना ग्रामीणों को अलग थलग कर देता है।

दरअसल जनपद के 653 राजस्व गाँवों के सापेक्ष 556 गाँव सड़क मार्ग से जुड़ चुके हैं। शेष गाँवों के लिए विभिन्न प्रपोजल शासन को भेजा गया है लेकिन वन विभाग द्वारा अनुमति दिए जाने से ये गाँव लम्बे समय से सड़क की बांट जोह रहे हैं। इनमें से सबसे अधिक कठिनाई गौड़ारा, छौडा, खेड़ी, क्वेफड़ जैसे गाँवों को हो रही है जहां 6-8 किमी तक पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता  इन्द्रजीत बोस ने कहा कि अब 15 गाँव ऐसे हैं जहाँ अभी तक सड़क की स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
97 गांव अब भी सड़क मार्ग से वंचित वन विभाग बन रहा सबसे बड़ा रोड़ा 97 गांव अब भी सड़क मार्ग से वंचित वन विभाग बन रहा सबसे बड़ा रोड़ा Reviewed by केदारखण्ड एक्सप्रेस on January 12, 2020 Rating: 5
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