इंटर काॅलेज उड़ामांडा की 1975 से अब तक नहीं हुई मरम्मत, न भवन न शिक्षक , कैसे पढ़ेगे नौनिहाल


इंटर काॅलेज उड़ामांडा की 1975 से अब तक नहीं हुई मरम्मत, न भवन न शिक्षक , कैसे पढ़ेगे नौनिहाल

-नीरज कण्डारी/केदारखण्ड एक्सप्रेस
पोखरी। प्रदेश में सरकारी शिक्षा की बदहाली कम होने का नाम नहीं ले रही है। कहीं अध्यापकों की कमी से नौनिहालों का भविष्य चैपट हो रहा तो कहीं जर्जर भवनों के नीचे छात्रों का जीवन दांव पर लगा है। ऐसे में सरकारी विद्यालयों से अभिभावक अपने पाल्यों को अन्यंत्र शिफ्ट न करें तो और क्या करें! 

चमोली जनपद के विकासखंड पोखरी के राजकीय इंटर काॅलेज उड़ामांडा का विद्यालय भवन इस कदर जर्जर स्थिति में पहुंच गया है कि यह की भी ढहकर किसी बड़े हादसे को जन्म दे सकता है। यह वहीं विद्यालय है जहाँ प्रकृति के चितरे कवि चन्द्रकँुवर बत्र्वाल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की थी। चन्द्र कुँवर बत्र्वाल की महान साहित्य को संजोने और उनकी कविताओं को पाठ्यक्रम में शमलित करने के लिए सरकारों ने सौंतेला व्यवहार किया है उतना ही उनकी धरोहरों को संजोने में जबकि सर्वविधित है की चन्द्रकुंवर की कवितायें पंत, निराला सहित राष्ट्रय स्तर के कवियों की बराबरी करती हैं। लिहाजा इंटर काॅलेज उड़ामांडा भी बदहाली का दंश झेल रहा है। 

आपको बताते चले कि उड़ामांडा राजकीय इंटर काॅलेज 1975 में प्रख्यात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मानसिंह रावत और उनके सहयोगी सुरेन्द्र सिंह रावत ने सिमतोली, सिनाऊं, कांडई खोल सहित चार गाँवों ने श्रमदान के माध्यम से जूनियर हाईस्कूल के रूप में इस विद्यालय की स्थापना की थी। उस दौर में यह दर्जनों गाँवों का शिक्षा का केन्द्र था। वर्ष 1985 में यह विद्यालय हाईस्कूल के रूप में उच्चीकृत हुआ। 2005 में हाईस्कूल से इण्टरमीडिएट के रूप में यह उच्चीकृत हुआ लेकिन विद्यालय अलग-अलग फार्मेटों में बदलता तो रहा है लेकिन अपने संसाधनों के नाम पर विद्यालय को अपना मुख्य भवन तक नसीब नहीं हुआ। आज भी इस विद्यालय में 160 छात्र-छात्रायें पढ़ती हैं। लेकिन करीब पांच दशक बीत जाने के बाद भी हुक्कमरानों ने इस विद्यालय की सुध नहीं ली, उधर इस विद्यालय में महत्वपूर्ण विषय गणित, अर्थशास्त्र, रसायन विज्ञान, अंग्रेजी के प्रवक्ताओं के पद भी रिक्त चल रहे हैं, ऐसे में छात्रों का जीवन और भविष्य दोनों दांव पर हैं। 
राजकीय इंटर काॅजेज उड़ामाण्डा में तैनात अध्यापकों और विद्यालय अभिभावक संघ द्वारा शिक्षा विभाग के अधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर शासन स्तर पर कई पर लिखित पत्राचार और मौखिक रूप से कार्यावाही कर दी है बावजूद जिम्मेदारों की कुमकरणीय नींद टूटने को तैयार नहीं है। 
शिक्षा के नाम पर हर साल भारी भरकम बजट खर्च करने वाली सरकारें आखिर उस बजट को कहां ठिकाने लगाती है यह एक गम्भीर विषय है क्योंकि पर्वतीय क्षेत्रों के अधिकतर विद्यालय संसाधनों और अध्यापकों के अभाव में बंदी के कगार पर खड़े हैं जबकि प्राथमिक स्तर पर सैकड़ों विद्यालय प्रति वर्ष बंद हो जाते हैं। सरकारों को चाहिए कि इन जीर्ण-शीर्णा विद्यालयों की सुध ले ताकि पहाड़ के लोग शिक्षा के लिए मैदानों की दौड़ न लगाए। 



इंटर काॅलेज उड़ामांडा की 1975 से अब तक नहीं हुई मरम्मत, न भवन न शिक्षक , कैसे पढ़ेगे नौनिहाल इंटर काॅलेज उड़ामांडा की 1975 से अब तक नहीं हुई मरम्मत, न भवन न शिक्षक , कैसे पढ़ेगे नौनिहाल Reviewed by केदारखण्ड एक्सप्रेस on January 02, 2020 Rating: 5
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