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Monday, 9 December 2019

ऐ सरकार! हमें जीने दो.....पहाड़ में जंगली जानवरों का जंगल राज

ऐ सरकार! हमें जीने दो.....पहाड़ में जंगली जानवरों का जंगल राज

-दीपक निःशब्द /पत्रकार 
रूद्रप्रयाग। राज्य बनने के बाद संरक्षण के नाम पर पहाड़ के जंगलो में छोड़े गये सैकड़ो बंदर, भालू और बाघो से पहाड़वासियो की जिदंगी डर और खौफ के साये में जी रही है। रूद्रप्रयाग की भरदार पट्टी और पौड़ी के देवकुडंई गाँव में आदमखोर सक्रिय होकर बच्चो महिलाओ को मार रहा है तो रूद्रप्रयाग की रानीगढ पट्टी के दर्जनो गाँवो में जंगली भालू ने 40 से अधिक पालतू मवेशियो को अपना शिकार बना लिया है। तो बंदरो की बड़े बड़े झुण्ड पहाड़ के गाँव बाजारो में लोगो पर अनगिनत हमले कर चुके है। जिनसे चोटिल होने वाले हर आयु वर्ग के है। अब सवाल है कि पहाड़ में जानवरो के हमलो बेतहाशा क्यो बढ रहे है। उनका एकाएक खूंखार और आदमखोर होना क्यो बढा है। 
दरसल राज्य बनने के बाद संरक्षण के नाम पर गुपचुप तरीके से जंगली जानवरो की बड़ी खेप पहाड़ो में छोड़ी गयी है। हरिद्वार कुंभ इसका ताजा उदाहरण है जहाँ से हजारो की संख्या में बिगड़ैल बंदरो को पहाड़ के कोनो में छोड़ा गया था। आशंका है देश में बाघो की बड़ती आबादी को भी उत्तराखण्ड के पहाड़ो में संरक्षण के नाम पर छोड़ा गया है जो अब आदमखोर बनते जा रहे है। यही हाल जंगली भालूओ का भी है। लेकिन उत्तराखण्ड की सरकार के लिऐ जानवरो की चिन्ता तो है लेकिन गाँवो में बचे खुचे लोगो की सुरक्षा की चिन्ता नही।  माननीयो उस परिवार का दर्द भी समझये जिसने अपना नौनिहाल खो दिया, अपनी पत्नी खो दी। वो बुजुर्ग जो अब भी गाँवो को गुलजार रखे है उनकी भी सोचिऐ वो हमलो से चोटिल है, इस उम्र में उनकी पीड़ा को और न बड़ाईये। ऐसी सैकड़ो घटनाऐ हो चुकी है आखिर कब चेतेगी सरकार। माननीय विधायको ये पहाड़ का बड़ा मुद्दा है जीवन को लेकर इस पर सख्त रूख रखिये!!

संरक्षण के नाम पर पहाड़ को जानवरो का बाड़ा मत बनाईये। वन विभाग के पास हमलो के तमाम आकंड़े मौजूद है। फिर सरकार इन हमलो को गंभीरता से क्यो नही ले रही है। मानव जीवन के यक्ष प्रश्न के साथ हमारी भी गुहार है....ऐ सरकार ! हमें जीने दो.....