पहाड़ियो बस करो, मत नाचो, प्वां बाघा रे पर। पिछले चार साल में बाघ ने मार डाले 190 लोग- चंद्र सिंह राही का गीत बना पहाड़ में मुसीबत

पहाड़ियो बस करो,  मत नाचो, प्वां बाघा रे पर। पिछले चार साल में बाघ ने मार डाले 190 लोग- चंद्र सिंह राही का गीत बना पहाड़ में मुसीबत

-गुणानंद जखमोला 
देहरादून। दिल्ली और देहरादून में इन दिनों पहाड़ की शादियों में स्व. लोकगायक चंद्र सिंह राही का एक गीत प्वां बाघा रे पर सभी पहाड़ी खूब कमर मटका रहे हैं। इन गीत का जादू उनके सिर चढ़ कर बोल रहा है, लेकिन वहीं इस गीत का मर्म बाघ और इसकी प्रजातियों द्वारा ढाए जा रहे जुल्मों की कहानी को ये पहाड़ी समझ ही नहीं पा रहे हैं। गुलदार और बाघों ने पिछले चार साल में उत्तराखंड के 190 लोगों को मार डाला। यह गुलदार के आतंक की दास्ता हैं। वन विभाग के मुताबिक इस वर्ष यानी 2019 में अब तक गुलदार और वन्य जीवों ने 34 लोगों को मार डाला। वर्ष 2016 में 66 लोगों को, वर्ष 2017 में 39 को और वर्ष 2018 में 51 लोगों को अपना निवाला बनाया।दो दिन पहले नौ साल के एक बच्चे को पौड़ी में गुलदार ने मार डाला। इसके ठीक एक दिन पहले रुद्रप्रयाग के पपडासू में एक महिला की जान ले ली थी। जब से पहाड़ के वनों में आग लगने का सिलसिला जारी हुआ है। वन्य जीव और मानव के बीच में संघर्ष बढ़ता जा रहा है। वनों में खाद्य श्रृंखला नष्ट होने के बाद वन्य जीवों की धमक गांव तक जा पहुंची है। सीटीआर में भी यही स्थिति है। सीटीआर से सटे गांवों में हाथियों, बंदरों, गुलदार और बाघों की धमक है। सीटीआर में भी इस साल 6 लोगों की जान गई। दिल्ली और दून में जब इस गाने पर ठुमके लगते हैं तो कहीं न कहीं यह संदेश जा रहा है कि बाघ की धमक से हम खुश हैं क्योंकि हम उस आतंक में नहीं रहते जहां गुलदार और बाघ रहते हैं। राही जी ने पता नहीं किन परिस्थितियों में इस गीत को गाया हो, लेकिन आज हालात ठीक नहीं हैं। इसलिए अब इस गाने पर नाचना बंद होना चाहिए।
पहाड़ियो बस करो, मत नाचो, प्वां बाघा रे पर। पिछले चार साल में बाघ ने मार डाले 190 लोग- चंद्र सिंह राही का गीत बना पहाड़ में मुसीबत पहाड़ियो बस करो,  मत नाचो, प्वां बाघा रे पर। पिछले चार साल में बाघ ने मार डाले 190 लोग- चंद्र सिंह राही का गीत बना पहाड़ में मुसीबत Reviewed by केदारखण्ड एक्सप्रेस on December 13, 2019 Rating: 5
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