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Thursday, 21 November 2019

लगातार खूंखार भालू के हमले से भयभीत लोग : दो महिने में एक दर्जन गौशालायें फाड़ चुका

लगातार खूंखार भालू के हमले से भयभीत लोग : दो महिने में एक दर्जन गौशालायें फाड़ चुका



रूद्रप्रयाग । उखीमठ विकासखण्ड के अन्तर्गत फाटा क्षेत्र में लगातार खूंखार भालू के हमले की घटनाएं बढ़ती ही जा रही हैं। क्षेत्र में भालू ग्रामीणों की गौशालाओं को फाड़कर गाय-बैलों को अपना शिकार बना रहा है। अब करीब एक दर्जन घटनाओं को अंजाम दे चुका है, लेकिन वन विभाग की तरफ से केवल पटाखे फोड़ने की कार्यावाही मात्र की अपने कर्तव्यों की इतिश्री की जा रही है। 

आपको बताते चले की उखीमठ के मैखड़ा गाँव के अलग-अलग तोकों में पिछले दो महिने में भालू ने गौशाला तोड़कर गाय-भैंसो पर हमला करने की दस घटनाओं को अंजाम दे दिया है। जिसने दुधारू गाय समेत आधा दर्जन गाय-भौंसों की मौत हो गई हैं जबकि एक दर्जन से अधिक गम्भीर रूप से घायल। बृस्पतिवार की रात्रि को भालू ने मैखंडा गांव के बुरेसिला तोक निवासी महिपाल सिंह भट्ट पुत्र दलीप सिंह भट्ट की गौशाला के दरवाजे तोड़करी दो बैलों पर हमला कर दिया। खूंखार भालू के हमले में एक बैल की मौत हो गई जबकि एक बैल गम्भीर रूप से घायल है। चार दिन पूर्व भी इसी गांव में एक दुधारू गाय को भालू ने मारा था। ग्रामीण कुलदीप अग्रवाल का कहना है कि वन विभाग केवल फोटो खींचकर मुआवजा देने की बात कर रहा है। जबकि खतराक भालू को पकड़ने या मरने के कोई भी प्रयास नहीं कर रहा है। 
पिछले दो महिने भालू के आतंक से ग्रामीण सहमे और भयभीत नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों ने कहना है कि यह भालू गौशाओं को जिस तरह से फाड़ रहा है वह लोक जीवन के लिए भारी खतरा है। गौशालाओं से टीन निकालना, पक्के दरवाजे तोड़कर गायों पर हमला करना बहुत ही खतरनाक हैं। उन्होंने वन विभाग से इसे जल्द मारने की मांग की है। 

दोपहर में भी अकले जाने में 
लगती है डर 

लगातार भालू के हमले से मैखड़ा गांव के लोग अब दोपहर में भी घर से बाहर जाने में कतरा रहे हैं। खासतौर पर महिलायें और छोटे बच्चों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो रखा है। खेतों में काम करने और जंगल जाने में अब यहां के ग्रामीणों को भारी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। जबकि सांय ढलते ही लोग घरों में कैद हो जाते हैं। ऐसे में भालू ने ग्रामीणों की आजादी छीन कर रख दी है। लेकिन जिम्मेदार विभाग और अधिकारी सुध लेने को तैयार नहीं हैं। दूसरी तरफ आतंक का प्राय बना खूंखार भालू अपने नये शिकार की तलाश में है।