सरकारों की उपेक्षा का शिकार हुआ है मंदाकिनी शरदोत्सव

मंदाकिनी शरदोत्सव मेले का रंगारंग आगाज : उपेक्षा का शिकार हुआ मेला 

-हरीश गुसाईं/ कालीचरण रावत/केदारखण्ड एक्सप्रेस 
राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर हर वर्ष लगने वाले मन्दाकिनी शरदोत्सव एवं कृषि अद्योगिक विकास मेला अगस्त्यमुनि का रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ आगाज हो गया है। पांच दिनों तक चलने वाले इस मेले की अध्यक्ष नगर पंचायत अध्यक्ष अरूणा बैंजवाल, महासचिव हर्ष बेंजवाल, संयोजक विक्रम सिंह नेगी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरीश गुसाईं, बलबीर लाल, राजेन्द्र भण्डारी, पृथ्वीपाल रावत, सचिव मुकेश डोभाल, कैलाश बेंजवाल हैं।

सरकारों की उपेक्षा का शिकार हुआ है मंदाकिनी शरदोत्सव

रुद्रप्रयाग जिला मुख्यालय से 17 किमी दूर गौरीकुंड केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मंदाकिनी के बाएं तट पर महर्षि अगस्त्यमुनि का पुण्य क्षेत्र है जो अगस्त्य ऋषि के नाम पर ही अगस्तमुनि कहलाता है इसी अगस्त मुनि के विशाल खेल मैदान में मंदाकिनी शरदोत्सव उत्सव एवं कृषि औद्योगिक विकास मेला वर्ष 2002 से राज्य स्थापना दिवस के उपलक्ष पर मनाया जाता है वर्ष 2002 में सेवानिवृत्त जिला पंचायत राज अधिकारी स्वर्गीय धन सिंह गुसांई ने क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए ऐतिहासिक गोचर मेले के तर्ज पर जनपद की ह्रदय स्थली में एक मेले का आयोजन करने की परिकल्पना की थी अपनी इस परिकल्पना को साकार करने के लिए उन्होंने अपने साथियों से इसकी चर्चा की जिसमें स्वर्गीय राधा कृष्ण खत्री स्वर्गीय किशोरीलाल डोगरी आयुक्त श्री नंद जबकि चिंतामणि सेमवाल शिवराज सिंह बुधवार पुष्कर सिंह कंडारी पदम सिंह गुसाईं भीम सिंह बिष्ट स्वर्गीय भजन सिंह बिष्ट स्वर्गीय गोविंद सिंह नेगी चंद्र सिंह राणा भगवती प्रसाद बेंजवाल समेत कई वरिष्ठ नागरिक नागरिक द्वारा राज्य स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर तीन दिवसीय मेले को मनाने का निर्णय लिया। मेले के संचालन के लिए तात्कालिक केदारनाथ विधायक श्रीमती आशा नौटियाल ने विधायक निधि से 20000 रूपये की मदद की, विभागीय स्टाल लगाकर सरकार की जन उपयोगी योजनाओं को जनता के सम्मुख लाया गया इसके लिए तत्कालीन उपजिलाधिकारी प्रभुनाथ सिंह का विशेष सहयोग रहा उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों के इस पहल का स्वागत करते हुए मजाक में इसे बूढ़ों का मेला कहा वर्ष 2003 में एक बार पुनः वरिष्ठ नागरिकों ने मेले का आयोजन किया इस बार तात्कालिक व्यापार संघ अध्यक्ष महेंद्र सिंह नेगी ने मेले में पूरा सहयोग करते हुए मेला संयोजक का दायित्व निभाया इस वर्ष भी श्रीमती आशा नौटियाल ने मेले संचालित करने के लिए विधायक निधि से 15000 रूपये प्रदान किए।
वर्ष 2004 में  स्थानीय जनप्रतिनिधि मेले के आयोजन को लेकर आगे आए और तात्कालिक ब्लाक प्रमुख श्री विनोद चंद्रा ने प्रधान नाकोट अगस्तमुनि के साथ मिलकर मेले को भव्य रुप दिया जिससे न केवल राजनीतिक व्यक्तियों का मेले के प्रति आकर्षण बढ़ा अपितु स्थानीय जनता की भी भागीदारी बढ़ती चली गई और मेला न केवल सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगा बल्कि क्षेत्रीय जनता के मनोरंजन का भी एक प्रयास बन गया मेले को भव्य बनाने में सबसे अधिक जिस व्यक्ति का सहयोग रहा वह है ग्राम नाकोट के सरपंच हर्षवर्धन बेंजवाल जिन्होंने वर्ष 2004 में मेला कमेटी के महासचिव का दायित्व निभाते हुए मेले को भव्य बनाने में अपना अमूल्य सहयोग दिया और इसे तीन दिवसीय से बढ़ाकर पांच दिवसीय किया वर्ष 2004 में मेले की वित्तीय व्यवस्था के लिए तात्कालिक 20 सूत्रीय कार्यक्रम उपाध्यक्ष सतपाल महाराज एवं तत्कालिक केदारनाथ विधायक श्रीमती आशा नौटियाल के अथक प्रयासों से मेले को पर्यटन के कैलेंडर में जगह मिली और मेले को पर्यटन विभाग से ₹100000 की वित्तीय स्वीकृति मिली वर्ष 2009 में तात्कालिक शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने मेले को अपग्रेड करते हुए ₹200000 देने की घोषणा की वर्ष 2012 में उखीमठ क्षेत्र में भीषण बाढ़ के कारण भारी जनधन की हानि होने के कारण इस मेले को संक्षिप्त रूप से 3 दिन आयोजित किया गया जबकि 2013 में केदारघाटी में आई भीषण बाढ़ के कारण हुई व्यापक जनहानि के कारण इस मेले को केवल प्रतीकात्मक रूप से राजस्थान दिवस के रूप में मनाया गया सरकार की घोर उपेक्षा के बावजूद मेला कमेटी ने मेले को भव्य बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है अब तक मेले में प्रदेश के मुख्यमंत्रियों डॉ रमेश पोखरियाल निशंक एवं हरीश रावत के साथ ही कहीं कैबिनेट मंत्री बतौर मुख्य अतिथि मेले की शोभा बढ़ा चुके हैं यही नहीं गढ़ गौरव नरेंद्र सिंह नेगी के अतिरिक्त प्रदेश के सभी बड़े गायक गायिका हैं और लोक कलाकार मेले में अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं। मेला अपने उद्देश्यों पर हर वर्ष खरा उतरता गया और मेले का स्वरूप बढ़ता गया इसका आकर्षण तो जनता के बीच बढ़ता गया मगर सरकारी मदद उसी अनुपात में घटती चली गई यह तो क्षेत्रीय विधायक एवं स्थानीय जनता का प्यार एवं सहयोग है जो इस मेले को हर जगह वोटों से पार लगाते हुए मेले को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं।

सरकारों की उपेक्षा का शिकार हुआ है मंदाकिनी शरदोत्सव सरकारों की उपेक्षा का शिकार हुआ है मंदाकिनी शरदोत्सव Reviewed by केदारखण्ड एक्सप्रेस on November 06, 2019 Rating: 5
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