गैरसैंण में ठंड लगती है बल --

गैरसैंण में ठंड लगती है बल.........

------------------------------------------------------------------नवल खाली/सभार फेसबुक वॉल से
अभी हाल ही में प्रदेश में शीतकालीन सत्र पर बात चल रही थी ,जिसके लिए विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि एज ए विधानसभा अध्यक्ष हम लोग गैरसैंण में सत्र करने के लिए तैयार हैं !! 
तभी अचानक मुख्यमंत्री साब त्रिवेंद्र रावत जी का बयान आया कि वहाँ हमारे कई वरिष्ठ विधायको को ठंड लग सकती है !!
अरे साब !!! तो ये एक रैबार है पहाड़ वासियों का आपको ---
अव्वा अपड़ी राजधानी, अव्वा अपडा घौर -----

साब लोगो -- ठंड लगेगी तो करारी बांझ की लकड़ियाँ जला देना , कंडाली उर्फ बिच्छु घास की गर्म तासीर वाली साग- भुज्जी बनवा लेना , भाँग की बीज की चटनी व कोदे की रोटी संग खा लेना !!! हाथ ,खुट्टों पर पुरानी गाय का नया घी लगवा देना  !!!  
भराड़ीसैंण की ऊंची डांडी काठीयों में अपने कर्मठ शरीर को घाम तपवा देना  !!! 
गरंटी है जिंदगी भर ठंड नहीं लगेगी !!! 

साब लोगो -- आप अभी तक कोरी  बातें कर रहे हो विंटर टूरिज्म की ?? इसकी शुरुआत आप गैरसैंण से करो कि हम सत्र के साथ साथ विंटर टूरिज्म की भी तैयारी कर रहे हैं ।

घाम तापने आओ जाड़ों में !! 
आ जाओ हमारे पाहाड़ों में !!! 

फिर देखना साब !! गोवा किनारे हाफ कच्छे में लेटे सैलानी भी दौड़े दौड़े चले आएंगे इन पहाड़ों मे !!
आप ही ठंड से डरोगे तो क्या खाक आएगा कोई विंटर टूरिज्म के लिए ?? 
बिच्छु घास कंडाली से कपड़े कुपडे जैसी बड़ी बड़ी बातें तो मैं नहीं जानता पर हाँ इसकी गर्म तासीर वाली भुज्जी लोगों को पसंद आएगी जाड़ों में !!! 
गरीब आदमी हूँ साब , भाँग के रेशों से 55 हजारी वास्कट की तो मैं नहीं जानता पर सैलानियों को इसके बीज की चटनी पसंद आएगी जाड़ों में !! 
वो भी हमारे खूबसूरत इन पहाड़ो में !!! 
जैसे लोग गोवा बीच किनारे लेटे रहते हैं ,उसी तर्ज पर हमारे बुग्यालनुमा तप्पडों पर घाम तपाई के लिए सैलानी लेटे रहें ,इसकी तरफ फोकस करने की आवश्यकता है !!!

आप गैरसैंण की धार से जब ये सन्देश देंगे कि---

आओ पहाड़ों में ... खूबसूरत जाड़ों में .... कंडाली की भुज्जी , कोदे की रोटी , भाँग की चटनी और  घाम तपाई फ्री !!! 

भाई साब । ये सुनकर सैलानियों का हुजूम दौड़ पड़ेगा ।।

जिस ठंड से आप डर रहे हो ,हमे उसी को तो बेचना है साब !! 
दुनिया के टॉप टूरिज्म कंट्री इसी ठंड को बेचकर मालों माल बन गए हैं ।। 
और आप कह रहे हो -- गैरसैंण में ठंड लगती है बल !!!
गैरसैंण में ठंड लगती है बल -- गैरसैंण में ठंड लगती है बल -- Reviewed by केदारखण्ड एक्सप्रेस on November 25, 2019 Rating: 5
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