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Saturday, 9 November 2019

ये मिट्टी सड़क के गढ्ढों पर नहीं पोखरी के विकास पर पड़ रही

ये मिट्टी सड़क के गढ्ढों पर नहीं पोखरी के विकास पर पड़ रही
-नीरज कण्डारी/केदारखण्ड एक्सप्रेस
पोखरी। सड़क को विकास पहला पैमाना कहा जाता है लेकिन पोखरी ब्लाॅक के भीतर जो सड़कों की स्थितियां हंै उससे आप भी असमाजस्य में पड़ जायेंगे। यह हम इसलिए कह रहे हैं कि यहां सड़कों पर पड़े गढ्ढों से सड़कों की पहचान कर पाना मुश्किल हो जाता है। आप भी सोचेंगे कि ये सड़कें हैं या तालाब। आश्चर्य और ताजुब की बात तो यह है कि जिस पोखरी ब्लाॅक मुख्यालय में विभाग के जिम्मेदार अधिकारी बैठते हैं उसी मुख्यालय में सड़कों की दहनीय स्थिति अधिकारियों का मुँह चिड़ा रही है, लेकिन अधिकारियों का कमाल तो देखिए सड़कों के गढ्ढों पर डामरिकरण करने की बजाय उन्हें लोगों के घरों के मलबे की मिट्टी से पाटा जा रहा है हालांकि सड़कों के गढ़्ढों पर मिट्टी डालने से लोगों की मुश्किलें कम तो नहीं होती है लेकिन नालियों का पानी मिट्टी के साथ मिलकर किचड़ बनकर और अधिक परेशानी का सबब जरूर बन जाता है। ऐसे में साफ कहा जा सकता है कि ये मिट्टी सड़क के गढ्ढों पर नहीं बल्कि पोखरी के विकास पर पड़ रही है।
दरअसल पोखरी-रूद्रप्रयाग मोटर मार्ग पर पोखरी के किलो मीटर एक, यानि जो नगर पंचायत के अन्तर्गत आता है पर लोक निर्माण विभाग की सड़क की स्थिति बेहद ही दयनीय हो रखी है। यहां सड़क का तो पता नहीं लेकिन उबाड़-खाबड़ में अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं। जबकि नालियों का निर्माण न होने से भी लोगों के घरों का पानी सड़कों पर बहता रहता है। हर बार की तरह आज भी गुनियाला खाल के पास सड़क पर बने तालाबों को मिट्टी से भरा गया। यह स्थिति तब है जब लोक निर्माण विभाग के अधिकारी पोखरी मुख्यालय में बैठते हैं। जबकि यही स्थिति पोखरी-हापला मोटर मार्ग की भी है और पोखरी-कर्णप्रयाग मोटर मार्ग की भी। पूरे विकासखण्ड और दूरस्थ क्षेत्रों मे सड़कों की स्थितियों का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। गढ्ढों में तब्दील सड़कों से जहां दुर्घनाओं का  हर समय भय बना रहता है वहीं इस बात को भी पुख्ता करता है कि विभाग को लोक जीवन की कोई परवाह नहीं है। समझ से परे यह भी कि आखिर अधिकारियों को ये गढ़ढे क्यांे ंनहीं दिखते हैं। इस सम्बन्ध में लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता एस एस मखलोगा से बात की तो उन्होंने कहा कि बजट न होने के चलते मिट्टी से गढ्ढों को भरा जा रहा है। 
पोखरी ब्लाॅक की स्थिति यह है कि जनता ने जिन जनप्रतिनिधियों को विकास की पैरवी करने की जिम्मेदारी सौंपी है वह विभाग से ठेकेदारी की सांठ-गांठ में अपना मुँह बंद किए हुए हैं तो आखिर विभाग की इस अराजकता के खिलाफ आवाज उठायेगा कौन?

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