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Friday, 22 November 2019

तीन दिन से घर पड़ा रहा महिला का शव, न ससुराल और न मायका पक्ष ने किया दाह संस्कार: हत्या की सम्भावनाएं!

तीन दिन से घर पड़ा रहा महिला का शव, न ससुराल और न मायका पक्ष ने किया दाह संस्कार: हत्या की सम्भावनाएं!

कुलदीप राणा आज़ाद 
कभी कभी हमारे आस-पास ऐसी घटनाएं घटित हो जाती हैं जिसे सुनकर ही मानवीय संवेदनाओं और इन्सानियत का पतन होने का भारी आभाष होने लगता है। यकीन नहीं होगा एक घर में तीन दिन से एक महिला का मृत शरीर पड़ा है, घर में उसका पती, दो बच्चे  12और 14 वर्ष के, सास मौजूद हैं। सबकुछ जानते हैं और मायके पक्ष को मृत्यु की खबर करते हैं, लेकिन मायका पक्ष से कभी कल आने की बात होती तो कभी परसो। अब जरा समझने की कोशिस कीजिए की अगर किसी  की अपनी बेटी-बहन की मृत्यु की खबर मिले तो वह क्या करेंगा? स्वाभाविक है कि सबसे पहले घटना स्थल पर जाने का प्रयास करेंगे। लेकिन आज एक ऐसा चौकाने वाला मामला आपको बताने जा रहे हैं जिसने मानवीय संवेदनाओं को तार-तार तो कर ही दिया है बल्कि महिला की मौत को भी सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है।   
पूरा मामला रूद्रप्रयाग जनपद के विकासखण्ड अगस्त्यमुनि के सिल्ला गाँव का है। यहाँ 11 नवम्बर को बिजेन्द्र लाल की पत्नी भागीरथी देवी पर आग लगने के कारण बुरी तरह झुलस गई थी।  बिजेन्द्र लाल द्वारा अपनी पत्नी को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अगस्त्यमुनि लाया गया। भागीरथी देवी की गम्भीर स्थिति को देखते हुए उन्हें श्रीनगर रेफर किया गया। रात करीब दो बजे वे श्रीनगर पहुंचे लेकिन यहां भी डाॅक्टरों ने भागीरथी की स्थिति को देखते हुए उन्हें हायर सेंटर रैफर कर दिया। बिजेन्द्र द्वारा अपनी पत्नी को अगले दिन यानि की 12 नवम्बर को देहरादून के जगदम्बा अस्पताल में भर्ती कराया गया। एक सप्ताह के इजाल के बाद भी भागीरथी की स्थिति में केाई सुधार नहीं हुआ और अंततः यहां के डाॅक्टरों ने भी हार मान ली। 18 नवम्बर को डाॅक्टरों ने हाथ खड़े करते हुए उन्हें अन्य जगह दिखाने को कहा। उसी दिन बिजेन्द्र लाल अपनी पत्नी को घर लाया और 19 नवम्बर को भागीरथी ने घर में दम तोड़ दिया। बिजेन्द्र लाल इस घटनाक्रम की जानकारी 11 नवम्बर से ही मायके पक्ष कलना चोपड़ा, विकासखण्ड अगस्त्यमुनि को दे रहा था, लेकिन अफसोस तो तब हुआ जब 19 नवम्बर को भागीरथी का देहावसान होने के बाद भी मायके पक्ष वाले नहीं आए। बिना मायके पक्ष के बिजेन्द्र लाल भागीरथी के शव का दाह संस्कार नहीं कर रहा था और तीन दिन बीत जाने के बाद भी शव घर में पड़ा रहा। 
आग लगने के कारण भागीरथी का शव करीब 70 प्रतिशत जल गया था तीन दिन तक मृतक का शव घर में रहने से बदबू मारने लगा थाा। आज मायके पक्ष कलना गांव के प्रधान ने इस संबध में अगस्त्यमुनि पुलिस को जानकारी दी जिसके बाद अगस्त्यमुनि थाना प्रभारी कौशल सिंह के नेतृत्व में एक पुलिस टीम सिल्ला गाँव पहुँची। लेकिन यहां का मंजर देखकर पुलिस भी हैरान थी। एक घर में तीन दिन से मृत शरीर पड़ा होने के बावजूद भी एक भी ग्रामीण बिजेन्द्र लाल के घर में नहीं था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय भेज दिया है। बिजेन्द्र लाल के अनुसार उसकी पत्नी ने आत्महत्या की है लेकिन घटनाक्रम जिस तरह से हुआ अब पुलिस उसे हत्या के नजरिए से भी देख रही है। अगस्त्यमुनि थाना प्रभारी कौशल सिंह का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही कुछ स्थिति साफ हो सकती है लेकिन हत्या की सम्भावनाओं को भी नाकारा नहीं जा सकता है।   
पूरे घटनाक्रम मे जो सवाल है वह पहला तो यह कि-
1. यह आत्महत्या है या हत्या? अगर आत्महत्या है तो उसके कारण क्या हैं और हत्या है तो यह किसने और क्यों की??
2. 19 नवम्बर को मौत होने के तीन दिन बाद भी पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी गई?
3. क्या महिला के मौत में मायके पक्ष का भी हाथ है, सबकुछ जानते हुए भी न तो समय से दाह संस्कार किया और न ही पुलिस को सूचना दी। 

मृतक भागीरथी देवी की माँ रदुली देवी ने आरोप लगाया है कि बिजेन्द्र सिंह उर्फ गुड्डू के अपने छोटे भाई की स्याली से अवैध संबंध थे, इस अवैध संबंध का उनकी बेटी भागीरथी हमेशा विरोध करती थी। इसी गुस्से में आकर बिजेन्द्र लाल ने भागीरथी को आग लगा दी। पुलिस के डर के कारण उसने नजदीकी अस्पताल में कहीं भी इलाज नहीं करवाया। अब पुलिस पूरे मामले की जाँच में जुट गई। 

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