द्वितीय केदार मद्दमहेश्वर के कपाट शीतकाल के लिए बंद: प्रशासन और सरकारों की उपेक्षा का दंश झेल रहा धाम

द्वितीय केदार मद्दमहेश्वर के कपाट शीतकाल के लिए बंद: प्रशासन और सरकारों की उपेक्षा का दंश झेल रहा धाम 

ऊखीमठद्वितीय केदार भगवान मद्दमहेश्वर मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। बम बम बोले के जयकारों के साथ ही सैकड़ों भक्त इस पल के साक्षी बने। अगले छ माह भगवान की पूजा अर्चना उखीमठ स्थिति ओंकारेश्वर मंदिर में सम्पादित होगी।
विधि-विधान, मंत्रोच्चार के साथ तीर्थ पुरोहितों-हक हकूकधारियों की मौजूदगी में आज सुबह 11 बजे द्वितीय केदार मद्दमेहश्वर के कपाट बंद कर दिए गए है। इससे पूर्व सुबह आठ बजे भगवान मद्दमहेश्वर की विशेष पूजा अर्चना के बाद मुख्य पुजारी बागेश लिंग ने बाबा के स्वयंभू लिंग को समाधि दी। मद्दमहेश्वर की भोग मूर्तियों की चल विग्रह उत्सव डोली में विराजमान किया गया जिसके बाद उत्सव डोली ने मंदिर की परिक्रमा कर अपने शीतकालीन पड़ाव के लिए रवाना हुई। बाबा की उत्सव डोली आज अपने पहले पड़ाव गौंडार गांव में रात्रि विश्राम करेंगी। इसके बाद 22 तारीख को द्वितीय पड़ाव राकेश्वरी मंदिर रांसी गांव, 23 को गिरिया गांव और 24 नवम्बर को अपने शीतकालीन गद्दीस्थल उखीमठ स्थिति ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान होगी। यही पर शीतकाल के छ माह भगवान मद्दमहेश्वर की पूजा अर्चना की जायेगी। इस वर्ष भगवान मद्दमहेश्वर के धाम में 6138 तीर्थ यात्रियों ने माथा टेका। भगवान मद्महेश्वर के अपने शीतकालीन गद्दीस्थल आने पर भगवान के स्वागत में उखीमठ में प्राचीन काल से चले आ रहे भव्य मेले का आयोजन किया जायेगा।
भगवान मद्महेश्वर के स्वागत में  तीन दिवसीय भव्य मेला : तैयारियां पूरी 
भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली के कैलाश से शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मन्दिर ऊखीमठ आगमन पर 23 से 25 नवम्बर तक लगने वाले मेले की सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गईं है । मेला समिति से लेकर प्रशासन व सभी विभाग मेले की तैयारियो में जुट गया । जी आई सी के खेल मैदान मे पाण्डाल बनाने का कार्य शुरू हो गया है । मेले को भव्य रूप देने के लिए मेला समिति भरपूर प्रयास कर रही है । बाहर से आने वाले दुकानदारों ने भी ऊखीमठ की ओर रूख कर दिया है । मेले के आयोजन को लेकर स्थानीय जनता में भारी उत्साह बना हुआ है । स्थानीय दुकानदारों ने भी अपने व्यापारिक प्रतिष्ठानो को सजाना शुरू कर दिया है । जानकारी देते हुए मेला सचिव / पूर्व प्रधान प्रकाश रावत ने बताया कि 23 नवम्बर को तीन दिवसीय मेले का उद्घाटन केदारनाथ रावल भीमा शंकर लिंग द्वारा किया जायेगा तथा बद्रीनाथ केदारनाथ मन्दिर समिति के पदाधिकारी व अधिकारी भी मेले के उद्घाटन में शिरकत करेंगे । उन्होंने बताया कि मेले के शुभारंभ अवसर पर स्थानीय विधालयो के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रहेगी । उन्होंने बताया कि 23 नवम्बर को उषाग्रुप के तत्वावधान में भीम घटोत्सकट मार्मिक नाटक का मंचन किया जायेगा । बताया कि 24 नवम्बर को प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत मेले मे शिरकत करेंगे तथा रात्रि को उत्तराखंड की प्रसिद्ध लोक गायिका हेमा नेगी करासी सहित उत्तराखंड के मशहूर कलाकारो के धार्मिक भजनों की प्रस्तुति दी जायेगी । उन्होंने बताया कि 25 नवम्बर को अनेक सास्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति व पुरूष्कार वितरण के साथ मेले का समापन्न होगा ।
मंदिर समिति के कार्याधिकारी एनपी जमलोकी ने बताया कि केदारनाथ मंदिर समिति द्वारा की मद्दमहेश्वर मेले की तैयारियां की जा चुकी हैं। उन्होनं कहा कि प्राचीन मद्दमहेश्वर मेला साल-दर-साल विस्तृत रूप लेता जा रहा है। उन्होंने क्षेत्रीय लोगों से मेले में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने का आवाहन किया।

द्वितीय केदार मद्दमहेश्वर के कपाट शीतकाल के लिए बंद: प्रशासन और सरकारों की उपेक्षा का दंश झेल रहा धाम द्वितीय केदार मद्दमहेश्वर के कपाट शीतकाल के लिए बंद: प्रशासन और सरकारों की उपेक्षा का दंश झेल रहा धाम Reviewed by केदारखण्ड एक्सप्रेस on November 21, 2019 Rating: 5
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