लोगों पर सवाल उठाने वाले पत्रकार सवालों के घेरे में? बड़े पत्रकार होने के अहंकार में मदहोश पत्रकारों ने बर्बाद कर दी लाखों की सम्पदा



लोगों पर सवाल उठाने वाले पत्रकार सवालों के घेरे में? बड़े पत्रकार होने के अहंकार में मदहोश पत्रकारों ने बर्बाद कर दी लाखों की सम्पदा

-कुलदीप राणा आजाद/केदारखण्ड एक्सप्रेस
रूद्रप्रयाग। वैसे तो पत्रकारिता को लोकतंत्र का चैथा स्तम्भ माना जाता है। समाजिक सरोकारों के लिए प्रतिबद्ध पत्रकार आईने के स्वरूप होता है जो निष्पक्ष जनता की आवाज उठाता है और समाज में व्याप विसंगतियों, समस्याओं, घोटालो को उजागर करता है। अन्याय उत्पीड़न, दबे, कुचले, शोषित, पीड़ित की आवाज बनकर उसे न्याय दिलाता है। लेकिन जब पत्रकारों के ही भीतर अहंकार और द्वेष की भावना पैदा हो जाय और वह अपने निजि स्वार्थों के लिए पत्रकारिता को एक हथियार के तौर पर इस्तेमान करने लगे तो निश्चित ही पत्रकारिता का पतन शुरू हो जाता है। रूद्रप्रयाग में भी कुछ ऐसे ही देखने को मिल रहा है। वरिष्ठ पत्रकार अनसूया प्रसाद मलासी ने सोशल मीडिया में एक पोस्ट की है जिसमें उन्होंने रूद्रप्रयाग प्रेस क्लब की जीर्ण-शीर्ण स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहीं गम्भीर सवाल खड़े किए हैं जिन पर वास्तव में चितंन और मनन करने की आवश्यकता है, अन्यथा पत्रकारिता के घोषित मापदंडो और नैतिक मूल्यों में आने वाले दिनों में जबरदस्त गिरावट देखने को मिल सकती है। पहले आपको वरिष्ठ पत्रकार अनसूया प्रसाद मलासी जी की पोस्ट से रूपरू करवाते हैं, उन्होंने लिखा है- 
शोषण, उत्पीडन और दूसरों की फटी में टाँग अड़ाने वाले पत्रकारों के लिए लाखों रूपए की लागत से बनाया गया जिला प्रेस क्लब भवन आज झाड़-झंकाड़ और शोषण-उत्पीड़न का शिकार बना हुआ है। 6 साल पहले बनाया गया यह भवन जीर्ण-शीर्ण हालत में है। न जाने किस पापी ग्रह-नक्षत्र में इसका लोकार्पण हुआ कि इसके ताले खुलते ही नहीं हैं। काश! इस प्रेस क्लब भवन के ताले खुलते, इसमें रौनक रहती, तो समस्त पत्रकार बिरादरी का फायदा होता। लेकिन कुछ लोग इसे ‘‘गरीब की जोरू’’ समझकर इसका रखरखाव रहा दूर, प्रेस क्लब में विधायक निधि से जो कम्पयूटर थे वह भी खराब हो चुके हैं। जो लाइब्रेरी थी वह भी दीमक चट कर गई। दरवाजे-खिड़कियां टूट गई। न जाने कुछ लोगों को क्यों इसे भूतहा रूप देखने में मजा आ रहा है। आने वाली पीढ़ी तो इसका जवाब पूछेगी ही, तो क्या जवाब होगा महोदय आप लोगों के पास??? जो इसके कर्ताधर्ता हैं, आप लोग इस पर शासन कर लेना लेकिन इसमें रौनक तो लौट जाए। क्या ऐसे लोगों के खिलाफ कोई आपराधिक षड़यंत्र का मामला बनता है।

दरअसल रूद्रप्रयाग-चोपड़ा मोटर मार्ग पर पुरानी ट्रेजरी के समीप वर्ष 2011 में करीब 29 लाख की लागत से रूद्रप्रयाग के पत्रकारों के लिए एक प्रेस क्लब भवन का निर्माण किया गया था। इसी दौरान करीब 5 लाख की लागत से इस प्रेस क्लब भवन की चार दीवारी भी की गई थी। प्रेस क्लब भवन के अंदर विधायक निधि से कम्प्यूटर, लाईब्रेरी समेत लाखों का सामान  मौजूद था, लेकिन इसे दुर्भाग्य ही कह सकते हैं कि 6 वर्षों में इस प्रेस क्लब भवन के ताले बहुमुश्किल तीन या चार बार से ज्यादा नहीं खुल पाए। अब आप सोच रहे होंगे कि कारण क्या है। तो सुनिए इस प्रेस क्लब भवन न खुलने का कारण कुछ पत्रकारों के अहकार और एक दूसरे के प्रति द्वेष की भावन रखने मात्र ही है। इस प्रेस क्लब के कर्ताधर्ताओं द्वारा खुद को बड़ा पत्रकार कहने की महत्वकांक्षा और प्रेस क्लब को अपनी बपौती समझने की लालसा के कारण सरकार के लाखों रूपयों की बर्बादी हो रही है। भवन की दरवाजे-खिड़कियां सड़ चुकी हैं, दीवालों पर पेड़ जम गए हैं जिस
कारण दीवाल पर मोटी दरारें पड़ गई हैं। यहीं नहीं प्रेस क्लब पर खुद का शासन चलाने के लिए कागजों में प्रेस क्लब की फर्जी कार्यकारणी का भी गठन किया जा रहा है जबकि 6 सालों से प्रेस क्लब के चुनाव ही नहीं हुए हैं। लेकिन अफसोस और लानत है कि खुद को बड़ा पत्रकार कहने वाले, समाज का आईना समझने वाले ही फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। रूद्रप्रयाग के पत्रकारों के पास अपना प्रेस क्लब भवन होते हुए भी ज्यादातर पत्रकारों ने आजतक प्रेस क्लब के अंदर कदम तक नहीं रखा है। प्रेस वार्ताओं के लिए पत्रकारों को कभी नेताओं के पीछे, होटलों में जाना पड़ता है तो कभी अधिकारियों के दफ्तरों में। इसके अलावा जनपद में कहीं अन्य शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन और अन्य कार्य यहां हो सकते हैं। पत्रकारों को चाहिए कि इस गम्भीर विषय पर यथाशीघ्र कार्यवाही की जाय और खड़हर हो रहे प्रेस क्लब भवन को सुचारू रूप से आरम्भ कर इसमें पत्रकारों को गतिविधियां आरम्भ की जाय ताकि समाज में एक अच्छा संदेश जाये और लाखों की सम्पति की बर्बादी न हो।


लोगों पर सवाल उठाने वाले पत्रकार सवालों के घेरे में? बड़े पत्रकार होने के अहंकार में मदहोश पत्रकारों ने बर्बाद कर दी लाखों की सम्पदा लोगों पर सवाल उठाने वाले पत्रकार सवालों के घेरे में? बड़े पत्रकार होने के अहंकार में मदहोश पत्रकारों ने बर्बाद कर दी लाखों की सम्पदा Reviewed by केदारखण्ड एक्सप्रेस on October 02, 2019 Rating: 5
Powered by Blogger.