जिम्मेदार सो रहे हैं, इन गढ्ढों से तो भगवान ही बचायें,

जिम्मेदार सो रहे हैं, इन गढ्ढों से तो भगवान ही बचायें, 

-भूपेन्द्र भण्डारी /केदारखण्ड एक्सप्रेस उस
रूद्रप्रयाग। भले ही सरकार और न्याय पालिका नये व्हीकल एक्ट के बाद यातायात के नियमों में हुए बदलाव से दुर्घटनाओं पर अंकुश लगने का दम भर रही हो, लेकिन सड़कों की खराब हालत और सडकों पर पड़े गढ्ढों भी हर समय दुर्घटनाओं को न्यौता दे रहे है, सवाल यह है कि वाहन चालक के तमाम कागजात पूरे न होने पर भारी भरकम चालान पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा काटा जा रहा है लेकिन इन खराब सड़कों के लिए जिम्मेदार विभाग पर कब और कौन कार्यवाही करेगा? ये तस्वीर  रूद्रप्रयाग जनपद मुख्यालय की है जहाँ सड़कों पर पड़े गढ्ढे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यहाँ अधिकारी अपने कर्तव्यों के प्रति संजीदा हैं। अक्सर इन जान लेवा गढ्ढों में कई बार दुपहिया वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं जबकि बारिश में ये गढ्ढे तालाब में तब्दील हो जाते हैं जिससे गाड़ी के टायरों से हिलोरे य मारता गंदा पानी और कीचड आते जाते लोगों पर गिरता है। लेकिन अधिकारियों को क्या, इन्हें तो लग्जरी गाडियों से बाहर आने की कहां जरूरत महसूस होती है। और दुर्घटना भी हो रही है तो क्या हुआ कोई मर नहीं रहा। रूद्रप्रयाग मुख्यालय की सडकों के हाल वाकई अधिकारी की सुस्त कार्यशैली को दर्शा रही है। जबकि ब्रॉच सडकों के और भी बुरे हाल हैं, और स्वाभाविक भी है जब मुख्यालय की सड़कों की इतनी दुर्गती  हो रखी है तो दूरस्थ और ग्रामीण अँचलों के लिंक मार्गों की स्थिति और भी खराब है। उधर चारधाम परियोजना के चलते राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी हर समय हादसों का भय बना रहता है।
व्यापार संघ के अध्यक्ष कांता प्रसाद नौटियाल ने कहा कि मुख्य बाजार ल की सड़कों के साथ ही हर तरफ सड़कों पर गढ्ढे पडे हैं जिनमें इन दिनों बरसात के कारणजजल भराव हो रखा है। ऐसे में न केवल  आने जाने वाले लोगों के लिए बल्कि पानी की पिक्चारी दुकानो के अंदर तक आ रही है। जबकि दुपहरिया वाहन चालकों के लिए भी दुर्घटना का सबब बनी हुई है। उन्होंने कहा कि कई बार जिलाधिकारी को इस इस बाबत कहा जा चुका है लेकि गढ्ढों में मिट्टी भरकर कर्तव्यों की इतिश्री कर दी जाती है । उन्होंने कहा कि इसे दुर्भाग्य ही कहिगें कि मुख्यालय की सडकों के गढों भरने के लिए कोई स्थाई ईलाज नहीं है तो समझा जा सकता है कि अन्य मार्गों की हालत क्या होगी। 

जिम्मेदार सो रहे हैं, इन गढ्ढों से तो भगवान ही बचायें, जिम्मेदार सो रहे हैं, इन गढ्ढों से तो भगवान ही बचायें, Reviewed by केदारखण्ड एक्सप्रेस on September 29, 2019 Rating: 5
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