एक्सक्लूसिव : मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की अधिकारी उड़ा रहे धज्जियां, भ्रष्टाचार की जाँच करने की बजाय गाँव में करवा रहे हैं समझौता

एक्सक्लूसिव : मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की अधिकारी उड़ा रहे धज्जियां, भ्रष्टाचार की जाँच करने की बजाय गाँव में करवा रहे हैं समझौता


-कुलदीप राणा आजाद/केदारखण्ड एक्सप्रेस 
रूद्रप्रयाग। भ्रष्टाचार पर अंकुश लागाने के लिए उत्तराखण्ड की त्रिवेन्द्र सरकार शुरूआत से ही जीरो टोलरेंस की नीति अपना रही है और इसके लिए बकायदा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन भी स्थापित की गई है, ताकि गांव स्तर से लेकर विभागीय स्तर पर हो रहे भ्रष्टाचार और अनिमिताओं को दूर किया जा सके और आम जनता और सरकारी विभागों के बीच पारदर्शिता बनी रहे। लेकिन सरकार की इस मंशा को उनके अधिकारी ही जमकर पलीता लगा रहे हैं। ताजा मामला रूद्रप्रयाग जनपद से सामने आया है जहाँ शिकायतकर्ता से ही समझौता करवाकर गांव में हो रहे बड़े भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की कोशिस की गई। अब आपको  पूरा मामला सिलसिलेवार समझाते हैं। 
दरअसल अगस्त्यमुनि विकासखण्ड के अन्तर्गत स्यूपुरी गाँव के भागचंद्र ने 31 अगस्त 2019 को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में अपने गांव में हुए सभी विकास कायों की जाँच करवाने की मांग की थी। शिकायकर्ता की शिकायत संख्या 31153 का संज्ञान लेते हुए 4 सितम्बर 2019 को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से खण्ड विकास अधिकारी अगस्त्यमुनि के नेतृत्व में एक जाँच कमेठी गठित की गई थी, जिसे इस पूरे प्रकरण की जांच सौंपी गई थी। जांच कमेठी मेें सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) अनसूया प्रसाद वशिष्ट व कनिष्ठ अभियंता ग्रामीण निर्माण विभाग अनूप रड़वाल द्वारा स्यूपुरी गाँव जाकर जांच आरम्भ की गई। वर्ष 2014 से 2019 तक हुए इस गाँव के सभी विकास कार्यों में 6 कार्य अपूर्ण पाये गए जिसमें पंचायत भवन मरमत, प्रसूति गृह भंगार, खिलपति लाल से प्रेमलाल के मकान तक सी0सी0मार्ग निर्माण, पटूडी बैंड से दलजीत लाल के मकान तक सी0सी0 तथा खडिंजा मार्ग, भंगार में पुश्ता निर्माण तथा सी0सी0 मार्ग, भंगार तोक में पेयजल टैंक मरम्मत कार्य शामिल थे। 
ग्राम प्रधान दलजीत लाल द्वारा स्वीकार किया गया कि उनके द्वारा ये कार्य पूरे नहीं किए गए हैं और वे तीन माह के भीतर इन सभी अपूर्ण कार्यों को पूरा करेंगे। इसके लिए बकायदा प्रधान द्वारा जाँच कमेटी को लिखित पत्र भी दिया गया। 
प्रधान द्वारा दिए अपूर्ण कार्यो को तीन माह के भीतर पूरा करने संबंधित पत्र
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अब जबकि प्रधानों के बस्ते भी जमा हो चुके हैं और ग्राम पंचायतों का चार्ज प्रशासकों के हवाले हैं। ऐसे में प्रधान कहां से इन कार्यों को पूरा करेगा यह अपने आप में बड़ा सवाल है? लेकिन इससे भी बड़ी हैरानी की बात यह है कि उसी दिन शिकायतकर्ता भागचंद्र जाँच कमेठी को एक पत्र सौंपता है जिसमें वह अपने गांव में हुए सभी विकास कार्यों से संतुष्टिता जाहिर करता है और जांच को वापस लेता है, यह जानते हुए भी कि प्रधान द्वारा 6 कार्य पूरे नहीं किए हैं जबकि उन कार्यों के लिए आवंटित बजट के भी  वारे-न्यारे किए जा चुके हैं। यह भी सवाल पूछा जाना चाहिए कि क्या जांच कमेठी द्वारा शिकायतकर्ता पर अनैतिक दबाव तो नहीं बनाया गया?

इसके बाद जांच कमेठी शिकायतकर्ता के समझौतानामा पत्र को आधार बनाकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में इस मामले का निस्तारण कर देती है। लेकिन यहां एक अहम सवाल यह भी खड़ा होता है कि जांच कमेटी ने आखिर क्या जांच की है? साफ जाहिर हो रहा है कि गाँव स्तर पर हुए बड़े भ्रष्टाचार पर जांच कमेटी द्वारा भी पर्दा डालने की कोशिस की गई है। पहला सवाल तो यह उठता है कि आखिर प्रधान द्वारा बजट खर्च करने के बाद भी 6 कार्य क्यों पूरे नहीं किए किए और शिकायत होने बाद ही उन्हें तीन महिने में क्यों पूरा करने के लिए कहा गया? दूसरा सवाल यह कि प्रधानों का कार्याकाल पूर्ण होने और बस्ता जमा होने के बाद गांव में अधूरे पड़े निर्माण कार्यों को वह तीन माह के भीतर कैसे और कहा से पूरा करेगा? तीसरा अहम सवाल यह भी उठता है कि सरकार द्वारा गठित की गई जांच टीम ने गांव में क्या जाँच की? जबकि प्रधान द्वारा स्वयं स्वीकार किया गया कि उसने 6 कार्य पूरे नहीं है और बजट खर्च हो चुका है? इस पूरे प्रकरण में जाँच कमेटी द्वारा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में कहीं भी प्रधान के अधूरे कार्यों का जिक्र नहीं किया गया है और इस पूरे मामले को निस्तारित कर दिया गया है।
शिकायतकर्ता भागचंद्र द्वारा जांच कमेठी को दिया गया समझौता पत्र

पूरे मामले को पढ़कर आप को सहज ही अंदाजा हो गया होगा कि कैसे भ्रष्टाचार निवारण केन्द्र का मखौल अधिकारियों द्वारा उड़ाया जा रहा है, और मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की जीरो टोलरेंस नीति पर बट्टा लगाया जा रहा है। बहरहाल अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या इस पूरे प्रकरण पर जिले के उच्चाधिकारी संज्ञान लेते हैं या नही। 
 केदारखण्ड एक्सप्रेस की टीम इस पूरे मामले में ग्राउण्ड जीरों स्तर पर और अधिक जाँच करेगी और अन्य कार्योें में हुए भ्रष्टाचार और अनिमिताओं को भी उजागर करेगी ताकि भ्रष्टचार के इस खेले में संलिप्त सभी दोषियों को बेनकाब किया जा सके। 
जांच कमेठ द्वारा खण्ड विकास अधिकारी को सौंपी गई जांच आख्ख्या। 

एक्सक्लूसिव : मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की अधिकारी उड़ा रहे धज्जियां, भ्रष्टाचार की जाँच करने की बजाय गाँव में करवा रहे हैं समझौता एक्सक्लूसिव : मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की अधिकारी उड़ा रहे धज्जियां, भ्रष्टाचार की जाँच करने की बजाय गाँव में करवा रहे हैं समझौता Reviewed by केदारखण्ड एक्सप्रेस on September 13, 2019 Rating: 5
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